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नटवर सिंह बोले: पहले के मुकाबले काफी बेहतर है आज का तालिबान, भारत को पहले ही बनाने चाहिए थे संबंध
Wed, 18 Aug 2021 08:52 PM IST
गौरव पाण्डेय
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: गौरव पाण्डेय
Updated Wed, 18 Aug 2021 08:52 PM IST
सार
अफगानिस्तान में बदलती राजनीतिक और सामाजिक स्थिति को लेकर भारत का दृष्टिकोण कैसा होना चाहिए, इस मुद्दे पर पूर्व केंद्रीय मंत्री नटवर सिंह ने बुधवार को प्रतिक्रिया दी। सिंह ने कहा कि तालिबान के अफगानिस्तान पर कब्जा करने से पहले ही भारत को सार्वजनिक रूप से तालिबान के साथ जुड़ना चाहिए था।
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नटवर सिंह
- फोटो : सोशल मीडिया (फाइल)
विस्तार
तालिबान ने 20 साल बाद एक बार फिर अफगानिस्तान की सत्ता हासिल कर ली है। पूरी दुनिया की नजर इस समय मध्य एशिया के इस देश पर टिकी हुई है। भारत ने अभी अफगानिस्तान में स्थितियों पर फिलहाल चुप रहने का फैसला किया है। वहीं, पूर्व विदेश मंत्री नटवर सिंह ने बुधवार को कहा कि अगर तालिबान इस युद्ध ग्रस्त देश में एक विकासशील और जिम्मेदार सरकार के रूप में कार्य करते हैं तो मैं उसके साथ राजनयिक संबंध स्थापित करने का समर्थन करता हूं।
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यूपीए-1 सरकार में विदेश मंत्री रहे नटवर सिंह कई वरिष्ठ राजनयिक पदों के साथ पाकिस्तान में भारत के राजदूत के तौर पर भी अपनी सेवाएं दे चुके हैं। समाचार एजेंसी पीटीआई को दिए एक साक्षात्कार में उन्होंने कहा कि भारत को फिलहाल 'वेट एंड वॉच' की रणनीति अपनानी चाहिए लेकिन इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि तालिबान, जिसने सत्ता हासिल की है, उन लोगों से काफी बेहतर नजर आ रहा है जिन्होंने अफगानिस्तान पर पिछले दो दशकों से शासन किया है।
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नटवर सिंह ने कहा कि भारत, अफगानिस्तान के (पूर्व) राष्ट्रपति अशरफ गनी के काफी करीब था जो भाग चुके हैं लेकिन अब स्थिति बहुत तेजी के साथ बदल गई है। उन्होंने कहा, हालांकि स्थिति विरोधात्मक नहीं है, लेकिन मित्रता की एक झलक भी गायब हो गई है और इसीलिए भारत सरकार बहुत ज्यादा सावधान है। अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन ने अपने सैनिकों को वापस बुलाकर तालिबान की राह काफी आसान कर दी, इसलिए अमेरिका पर भी कई आरोप लगेंगे।
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इस सवाल पर कि क्या भारत को तालिबान के साथ पहले ही जुड़ना चाहिए था, सिंह ने इससे सहमति जताई। उन्होंने कहा, 'अगर मैं विदेश मंत्री होता तो मैं उनसे संपर्क किया होता। मैंने खुफिया एजेंसी से कहा होता कि जल्द से जल्द उनके साथ संपर्क स्थापित करें।' क्यूबा में गुआंटानामो के साथ संपर्क करने में अमेरिका का उदाहरण देते हुए सिंह ने कहा कि भारत को तालिबान से संपर्क करना चाहिए था क्योंकि हम पाकिस्तान और चीन के लिए क्षेत्र खुला नहीं छोड़ सकते।
वहीं, इस प्रश्न पर कि क्या भारत को चीन की तरह तालिबान के नेतृत्व के साथ सार्वजनिक रूप से जुड़ना चाहिए, पूर्व कांग्रेस नेता ने कहा कि कम से कम विदेश सचिव के स्तर पर भारत को सार्वजनिक रूप से तालिबान के साथ संपर्क रखना चाहिए था। उन्होंने कहा कि पिछले तालिबान ने खुले तौर पर कहा था कि वे हिंदू विरोधी हैं। वे अभी भी पाकिस्तान के बहुत करीब हैं, लेकिन इसका मतलब यह कतई नहीं है कि इस्लामाबाद तालिबान के लिए शर्तें तय कर सकता है।
उन्होंने कहा, 'पाकिस्तान ने तालिबान को वित्तीय मदद दी, फिर अमेरिका ने उन्हें हथियार दिए। यह बहुत जटिल स्थिति है लेकिन फिलहाल हम इसमें खिलाड़ी की भूमिका में नहीं है।' सिंह ने कहा कि भारत ने पिछले 10-12 साल में अफगानिस्तान में 300 करोड़ डॉलर खर्च किए हैं। अब यह सब चला गया है (तालिबान के आने के साथ)। हिंसा शुरू हो चुकी है। लेकिन वे पहले के मुकाबले काफी बेहतर हैं। वे ज्यादा पढ़े-लिखे हैं। वे दुनिया के बारे में पहले से अधिक जागरूक हैं।