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NCDRC: डॉक्टरों की लापरवाही से हुई बच्चे की मौत, एनसीडीआरसी ने दिया एक करोड़ मुआवजा देने का आदेश

Wed, 31 Aug 2022 09:33 PM IST
शिव शरण शुक्ला न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: शिव शरण शुक्ला Updated Wed, 31 Aug 2022 09:33 PM IST
सार

14 जून 2000 में बच्चे के माता-पिता उसे चेन्नई के शंकर नेत्रालय में उसकी भौंगी आंखों के इलाज के लिए लेकर गए थे। शंकर नेत्रालय में बच्चे की सर्जरी के दौरान डॉक्टरों द्वारा की गई लापरवाही के कारण मौत हो गई थी। 
 

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NCDRC orders compensation of one crore in case of child death due to negligence of doctors in chennai
कोर्ट का फैसला - फोटो : amar ujala

विस्तार

एनसीडीआरसी ने साल 2000 के एक मामले में फैसला सुनाते हुए छह साल के बच्चे के माता-पिता को एक करोड़ रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया है। आयोग ने इस मामले में शुक्रवार को फैसला सुनाते हुए कहा कि बच्चे की मौत डॉक्टरों की लापरवाही से हुई थी। इस आयोग की अध्यक्षता जस्टिस आरके अग्रवाल कर रहे थे। उन्होंने मामले में सुप्रीम कोर्ट के नेशनल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड बनाम कुसुम मामले में सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए गए फैसले को सही ठहराया। कोर्ट ने इस मामले में कहा था कि माता-पिता को बच्चे की मृत्यु के लिए मुआवजे का भुगतान उचित होना चाहिए न कि मामूली। 

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क्या था मामला
माता-पिता की शिकायत के मुताबिक, ये मामला 14 जून 2000 का है। बच्चे के माता-पिता उसे चेन्नई के शंकर नेत्रालय में उसकी भौंगी आंखों के इलाज के लिए लेकर गए थे। शंकर नेत्रालय में बच्चे की सर्जरी के दौरान डॉक्टरों द्वारा की गई लापरवाही के कारण मौत हो गई थी। 
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आयोग ने सुनाया फैसला
इसके बाद बच्चे के माता-पिता इस मामले में शिकायत की। इसमें दोनों पक्षों की दलीलों को सुनने के बाद एनसीडीआरसी ने शुक्रवार को फैसला सुनाया था। आयोग ने फैसला सुनाते हुए कहा कि बच्चे की मौत गलत इलाज के कारण हुई। इसके साथ ही डॉक्टरों ने लापरवाही दिखाते हुए उस दिन सर्जरी की जबकि वह पहले ही 16 सर्जरी कर चुके थे। बच्चे की सर्जरी उसी दिन करना अनिवार्य नहीं था। इससे डॉक्टरों की लापरवाही का पता चलता है। 
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इतना मुआवजा देने का दिया आदेश
आयोग ने आगे कहा कि उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम 1986 की धारा 21 के तहत शिकायत दर्ज की गई थी इस कारण अस्पताल को मुआवजे के तौर पर 85 लाख रुपए बच्चे के माता-पिता को देने होंगे। इसके अलावा लापरवाही के कारण डॉ. आर कन्नन को 10 लाख और डॉ. टी एस सुरेंद्रन को 5 लाख रुपये मुआवजे के रूप में देने का आदेश दिया। राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने इस मामले में एक करोड़ रुपये के मुआवजे को सही ठहराया। इसके साथ ही आयोग ने मुआवजे की राशि को आदेश की तारीख से 6 सप्ताह के भीतर देने का आदेश दिया है। इसके अलावा आयोग ने अस्पताल को एक लाख रुपये मुकदमेबाजी की लागत के रूप में देने का आदेश भी दिया है। 

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