फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Moradabad News ›   needs to Traditional work to ultra-modern

खतरों से भरे परंपरागत काम को अत्याधुनिक करने की जरूरत

Thu, 02 Feb 2017 06:15 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, मुरादाबाद
ब्यूरो/अमर उजाला, मुरादाबाद Updated Thu, 02 Feb 2017 06:15 PM IST
विज्ञापन
needs to Traditional work to ultra-modern
मुरादाबाद के 60 हजार कारीगर लगे हैं धातुओं से तैयार प्रॉडक्ट की ढलाई और पॉलिस के कारोबार में डिजिटल इंडिया के नारे के साथ प्रगति के पथ पर बढ़ रहे हिंदुस्तान के कुछ काम इस आधुनिक नारे को मुंह चिढ़ाते हुए दिखाई देते हैं। दुनिया में पीतल नगरी के नाम से मशहूर मुरादाबाद शहर पीतल प्रॉडक्ट के निर्यात के लिए अलग पहचान रखता है। जहां एक ओर आधुनिक युग में अधिकांश काम मशीनों से किए जाने लगे हैं वहीं मिट्टी से तैयार सांचे और 1200 डिग्री तापमान की खुली भट्टी पर आज भी पीतल और एल्यूमिनियम के प्रॉडक्ट तैयार किए जा रहे हैं।
विज्ञापन


इस काम में जुटे लोगों को रोजाना आग, धूल, तेजाब और करंट से जूझना पड़ता है। हालांकि इस काम के लिए मशीनें भी हैं लेकिन देश के कुछ चुनिंदा शहरों में ही इनकी उपलब्धता है। मुरादाबाद में आज भी करीब 60 हजार लोग परंपरागत तरीके से सांचे और भट्ठी पर काम कर रहे हैं। खास बात यह है कि किसी नए प्रॉडक्ट की डिजाइन को इस परंपरागत तरीके से ही तैयार किया जा सकता है। अगर खतरों की बात करें तो आग, धूल, तेजाब और तेजाब से जूझते हुए कारीगर सांस की तमाम बीमारियों से ग्रस्त हो जाते हैं।
विज्ञापन


वहीं कारीगरों की कमाई को देखा जाए तो प्रॉडक्ट के मूल्य के सामने वह कुछ भी नहीं है। इसी का कारण है कि कारीगर आर्थिक तंगी से जूझता रहता है, जबकि उद्यमी आगे बढ़ते जाते हैं। सांचा तैयार करना यानी धातु के प्रॉडक्ट की मैन्यूफैक्चरिंग की शुरुआत : जिस प्रॉडक्ट को तैयार करना होता है उसके नमूने की डिजाइन को मिट्टी में शेप दिया जाता है। इससे सांचा तैयार होता है। पीतल अथवा एल्यूमिनियम की कच्ची सिल्ली को भट्टी में गलाकर सांचे में डाला जाता है। इससे प्रॉडक्ट तैयार होता है। बाद में सफाई के लिए ग्रांडर, तेजाब, निकिल, प्लेटिंग से गुजरते हुए बाजार के लिए प्रॉडक्ट तैयार होता है।
विज्ञापन
विज्ञापन



 

कारीगरों के लिए खतरे

needs to Traditional work to ultra-modern
मुरादाबाद के इन मोहल्लों में होता है ढलाई-पॉलिश का काम
कटघर, मुगलपुरा, गलशहीद, कटारशहीद, ठठेरा मुहल्ला, असालतपुरा, जामा मस्जिद, वारसी नगर, पीरजादा, चक्कर की मिलक

कारीगरों के लिए खतरे 
- दमा की बीमारी
- टीबी की बीमारी
- किडनी खराब
- सांस की सारी बीमारियां
- करंट से मौत हो जाती है
- कलर करने वाला वायलर फट जाता है
- गैस चेंबर में आग लग जाती है।
 
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed