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जम्मू-कश्मीर: संविधान से ही निकली अनुच्छेद 370 से मुक्ति की राह
Tue, 06 Aug 2019 05:46 AM IST
Nilesh Kumar
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Nilesh Kumar
Updated Tue, 06 Aug 2019 05:46 AM IST
सार
- सरकार को राष्ट्रपति के आदेश के जरिए हटाने का अधिकार
- अनुच्छेद-370 के उपखंड में ही था इसे हटाने का प्रावधान
- सरकार को राष्ट्रपति के आदेश के जरिए हटाने का अधिकार
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गृह मंत्री अमित शाह
- फोटो : ANI
विस्तार
गृह मंत्री अमित शाह ने सोमवार को राज्यसभा में कहा कि सरकार को राष्ट्रपति के आदेश के जरिए अनुच्छेद-370 को हटाया जा सकता है। इसी के तहत अनुच्छेद-370 को खत्म किया गया है। इस अनुच्छेद के तहत जम्मू एवं कश्मीर को विशेष राज्य का दर्जा मिला हुआ था।
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गृह मंत्री ने कहा कि अनुच्छेद-370 के उपखंड तीन में कहा गया कि राष्ट्रपति को अनुच्छेद-370 को खत्म या कुछ बदलाव करने का अधिकार है। राष्ट्रपति को इसके लिए संविधान सभा से सिफारिश जरूरी है। राष्ट्रपति के इस आदेश के तहत अब जम्मू एवं कश्मीर में भी भारतीय संविधान हूबहू प्रभावी होगा। इस आदेश के तहत जम्मू एवं कश्मीर में समय-समय पर हुए बदलाव व संशोधन भी निष्प्रभावी हो गया।
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चूंकि जम्मू एवं कश्मीर फिलहाल कोई चुनी हुई सरकार नहीं है। लिहाजा राष्ट्रपति का यह आदेश में कहा गया कि राज्यपाल के पास चुनी हुई सरकार की शक्ति निहित है और इसी अधिकार के तहत राज्यपाल की सिफारिश का आशय मंत्रिपरिषद की सिफारिश है।
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इस आदेश का दूसरा अहम बिन्दु यह है कि इसमें संशोधन के जरिए संविधान सभा को विधानसभा करार दिया गया है। इस प्रावधान में संशोधन की दरकार इसलिए थी कि अनुच्छेद-370 के उपखंड तीन में कहा गया था कि अनुच्छेद-370 के उपखंड तीन में कहा गया कि अनुच्छेद-370 को राष्ट्रपति के आदेश के जरिए खत्म किया जा सकता है लेकिन इसके लिए संविधान सभा की सिफारिश जरूरी है।
चूंकि संविधान सभा अस्तित्व सालों पहले भंग कर दिया गया था लिहाजा विधानसभा को ही संविधान सभा के समकक्ष बनाया गया। यानी पहले राज्यपाल को विधानसभा की अथॉरिटी प्रदान की गई और बदाल में विधानसभा को संविधान सभा करार दिया गया।
चूंकि जम्मू एवं कश्मीर में फिलहाल कोई सरकार नहीं है। राज्यपाल शासन होने के कारण सारा अधिकार केंद्र सरकार के पास है। ऐसे में महज राष्ट्रपति के आदेश के जरिए संविधान-370 को खत्म कर दिया गया।
अनुच्छेद-370 को खत्म करने के आदेश से अनुच्छेद-35ए भी खत्म हो गया। अनुच्छेद-35ए को खत्म करने के लिए अलग से कोई आदेश पारित करने की जरूरत नहीं पड़ी। आदेश में कहा गया कि यह अधिसिूचना तत्काल प्रभावी होगी और 1954 में जारी राष्ट्रपति आदेश को निष्प्रभावी बना देगा। चूंकि 1954 में राष्ट्रपति आदेश के जरिए अुनच्छेद-35ए को लाया गया था लिहाजा वह स्वत: खत्म हो गया।