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इस दशहरा नहीं दिखा 'गुडलक' लाने वाला नीलकंठ पक्षी, जानिए क्या है वजह
टीम डिजिटल/अमर उजाला
Updated Sun, 01 Oct 2017 12:26 PM IST
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नीलकंठ पक्षी
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देश ने हर बार की तरह धूमधाम से विजयादशमी मनाई। लेकिन ज्यादातर हिस्सों में एक चीज की कमी रही वह था नीलकंठ पक्षी। नीलकंठ को दशहरा के दिन देखना शुभ माना जाता है। ऐसी मान्यता है कि जिस दिन भगवान राम का लंकापति रावण से युद्ध था तब राम ने नीलकंठ को देखा था। तब से लोग दशहरा पर नीलकंठ को देखने की चाहत रखते हैं।
दशहरा पर दोस्तों-परिवार को बधाई देते हुए लोग मैसेज में नीलकंठ की तस्वीर जरूर भेज रहे थे लेकिन सामने से देखना ज्यादातर को नसीब नहीं हुआ। नीलकंठ शिव का भी नाम है। उत्तर भारत में तो इसको देखकर एक गाना भी गाया जाता है। इसमें कहते हैं 'नीलकंठ तुम नीले रहियो, दूध भात का भोज करियो, हमारी बात राम से कहियो।'
यह भी पढ़ें: इस अनोखे मंदिर में विराजमान है 'महाशिवभक्त रावण'
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टाइम्स ऑफ इंडिया की खबर के मुताबिक, यूपी के बिजनौर में पहले नीलकंठ काफी आसानी से दिख जाते थे। लेकिन इस दशहरा पर ऐसा नहीं हुआ।
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दशहरा पर दोस्तों-परिवार को बधाई देते हुए लोग मैसेज में नीलकंठ की तस्वीर जरूर भेज रहे थे लेकिन सामने से देखना ज्यादातर को नसीब नहीं हुआ। नीलकंठ शिव का भी नाम है। उत्तर भारत में तो इसको देखकर एक गाना भी गाया जाता है। इसमें कहते हैं 'नीलकंठ तुम नीले रहियो, दूध भात का भोज करियो, हमारी बात राम से कहियो।'
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टाइम्स ऑफ इंडिया की खबर के मुताबिक, यूपी के बिजनौर में पहले नीलकंठ काफी आसानी से दिख जाते थे। लेकिन इस दशहरा पर ऐसा नहीं हुआ।
ये हैं कारण
नीलकंठ पक्षी
नीलकंठ की संख्या इसलिए कम होती जा रही है क्योंकि किसान अब खेत में कीटनाशक का इस्तेमाल करने लगे हैं। नीलकंठ का खाना वे ही कीड़े होते हैं जिनको कीटनाशक खत्म कर देते हैं। पहले नीलकंठ को किसानों का दोस्त कहा जाता था।
इसके अलावा बचे हुए नीलकंठ पक्षियों को लोगों ने कैद कर लिया है। उन्होंने इसको धंधा बना लिया है। नीलकंठ को पिंजरे में बंद करके लोगों के घर लेकर जाया जाता है और उसके 'दर्शन' करवाने के बदले पैसे लिए जते हैं।
एक्टपर्ट मानते हैं कि पुराने पेड़ों का गिरना भी नीलकंठ के कम होने का कारण हो सकता है। ऐसा इसलिए क्योंकि नीलकंठ ऊंचे और पुराने पेड़ पर ही अंडे देते हैं। अपने मुताबिक हालात ना मिलने की वजह से नीलकंठ कहीं और जा रहे हैं।
इसके अलावा बचे हुए नीलकंठ पक्षियों को लोगों ने कैद कर लिया है। उन्होंने इसको धंधा बना लिया है। नीलकंठ को पिंजरे में बंद करके लोगों के घर लेकर जाया जाता है और उसके 'दर्शन' करवाने के बदले पैसे लिए जते हैं।
एक्टपर्ट मानते हैं कि पुराने पेड़ों का गिरना भी नीलकंठ के कम होने का कारण हो सकता है। ऐसा इसलिए क्योंकि नीलकंठ ऊंचे और पुराने पेड़ पर ही अंडे देते हैं। अपने मुताबिक हालात ना मिलने की वजह से नीलकंठ कहीं और जा रहे हैं।