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पीड़ा: म्यांमार नरसंहार की गवाह बनी जैनब ने पेंटिंग में उतारा दर्द, सात साल से रोहिंग्या शिविर में रह रही
Sat, 09 Nov 2024 05:51 AM IST
दीपक कुमार शर्मा
परीक्षित निर्भय, अमर उजाला
परीक्षित निर्भय, अमर उजाला
Published by: दीपक कुमार शर्मा
Updated Sat, 09 Nov 2024 05:51 AM IST
सार
जैनब का एक चित्र उस आघात को दर्शा रहा है जिसमें जलते हुए घर और उनके सामने खड़ी सेना का दृश्य है। जैनब कहती है कि वह अब भी मानसिक चुनौतियों को झेल रही है। उस वक्त उनके जैसे कई लोगों ने अपने घरों को जलता देखा और परिजनों को आग की लपटों में जलते देखा।
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जैनब द्वारा बनाई गई पेंटिंग
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
मैंने पेंटिंग इसलिए शुरू की क्योंकि लोगों के दर्द को कैद करने के लिए पर्याप्त शब्द नहीं है। यह कहना है 19 साल की रोहिंग्या लड़की जैनब का, जिन्होंने साल 2017 में म्यांमार नरसंहार को काफी नजदीकी से देखा और अपने परिवार के कई सदस्यों को हिंसा में खो दिया। तब से वह अपने माता-पिता के साथ बांग्लादेश के कॉक्स बाजार स्थित रोहिंग्या शिविर में रह रही हैं।
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यह लड़की इसलिए भी चर्चाओं में है क्योंकि हाल ही में द लैंसेट ने जैनब की उन पेटिंग को दुनिया के सामने रखा है, जिनमें नरसंहार, आगजनी और पलायन का दर्द झलक रहा है। अत्यधिक संघर्षों के बावजूद जैनब ने संयुक्त राष्ट्र संगठनों और बांग्लादेश में अंतरराष्ट्रीय संस्थानों के जरिये अपनी शिक्षा जारी रखी और अब ऐसी प्रतिभाशाली चित्रकार बनी है, जिसने सबसे पहले उस भयानक क्रूरता को चित्रित किया है, जिसकी वजह से 2017 में 7.02 लाख रोहिंग्या को अपना देश छोड़ बांग्लादेश में शरण लेनी पड़ा।
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सेना के सामने जलते घरों की तस्वीर
जैनब का एक चित्र उस आघात को दर्शा रहा है जिसमें जलते हुए घर और उनके सामने खड़ी सेना का दृश्य है। जैनब कहती है कि वह अब भी मानसिक चुनौतियों को झेल रही है। उस वक्त उनके जैसे कई लोगों ने अपने घरों को जलता देखा और परिजनों को आग की लपटों में जलते देखा। वह मनोवैज्ञानिक पीड़ा अब तक उन्हें परेशान कर रही है।
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नफ नदी और पलायन करते लोग
जैनब ने एक पेंटिंग में उकेरा कि सैन्य कार्रवाई के बाद रोहिंग्या म्यांमार-बांग्लादेश सीमा की ओर दौड़े, जहां उफनती नफ नदी को पार करने से पहले 16-20 दिनों तक कैसे भूखे रहे। नदी पार करने के लिए, बांस और प्लास्टिक के कनस्तरों से बेड़ा बनाया और पुलिस से बचकर रात में बेड़े को तैनात किया।
शरणार्थी शिविर में बीमारियां...
द लैंसेट ने बताया कि शरणार्थी शिविर में लोगों को कई तरह की बीमारियों का जोखिम बना हुआ है। शिविर में अत्यधिक भीड़ होने से हैजा, डिप्थीरिया और खसरा जैसी संक्रामक बीमारियों का जोखिम बढ़ा है। कुपोषण के अलावा पर्याप्त पोषण युक्त भोजन पाने के लिए लोगों को संघर्ष करना पड़ रहा है।