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न केन्द्र सरकार झुकी और न विपक्ष अड़ा और अब चलेगी संसद

Wed, 27 Dec 2017 05:55 PM IST
शशिधर पाठक, नई दिल्ली 
शशिधर पाठक, नई दिल्ली  Updated Wed, 27 Dec 2017 05:55 PM IST
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Neither Government surrendered nor opposition refrained and now Parliament will function
राज्यसभा - फोटो : PTI
संसद को सुचारू रूप से चलाना जहां सत्ता पक्ष की जिम्मेदारी है, वहीं विपक्ष भी इसके लिए कम जिम्मेदारी नहीं है। इसका दूसरा सुखद पक्ष यह रहा कि सुबह सदन का कामकाज चलाने के लिए हुई बैठक में विपक्ष और सत्ता पक्ष ने एक-एक कदम आगे बढ़कर अपनी जिद को साझा कर लिया। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा गुजरात विधानसभा चुनाव प्रचार के दौरान पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी को लेकर बनासकांठा में दिए बयान पर संसद का गतिरोध टूट गया। विपक्ष के नेता गुलाम नबी आजाद ने अरुण जेटली के स्पष्टीकरण से ही काम चला लिया। 
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विपक्ष इस मामले को लेकर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से स्पष्टीकरण की मांग कर रहा था। इसको लेकर पिछले सप्ताह संसद के दोनों सदनों में कामकाज प्रभावित रहा। इस सप्ताह भी दो दिन हल्ला-हंगामा में निकल गया। लेकिन अंतत: दोनों पार्टियों के फ्लोर प्रबंधकों ने बीच का रास्ता निकाल लिया। विपक्ष ने स्पष्टीकरण की मांग की तो सत्ता पक्ष ने वित्तमंत्री अरुण जेटली के वक्तव्य का प्रस्ताव रखा। विपक्ष ने इसे मान लिया। इसके जवाब में सत्ता पक्ष से प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के खिलाफ अभद्र टिप्पणी का प्रश्न आया तो राज्य सभा में विपक्ष के नेता गुलाम नबी आजाद के बयान पर सहमति बन गई।
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क्या कहा जेटली ने
अरुण जेटली ने हिमाचल और गुजरात विधानसभा चुनाव प्रचार का हवाला देते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अपने भाषण में पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह या पूर्व उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी की देश भक्ति और निष्ठा पर कोई सवाल नहीं खड़ा किया है और न ही उनकी इस तरह की कोई मंशा थी। इस तरह की कोई भी धारणा बनाना गलत है। जेटली ने कहा कि हम दोनों नेताओं का सम्मान करते हैं और देश के लिए उनकी प्रतिबद्धता को मानते हैं। इतना कहने के साथ जेटली अपने स्थान पर बैठ गए।
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गुलाम नबी आजाद ने भी दिखाई गर्म जोशी
गुलाम नबी आजाद ने कहा कि प्रधानमंत्री के बयान पर विपक्ष स्पष्टीकरण की मांग कर रहा था। हम इस संदर्भ में सदन के नेता के बयान का सम्मान करते हैं। आजाद ने कहा कि मैं यह भी कहना चाहता हूं कि हम खुद प्रधानमंत्री पद की गरिमा को नहीं गिराना नहीं चाहते। हम नहीं चाहते कि प्रधानमंत्री के बारे में कोई अशोभनीय टिप्पणी करे। इसलिए चुनाव प्रचार के दौरान प्रधानमंत्री के खिलाफ की गई किसी टिप्पणी या बयान का हम समर्थन नहीं करते। प्रधानमंत्री के खिलाफ कोई भी अपमानजनक बयान नहीं दिया जाना चाहिए।


खड़े हुए नरेश अग्रावाल
सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच राज्यसभा में सहमति देखकर समाजवादी पार्टी के सांसद नरेश अग्रवाल से नहीं रहा गया। वह अपने स्थान पर खड़े हुए और कुछ कहने की कोशिश की। नरेश अग्रवाल कहना चाहते थे कि स्पष्टीकरण प्रधानमंत्री से मांगा जा रहा था। उन्होंने नहीं दिया। सदन के नेता ने दिया और विपक्ष ने मान लिया। इस पर सभापति एम वेंकैया नायडू ने उन्हें शांत कराते हुए सुबह हुई बैठक का हवाला दिया। इसके बाद सदन की कार्यवाही सुचारू रूप से आगे बढ़ गई।
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