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एनसीपीसीआर: कानूनगो बोले- देश में 15-20 लाख बेघर बच्चे, दिल्ली और महाराष्ट्र इनके लिए कुछ नहीं कर रहे

Sun, 27 Mar 2022 07:56 PM IST
शिव शरण शुक्ला न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: शिव शरण शुक्ला Updated Sun, 27 Mar 2022 07:56 PM IST
सार

पोर्टल 'बाल स्वराज' की परिकल्पना 2019 में सड़क पर रहने वाले बच्चों के पुनर्वास के लिए की गई थी। इस दौरान वरिष्ठ अधिकारी कानूनगो ने अफसोस जताया कि राज्य सरकारें ऐसे बच्चों की पहचान करने और उनके पुनर्वास की दिशा में प्रभावी ढंग से काम नहीं कर रही हैं।

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NCPCR chief Priyank Kanoongo said Lackadaisical attitude of some states making it difficult to rehabilitate street kids
राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

भारत में सड़कों पर रहने वाले अनुमानित 15-20 लाख बच्चों को लेकर राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग के प्रमुख प्रियांक कानूनगो ने चिंता जाहिर की है। उन्होंने कहा कि कुछ राज्य सरकारों के उदासीन रवैये के कारण ऐसे बच्चों की पहचान करना और उनका पुनर्वास करना मुश्किल हो रहा है। उन्होंने बताया कि इनमें से करीब 20,000 बच्चे ऐसे हैं, जिनकी वेब पोर्टल के माध्यम से पहचान कर ली गई है और उनका पुनर्वास किया जा रहा है। इस मामले पर सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई होगी। 

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उन्होंने जानकारी दी कि सड़क पर रहने वाले बच्चों के लिए ही वेब पोर्टल 'बाल स्वराज' बनाया गया है। इस पोर्टल पर उनकी जानकारी अपलोड की जा सकती है और उन्हें ट्रैक किया जा सकता है। इस जानकारी के आधार पर उनके पुनर्वास की दिशा में काम किया जा सकता है।
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प्रियांक कानूनगो ने बताया कि इस पोर्टल 'बाल स्वराज' की परिकल्पना 2019 में सड़क पर रहने वाले बच्चों के पुनर्वास के लिए की गई थी, लेकिन इसका उपयोग COVID-19 से प्रभावित बच्चों के लिए भी किया गया था। उन्होंने कहा कि पिछले तीन-चार महीनों में हमने सड़क पर रहने वाले बच्चों की पहचान और पुनर्वास के लिए भी पोर्टल का इस्तेमाल किया है। इस दौरान वरिष्ठ अधिकारी कानूनगो ने अफसोस जताया कि राज्य सरकारें ऐसे बच्चों की पहचान करने और उनके पुनर्वास की दिशा में प्रभावी ढंग से काम नहीं कर रही हैं।
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उन्होंने कहा कि राज्य इस दिशा में उतना प्रभावी ढंग से काम नहीं कर रहे हैं जितना उन्हें होना चाहिए। हम इसे जल्द से जल्द करना चाहते हैं। राज्यों को इसे तुरंत करने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। मध्य प्रदेश और पश्चिम बंगाल के कुछ क्षेत्रों ने अपने राज्य के बच्चों के पुनर्वास के लिए अच्छा काम किया है, लेकिन दिल्ली और महाराष्ट्र कुछ नहीं कर रहे हैं।

दिल्ली की हालत खराब
राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग के प्रमुख प्रियांक कानूनगो ने यह भी कहा कि दिल्ली सरकार की निष्क्रियता के कारण केवल 1,800 बच्चों को इस प्रक्रिया में लाया गया है, जबकि दो साल पहले हमें बताया गया था कि 73,000 बच्चे दिल्ली की सड़कों पर रह रहे थे। उन्होंने बताया कि वर्तमान में भारत की सड़कों पर लगभग 15-20 लाख बच्चे रह रहे हैं।

