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नगा शांति समझौताः विधानसभा चुनाव से पहले हो इसका समाधान, जदयू सांसद ने उठाई मांग
Sun, 08 Jan 2023 12:17 PM IST
नितिन गौतम
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोहिमा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोहिमा
Published by: नितिन गौतम
Updated Sun, 08 Jan 2023 12:17 PM IST
सार
नगा शांति समझौताः नागालैंड में इस साल विधानसभा चुनाव प्रस्तावित हैं लेकिन जदयू सांसद अनील प्रसाद हेगड़े ने मांग की है कि चुनाव से पहले नगा शांति समझौता हो जाना चाहिए।
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nagaland
- फोटो : twitter
विस्तार
जनता दल यूनाइटेड के राज्य सभा सांसद अनील प्रसाद हेगड़े ने मांग उठाई है कि नागालैंड में शांति समझौते के बाद विधानसभा चुनाव होने चाहिए। जदयू सांसद ने कहा कि दशकों पुरानी इस समस्या का हल जल्द होना चाहिए ताकि राज्य में समय से आगामी विधानसभा चुनाव की प्रक्रिया शुरू हो सके। उन्होंने कहा कि साल 2018 में हुए विधानसभा चुनाव भी नगा शांति समझौते के जनादेश के साथ हुए थे। हेगड़े ने कहा कि नगा शांति समझौता ना होने की वजह उत्तर पूर्वी राज्यों में राजनीतिक अस्थिरता है। नागालैंड में शांति और समृद्धि के लिए इस समस्या का हल बेहद जरूरी है।
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केंद्र सरकार लंबे समय से कर रही वार्ता
बता दें कि नागालैंड में देश की आजादी के बाद ही उग्रवाद की समस्या शुरू हो गई थी. जिसके बाद 18 सालों में 80 दौर की बातचीत के बाद साल 1997 में पहली बार केंद्र सरकार और उग्रवादी संगठनों में सीजफायर का समझौता हुआ था। इसके बाद नगा शांति समझौते के लिए 2015 में पीएम मोदी की मौजूदगी में केंद्र सरकार और एनएससीएन (आईएम) के बीच एक समझौता हुआ था।
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उग्रवादी संगठन एनएससीएन (आईएम) से समझौते के साथ ही केंद्र सरकार ने नागालैंड के नेशनल पॉलिटिकल ग्रुप, जिसमें 7 संगठन शामिल हैं, के साथ ही दिसंबर 2017 में एक समझौता किया था। हालांकि अभी तक अंतिम समझौता होना बाकी है क्योंकि केंद्र सरकार एनएससीएन (आईएम) की अलग संविधान और अलग झंडे की मांग पर सहमत नहीं है। लंबे अंतराल के बाद बीते साल फिर से दोनों पक्षों में बातचीत शुरू हुई है।
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राष्ट्रपति शासन लगाने की उठी मांग
नागालैंड की राजनीतिक पार्टी राइजिंग पीपल्स पार्टी ने बीते महीने पीएम मोदी से अपील की थी कि वह राज्य में राष्ट्रपति शासन लागू कर दें। इस पार्टी का आरोप है कि राज्य विकास के मामले में बुरी तरह से पिछड़ा हुआ है। हालांकि जदयू सांसद हेगड़े इसके समर्थन में नहीं हैं. उन्होंने कहा कि राज्य में राष्ट्रपति शासन लागू कराने की मांग उचित नहीं है। अभी मौजूदा वक्त की सबसे बड़ी जरूरत इस समस्या का हल है। हेगड़े ने कहा कि इस मामले के सभी शेयरधारकों को इस समय ऐसा कोई भी बयान नहीं देना चाहिए जिससे अलोकतांत्रिक ताकतों को इस नगा समस्या को और लंबा खींचने में मदद मिल सके।
गौरतलब है कि ईस्टर्न नागालैंड पीपल्स ऑर्गेनाइजेशन ने विकास में पिछड़ेपन का हवाला देते हुए अलग प्रदेश की मांग शुरू कर दी है। साथ ही इस संगठन ने ऐलान किया है कि वह 2023 के विधानसभा चुनाव समेत किसी भी चुनाव में तब तक हिस्सा नहीं लेगा, जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होती हैं। जदयू के महासचिव अफाक अहमद खान ने भी राज्य में विकास ना होने पर चिंता जाहिर की और कहा कि उनकी पार्टी राज्य के सभी इलाकों के समान विकास के हक में है. उन्होंने कहा कि नागालैंड में अलग राज्य की मांग नगा जनजातियों की एकता को भारी नुकसान पहुंचा सकती है। अफाक अहमद खान ने कहा कि उनकी पार्टी आगामी विधानसभा चुनाव में कम से कम 20 उम्मीदवार उतारेगी लेकिन अभी तक विधानसभाओं को लेकर फैसला नहीं हो सका है।