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पड़ताल: मुजफ्फरपुर में फैली बीमारी का सच, क्या लीची खाने से हो रही है बच्चों की मौत?

Mon, 24 Jun 2019 06:24 PM IST
Prachi Priyam न्यूज डेस्क, अमर उजाला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला Published by: Prachi Priyam Updated Mon, 24 Jun 2019 06:24 PM IST
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Muzaffarpur children eat lychee cause death due to acute encephalitis syndrome and chamki bukhar
लीची - फोटो : Social Media

"अगर बिहार में 150 से भी ज्यादा बच्चों को निगलने वाली जानलेवा बीमारी से अपने बच्चे को बचाना चाहते हैं तो उन्हें लीची बिल्कुल नहीं खिलाएं।" आजकल आप भी फेसबुक और व्हाट्सएप पर ऐसे मेसेज पढ़ रहे होंगे जिनमें एक्यूट इनसेफेलाइटिस सिंड्रोम से बचाव के लिए बच्चों को लीची खिलाने से मना किया जा रहा है। सोशल मीडिया में वायरल खबरों के मुताबिक लीची खाने के कारण ही मुजफ्फरपुर में बच्चे चमकी बुखार से ग्रसित हो रहे हैं। इन मेसेज को पढ़कर आपने भी लीची खाना बंद कर दिया होगा, लेकिन क्या आप जानते हैं कि मुजफ्फरपुर में फैली इस बीमारी के पीछे की असली वजह लीची नहीं है।

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आपको बता रहे हैं, लीची के बारे में आखिर क्या कहते हैं डॉक्टर्स और आधिकारिक रिपोर्ट?क्या सच में लीची ले रही है बच्चों की जान, या किसी और कारण से हो रहा है चमकी बुखार?
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दरअसल मुजफ्फरपुर लीची बागानों के लिए मशहूर है। गर्मी के मौसम में यहां भरपूर मात्रा में लीची के फलों की खेती होती है। यह इलाका 1995 से ही इनसेफेलाइटिस के वायरस से ग्रसित रहा है। इस बार जब चमकी बुखार से होने वाली मौत की खबरें सामने आई्ं, तो पाया गया कि बीमार बच्चों में से ज्यादातर अधिकतम मात्रा में लीची खाते थे। इसके बाद से कई खबरों में इस बीमारी को लीची से जोड़कर दिखाया जाने लगा, जिससे लोगों के बीच यह भ्रामक संदेश फैल गया कि चमकी बुखार लीची खाने के कारण ही हो रहा है। 
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यहां क्लिक कर पढ़ें क्या है एक्युट इन्सेफेलाइटिस सिंड्रोम या चमकी बुखार-

क्या कहती है पड़ताल?

अमर उजाला ने जब इन दावों की पड़ताल की तो पता चला कि, इस बीमारी का लीची से कोई सीधा संबंध नहीं है। 

  • बांग्लादेश और अमेरिका के वैज्ञानिकों के संयुक्त अध्ययन के मुताबिक लीची नहीं, बल्कि उसकी खेती में इस्तेमाल किया जाने वाला एक प्रतिबंधित कीटनाशक इस बिमारी का कारक है। यह रिपोर्ट साल 2017 में 'द अमेरिकन जर्नल आफ ट्रॉपिकल मेडिसिन एंड हाईजीन' में छपी है। 
  • एसकेएमसीएच अस्पताल, जहां सबसे ज्यादा बच्चे इलाज के लिए भर्ती हैं, वहां के डॉक्टरों ने भी लीची से बीमारी होने वाले दावों को खारिज किया है। 
  • लीची अनुसंधान केंद्र मुजफ्फरपुर (बिहार) के वैज्ञानिकों का भी कहना है कि लीची में ऐसा कोई हानिकारक तत्व नहीं है जो इस गंभीर बीमारी का कारण बने। 
  • स्वास्थ्य विभाग ने इससे संबंधित जो प्रेस रिलीज जारी की है, उसमें बताया गया है कि कुपोषित शरीर में अचानक हाइपोग्लाइसीमिया की मात्रा बढ़ने के कारण यह बीमारी होती है। इसमें लीची खाने को लेकर किसी तरह की एडवाइजरी जारी नहीं की गई है।यहां देखें प्रेस रिलीज:


 


इसलिए, हमारी पड़ताल में एक्युट इन्सेफेलाइटिस सिंड्रोम, चमकी बुखार या जापानी बुखार के मामले में लीची को लेकर किए जाने वाले दावों की खबर गलत साबित हुई। 

आपके लिए

अगर आपको भी सोशल मीडिया में वायरल हो रही किसी खबर पर संदेह है, तो कमेंट बॉक्स में लिखें। अमर उजाला खबर की पड़ताल करेगा और सच्चाई आपके सामने होगी।



 









 

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