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Maharashtra: सुप्रीम कोर्ट से सिडको को झटका, शीर्ष न्यायालय ने कहा- बच्चों के लिए कुछ हरे-भरे मैदानों की जरूरत

Mon, 04 Nov 2024 06:39 PM IST
पवन पांडेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला Published by: पवन पांडेय Updated Mon, 04 Nov 2024 06:39 PM IST
सार

सर्वोच्च न्यायालय ने सोमवार को नगर एवं औद्योगिक विकास निगम (सिडको) की याचिका खारिज कर दी, जिसमें नवी मुंबई में एक खेल परिसर के लिए निर्धारित भूमि को निजी बिल्डरों को फिर से आवंटित करने के महाराष्ट्र सरकार के कदम के खिलाफ बॉम्बे उच्च न्यायालय के आदेश को चुनौती दी गई थी।

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Need green spaces for kids: SC junks plea against order saying no transfer of sports complex land
Supreme Court - फोटो : PTI

विस्तार

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को सिटी एंड इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (सिडको) की याचिका खारिज कर दी, जिसमें नवी मुंबई में एक खेल परिसर के लिए निर्धारित भूमि को निजी बिल्डरों को पुनः आवंटित करने के महाराष्ट्र सरकार के कदम के खिलाफ बॉम्बे हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती दी गई थी।
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'बच्चों के लिए कुछ हरे-भरे मैदानों की जरूरत'
भारत के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) डीवाई चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति जेबी पारदीवाला और न्यायमूर्ति मनोज मिश्रा की पीठ ने नवी मुंबई जैसे शहरी क्षेत्रों में हरित स्थानों को संरक्षित करने के महत्व पर जोर दिया। शहरी विस्तार के बीच खुले क्षेत्रों की घटती उपलब्धता को रेखांकित करते हुए सीजेआई ने टिप्पणी की, हमें अपने बच्चों के लिए कुछ हरित स्थानों की आवश्यकता है, खासकर मुंबई जैसे शहरों में।सीजेआई ने आगे कहा, ये कुछ बचे हुए हर-भरे जगह हैं, और हमें इन्हें संरक्षित करना चाहिए। सिडको के बारे में ज्यादा कुछ नहीं कहना चाहिए। उन्होंने बताया कि मॉल और आवासीय परिसरों के निर्माण के लिए बिल्डरों को हरित क्षेत्र दिए गए थे। सीजेआई ने कहा कि नवी मुंबई के बच्चों को स्कूल से लौटने के बाद खेल खेलने के लिए पड़ोसी रायगढ़ जिले में कई किलोमीटर की यात्रा नहीं करनी चाहिए। राज्य सरकार ने खेल परिसर को रायगढ़ जिले के मानगांव में स्थानांतरित करने का भी फैसला किया था, जो मौजूदा साइट से 115 किलोमीटर दूर है।
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'मुंबई और नवी मुंबई जैसे शहरों में हर-भरे जगहों का हो संरक्षण'
पीठ ने पहले मुंबई और नवी मुंबई जैसे शहरों में बचे हुए कुछ हरित क्षेत्रों के संरक्षण पर जोर दिया था, जो केवल ऊर्ध्वाधर विकास देख रहे थे। नवी मुंबई में भूमि 2003 और 2016 में खेल परिसर के लिए निर्धारित की गई थी, लेकिन योजना प्राधिकरण ने इसका एक हिस्सा आवासीय और वाणिज्यिक उद्देश्यों के लिए एक निजी डेवलपर को आवंटित कर दिया था। शीर्ष अदालत ने संक्षिप्त सुनवाई के दौरान कहा था, सरकार बची हुई हरित जगहों पर घुसपैठ करती है और उन्हें बिल्डरों को दे देती है। सीजेआई ने आगे कहा, मुंबई और नवी मुंबई जैसे शहरों में बहुत कम हरित क्षेत्र बचे हैं। आपको उन्हें संरक्षित करना होगा और बिल्डरों को निर्माण, निर्माण, निर्माण और निर्माण करने के लिए नहीं देना होगा।
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'खेल परिसर के लिए कौन करेगा 115 किमी की यात्रा?'
पीठ को यह जानकर प्रथम दृष्टया आश्चर्य हुआ कि राज्य स्तरीय खेल परिसर के लिए बनाई गई भूमि को विकास के लिए आवंटित किया जा रहा था और प्रस्तावित सुविधाओं को रायगढ़ जिले में स्थानांतरित किया जाना था। पीठ ने आश्चर्य जताया कि खेल परिसर की सुविधाओं का लाभ उठाने के लिए 115 किलोमीटर की यात्रा कौन करेगा, जिससे कुछ वर्षों बाद उस भूमि का भी यही हश्र होने की आशंका है। इसके बाद सर्वोच्च न्यायालय ने कहा कि नवी मुंबई में खेल परिसर के लिए बनाई गई भूमि का कोई हस्तांतरण नहीं होगा। जुलाई में, बॉम्बे उच्च न्यायालय ने राज्य के निर्णय को यह कहते हुए खारिज कर दिया था कि खेलों ने लोगों और राष्ट्र के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। कोर्ट ने कहा था कि, यह सही समय है कि सरकार इसे व्यावसायीकरण और कंक्रीटीकरण मंत्र के बराबर महत्व दे।

महाराष्ट्र सरकार का उपक्रम है सिडको
महाराष्ट्र सरकार का उपक्रम सिडको, जिसकी स्थापना 1970 में मुंबई के लिए एक उपग्रह शहर विकसित करने के लिए की गई थी, ने उच्च न्यायालय के फैसले के खिलाफ अपील दायर की थी। शीर्ष अदालत ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि जिस निजी बिल्डर को जमीन आवंटित की गई थी, वह रिफंड मांग सकता है। सिडको की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि हाईकोर्ट जनहित याचिका पर फैसला सुनाते समय सरकारी जमीन बांटने का काम नहीं कर सकता।


सॉलिसिटर जनरल ने क्या दिया तर्क?
उच्च न्यायालय के फैसले को खारिज करने का आग्रह करते हुए जनरल तुषार मेहता ने कहा कि हाईकोर्ट का आदेश शहर नियोजन गतिविधियों को चलाने के लिए था, जो राज्य के अधिकार क्षेत्र में आता है। उन्होंने तर्क दिया कि खेल परिसर के निर्माण के लिए 20 एकड़ जमीन पर्याप्त नहीं है और इसके अलावा, राज्य ने वैकल्पिक स्थल पर जमीन निर्धारित की है। जनरल तुषार मेहता के अनुसार, यह मामला शहरों के हरित फेफड़ों से संबंधित नहीं है, बल्कि शहर नियोजन गतिविधियों से संबंधित है, जिस पर उच्च न्यायालय ने फैसला सुनाया था।
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