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उपन्यास सम्राट प्रेमचंद ने कहा था.. पढ़िए 10 प्रासंगिक बातें

Sun, 08 Oct 2017 04:19 PM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, नई दिल्ली
टीम डिजिटल/अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Sun, 08 Oct 2017 04:19 PM IST
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Munshi Premchand death anniversary
कथा सम्राट मुंशी प्रेमचंद - फोटो : Google
'हल्कू ने आकर स्त्री से कहा- सहना आया है, लाओ, जो रुपए रखे हैं, उसे दे दूँ। किसी तरह गला, तो छूटे। मुन्नी झाड़ू लगा रही थी। पीछे फिर कर बोली- तीन ही तो रुपए हैं, दे दोगे तो कंबल कहाँ से आवेगा? माघ-पूस की रात हार में कैसे कटेगी? उससे कह दो, फसल पर रुपए दे देंगे। अभी नहीं।' 
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ये पंक्तियां उपन्यास सम्राट मुंशी प्रेमचंद की कहानी 'पूस की रात' की हैं और ये अपने समय के भारतीय जनमानस का यथार्थ बताती हैं। प्रेमचंद ने अपनी कहानियों में समाज के यथार्थ पूरी बारीकी से उकेरा है।  
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ऐसे यथार्थवादी चरित्रों को रचने वाले 'कलम के सिपाही' प्रेमचन्द का जन्म 31 जुलाई सन् 1880 को बनारस शहर से चार मील दूर लमही गाँव में हुआ था। प्रेमचंद न सिर्फ भारत, बल्कि दुनियाभर के मशहूर और सबसे ज्यादा पसंद किए जाने वाले रचनाकारों में से एक हैं। 8 अक्टूबर को प्रेमचंद की पुण्यतिथि है। 
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प्रेमचंद की कहानियों के किरदार आम आदमी होते हैं। उनकी कहानियों में आम आदमी की समस्याएं और जीवन के उतार-चढ़ाव परिलक्षित होते हैं। हिंदी साहित्य का यह दैदीप्यमान नक्षत्र भले ही हमारे बीच न हो, लेकिन उनका रचनाकर्म अमर है।

Munshi Premchand death anniversary
मुंशी प्रेमचंद - फोटो : Google
पढ़िए हिंदी के इस अमर रचनाकार की 10 अमर बातें, जिसे प्रेमचंद ने कहा था.. 

बनी हुई बात को निभाना मुश्किल नहीं है, बिगड़ी हुई बात को बनाना मुश्किल है। 
- रंगभूमि

रूखी रोटियाँ चाँदी के थाल में भी परोसी जायें तो वे पूरियाँ न हो जायेंगी। 
- सेवासदन

कड़वी दवा को ख़रीद कर लाने, उनका काढ़ा बनाने और उसे उठाकर पीने में बड़ा अन्तर है। 
- सेवासदन

चोर को पकड़ने के लिए विरले ही निकलते हैं, पकड़े गए चोर पर पंचलत्तिया जमाने के लिए सभी पहुँच जाते हैं। 
- रंगभूमि

जिनके लिए अपनी ज़िन्दगानी ख़राब कर दो, वे भी गाढ़े समय पर मुँह फेर लेते हैं। 
- रंगभूमि

 

यथार्थ झलकता है प्रेमचंद के कथनों में

Munshi Premchand death anniversary
मुंशी प्रेमचंद - फोटो : Google
मुलम्मे की जरूरत सोने को नहीं होती। 
- कायाकल्प

सूरज जलता भी है, रोशनी भी देता है। 
- कायाकल्प

सीधे का मुँह कुत्ता चाटा है। 
- कायाकल्प

मर्द लज्जित करता है, तो हमें क्रोध आता है। स्त्रियाँ लज्जित करती हैं, तो ग्लानि उत्पन्न होती है। 
- मानसरोवर - जलूस

अपने रोने से छुट्टी ही नहीं मिलती, दूसरों के लिए कोई क्यों कर रोये? 
- मानसरोवर - जेल
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