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मांगें पूरी होने तक आंदोलन स्थगित किया है, खत्म नहीं: टिकैत

Thu, 04 Oct 2018 02:09 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Thu, 04 Oct 2018 02:09 AM IST
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naresh tikait said, kisan Movement is postponed, not over

दिल्ली-यूपी सीमा पर डटे किसान मंगलवार देर रात दिल्ली पुलिस की ओर से बैरिकेड्स हटाए जाने के बाद दिल्ली में प्रवेश कर गए और तड़के किसान घाट पहुंच कर आंदोलन स्थगित करने की घोषणा की। हालांकि किसानों ने कहा कि वे भिखारी नहीं है, जो रात-दिन सड़क पर बैठ सरकार के आगे अपने अधिकारों के लिए भीख मांगते रहे। भाकियू नेता और किसान क्रांति पदयात्रा निकालने वाले नरेश टिकैत ने कहा कि आंदोलन स्थगित किया है, तब तक खत्म नहीं हो सकता जब तक सरकार उनकी मांगों पर अमल नहीं करती। 

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किसानों ने किसान घाट पर चौधरी चरण सिंह की समाधि पर श्रद्धांजलि अर्पित की। हालांकि इस मौके पर मौजूद किसान सभी मांगें पूरी न होने के कारण मायूस थे, लेकिन इनका कहना था कि हम खाली नहीं हैं। हमारे पास भी काम है। उन्होंने मोदी सरकार को खुली चेतावनी देते कहा कि वे 2019 में अपना दम दिखाएंगे। किसानों ने मोदी सरकार को किसान विरोधी बताते हुए प्रधानमंत्री मुर्दाबाद के नारे तक लगाए। 
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सरकार ने तानाशाही की

किसानों ने कहा कि कई दिन से किसान सड़कों पर थे। भूखे-प्यासे और तमाम परेशानियां झेलकर अपनी आवाज सरकार तक पहुंचाने के लिए दिल्ली आ रहे थे, लेकिन पुलिस ने उनके साथ गलत बर्ताव किया। किसानों के शांतिपूर्ण आंदोलन पर लाठीचार्ज कर सरकार ने तानाशाही जाहिर कर दी। किसान नेताओं का कहना था कि बुजुर्ग किसानों को पीटने वाली दिल्ली पुलिस भले ही खुद की पीठ थपथपा ले, लेकिन बहुत जल्द ही उन्हें इसका जवाब भी मिलेगा।    
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गांधी के नाम दिखावा करती हैं सरकारें  
    
किसानों ने कहा कि महात्मा गांधी की आड़ में सरकारें रोटियां सेकने का काम करती हैं। गांधी को श्रद्धांजलि देकर देश को उनके मार्ग पर चलने की लंबी चौड़ी नसीहतें भी देती है, लेकिन गांधी जयंती पर दिल्ली पुलिस की आड़ में केंद्र सरकार ने जो खिलवाड़ उनके साथ किया है, उससे जाहिर है कि भाजपा सरकार किस तरह अपना काम कर रही है। उद्योगपतियों के कर्ज माफ किए जा रहे हैं और किसान तंगहाली में आत्महत्या कर रहा है। 


फिर दिल्ली कूच कर सकते हैं किसान     
 
किसान घाट पर कुछ देर विश्राम और आंदोलन स्थगित करने के बाद किसान अपने-अपने घर की ओर बढ़ने लगे, लेकिन बातचीत में उन्होंने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि जल्द ही सरकार उनकी मांगों को लेकर ठोस नतीजे पर नहीं पहुंची तो लोकसभा चुनाव से पहले फिर से दिल्ली कूच कर सकते हैं। 

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