आयोग ने बेघर बच्चों की बनाईं तीन श्रेणियां 
उन्होंने कहा कि गली के बच्चों में, हमें मूल रूप से तीन प्रकार के बच्चे मिले पहले ऐसे जो अपने घरों से भाग गए या छोड़ दिए गए और अकेले सड़कों पर रह रहे हैं, दूसरे ऐसे बच्चे जो सड़कों पर अपने परिवार के साथ रह रहे हैं और उनका पूरा परिवार सड़कों पर संघर्ष कर रहा है और तीसरी श्रेणी में वे बच्चे हैं जो पास की झुग्गियों में रहते हैं।

उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (एनसीपीसीआर) ने इन तीनों श्रेणियों के बच्चों के लिए पुनर्वास योजना तैयार की है। इन सभी श्रेणियों के हिसाब से पुनर्वास की अलग-अलग व्यवस्था है। उदाहरण के लिए, जो बच्चे अकेले हैं उन्हें बाल गृहों में रखा जाता है, जो झुग्गी बस्तियों में परिवारों के साथ हैं उन्हें उनके परिवारों के साथ बहाल किया जाता है और कल्याणकारी योजनाओं से जोड़ा जाता है। इसके बाद वे बच्चे जो अपने परिवारों के साथ सड़कों पर रहते हैं, इसमें से ज्यादातर ऐसे हैं जो बेहतर अवसरों की तलाश में गांवों से शहरों में चले गए हैं, इसलिए हम उन्हें उनके गांवों में वापस लाने की कोशिश करते हैं और उन्हें कल्याण के लिए कल्याणकारी योजनाओं से जोड़ते हैं।

कानूनगो ने कहा कि शीर्ष बाल अधिकार निकाय द्वारा शुरू से अंत तक पुनर्वास के छह चरणों का निर्धारण किया गया है। सबसे पहले बच्चे को बचाया जाता है और बाल कल्याण समिति (सीडब्ल्यूसी) के सामने पेश किया जाता है। इसके बाद बच्चे की सामाजिक जांच रिपोर्ट तैयार की जाती है। इसके बाद एक व्यक्तिगत देखभाल योजना बनाई जाती है, फिर समिति पुनर्वास की सिफारिश देगी कि बच्चा कहाँ जाएगा। इसके बाद बच्चे को कल्याणकारी योजनाओं से जोड़ा जाता है और अंत में योजनाओं का बच्चों को  अनुसरण कराया जाता है।

केजरीवाल के बाल गृहों के बयान पर नोटिस, मांगा जवाब 
एनसीपीसीआर प्रमुख कानूनगो ने दावा किया कि मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने ‘सार्वजनिक रूप से माना है’ कि दिल्ली में बाल गृहों में बच्चों की देखभाल नहीं की जा रही है, जिसके लिए स्पष्टीकरण मांगते हुए एक नोटिस जारी किया जा रहा है। कानूनगो ने सीएम केजरीवाल द्वारा ट्वीट वीडियो के संदर्भ में कही बात पर ऐतराज जताया है। इस वीडियों में सीएम केजरीवाल ने कहा कि बेसहारा बच्चों के लिए 10 करोड़ रुपये आवंटित किये गए हैं। इस वीडियों में यह भी कहा गया है कि ‘बाल देखभाल गृहों में अभी तक बच्चों की उचित देखभाल नहीं किया गया, जिससे वे वहां से भाग जाते हैं।


गौरतलब है कि सड़क पर रहने वाले बच्चों की पहचान और पुनर्वास के मामले की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट में हो रही है।  पिछली सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों (यूटी) को सड़क पर रहने वाले बच्चों के लिए पुनर्वास नीति तैयार करने के सुझावों को लागू करने का निर्देश दिया था और कहा था कि यह कागजों पर नहीं रहना चाहिए। इस मामले की अगली सुनवाई सोमवार को होगी।

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