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ट्रॉमा सेंटर की लापरवाही: वीरेंद्र के बदले बेवजह कर दी बुजुर्ग विजेंद्र की सर्जरी
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
Updated Sat, 21 Apr 2018 03:47 AM IST
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ट्रॉमा सेंटर (फाइल फोटो)
- फोटो : amar ujala
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दिल्ली सरकार के सुश्रुत ट्रॉमा सेंटर में घोर लापरवाही का मामला सामने आया है। वहां जिस मरीज की सर्जरी होनी थी, उसकी जगह दूसरे की सर्जरी कर दी गई। परिजनों ने शुक्रवार को मामले की सूचना सिविल लाइंस थाने को देकर काफी हंगामा किया। वहीं अस्पताल के एमएस अजय बहल ने ऐसे किसी मामले से साफ इनकार किया है। जानकारी के मुताबिक, वीरेंद्र नामक मरीज के पैर की सर्जरी होनी थी, लेकिन डॉक्टरों ने विजेंद्र त्यागी नामक शख्स की सर्जरी कर दी, जबकि उसे इसकी जरूरत नहीं थी।
पीड़ित के बेटे अरुण त्यागी ने बताया कि वह गाजियाबाद में लोनी के मंडोला में रहते हैं। उनके पिता किसान हैं, अरुण खुद मेट्रो में काम करते हैं। 17 अप्रैल को उनके पिता का 8 बजे ट्रोनिका सिटी में एक्सीडेंट हो गया, वह बाइक पर थे। पिता की आंखों पर ट्रक की रोशनी की चमक पड़ी, जिससे उनकी बाइक अनियंत्रित हो गई। हादसे में वह बुरी तरह घायल हो गए। परिजन उन्हें हादसे के करीब 2 घंटे बाद 10 बजे सुश्रुत ट्रॉमा सेंटर लेकर आए।
डॉक्टरों ने उन्हें भर्ती कर सिर में सात टांके लगाए। बृहस्पतिवार को अस्पताल से उनकी छुट्टी होनी थी। अरुण का आरोप है कि बृहस्पतिवार को वीरेंद्र नामक मरीज भी आया, जिसके पैर में रॉड पड़नी थी। डॉक्टर गलती से उसकी जगह उनके पिता को ले गए और उनके पैर का ऑपरेशन कर दिया। इस दौरान वहां मौजूद मां विमला को बाहर जाने को कहा। अरुण का कहना है कि उनके पिता को पैर में कोई चोट नहीं थी।
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पीड़ितों को पता ही नहीं चला क्या हुआ
सब कुछ इतनी जल्दी में हुआ कि विजेंद्र त्यागी डॉक्टरों को यह नहीं बता पाए कि उनके पैर की सर्जरी नहीं होनी है। उन्हें पहले सुन्न होने का इंजेक्शन दिया गया, फिर बेहोश कर दिया गया।
डॉक्टर देते रहे दिलासा
मामले की जानकारी मिलने के बाद डॉक्टर उसे दिलासा देते रहे। जानकारी के मुताबिक देर शाम को डॉक्टरों ने इस मामले में समझौता करने की भी कोशिश की।
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पीड़ित के बेटे अरुण त्यागी ने बताया कि वह गाजियाबाद में लोनी के मंडोला में रहते हैं। उनके पिता किसान हैं, अरुण खुद मेट्रो में काम करते हैं। 17 अप्रैल को उनके पिता का 8 बजे ट्रोनिका सिटी में एक्सीडेंट हो गया, वह बाइक पर थे। पिता की आंखों पर ट्रक की रोशनी की चमक पड़ी, जिससे उनकी बाइक अनियंत्रित हो गई। हादसे में वह बुरी तरह घायल हो गए। परिजन उन्हें हादसे के करीब 2 घंटे बाद 10 बजे सुश्रुत ट्रॉमा सेंटर लेकर आए।
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डॉक्टरों ने उन्हें भर्ती कर सिर में सात टांके लगाए। बृहस्पतिवार को अस्पताल से उनकी छुट्टी होनी थी। अरुण का आरोप है कि बृहस्पतिवार को वीरेंद्र नामक मरीज भी आया, जिसके पैर में रॉड पड़नी थी। डॉक्टर गलती से उसकी जगह उनके पिता को ले गए और उनके पैर का ऑपरेशन कर दिया। इस दौरान वहां मौजूद मां विमला को बाहर जाने को कहा। अरुण का कहना है कि उनके पिता को पैर में कोई चोट नहीं थी।
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पीड़ितों को पता ही नहीं चला क्या हुआ
सब कुछ इतनी जल्दी में हुआ कि विजेंद्र त्यागी डॉक्टरों को यह नहीं बता पाए कि उनके पैर की सर्जरी नहीं होनी है। उन्हें पहले सुन्न होने का इंजेक्शन दिया गया, फिर बेहोश कर दिया गया।
डॉक्टर देते रहे दिलासा
मामले की जानकारी मिलने के बाद डॉक्टर उसे दिलासा देते रहे। जानकारी के मुताबिक देर शाम को डॉक्टरों ने इस मामले में समझौता करने की भी कोशिश की।