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Aarey Car Shed Dispute: आठ साल से चल रहे विवाद में अब तक क्या हुआ? आरे कारशेड मामले में उद्धव-फडणवीस फिर आमने-सामने

Sun, 03 Jul 2022 09:30 AM IST
जयदेव सिंह न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई Published by: जयदेव सिंह Updated Sun, 03 Jul 2022 09:30 AM IST
सार

मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने राज्य शहरी विकास विभाग को इस बारे में निर्देश दिए। इस मामले में शुक्रवार को पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने पलटवार किया। उद्धव ने कहा कि फैसला पलटने से उन्हें बेहद दुख हुआ है। 

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Mumbai’s Aarey Car Shed Dispute:  maharashtra uddhav thackeray eknath shinde govt explained
2019 में रातोंरात आरे में काटे गए थे दो हजार से ज्यादा पेड़। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

महाराष्ट्र में सत्ता बदलते ही पुरानी सरकार के फैसले बदलने भी शुरू हो चुके हैं। पहला बदलाव कैबिनेट की पहली ही बैठक में हो गया, जब सरकार ने उद्धव ठाकरे सरकार के मेट्रो-3 कार शेड को आरे से कंजरमार्ग शिफ्ट करने का फैसला पलट दिया।  

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मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने राज्य शहरी विकास विभाग को इस बारे में निर्देश दिए। इस मामले में शुक्रवार को पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने पलटवार किया। उद्धव ने कहा कि फैसला पलटने से उन्हें बेहद दुख हुआ है। उन्होंने कहा कि शिंदे सरकार को मुंबई के पर्यावरण से खिलवाड़ नहीं करना चाहिए। सरकार को ऐसे फैसले नहीं करने चाहिए जिससे भविष्य में मुंबई के लोगों को परेशानी हो। आपको मुझसे जो नाराजगी है उसका गुस्सा मुंबई के लोगों पर मत उतारिए। 

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देवेंद्र फडणवीस(फाइल) - फोटो : पीटीआई

आखिर कार शेड की जगह को लेकर विवाद क्या है?

मुंबई के आरे में मेट्रो कार शेड बनाने पर 2014 से विवाद चल रहा है। कार शेड को आरे से कंजरमार्ग शिफ्ट करने का मामला भाजपा और शिवसेना के बीच विवाद का एक प्रमुख कारण था। इस कार शेड का निर्माण अंडरग्राउंड कोलाबा-बांद्रा-SEEPZ मेट्रो प्रोजेक्ट के तहत होना है। 33.5 किलोमीटर लंबा ये प्रोजेक्ट देवेंद्र फडणवीस सरकार के समय शुरू हुआ था। दरअसल, गोरेगांव का आरे मिल्क कॉलोनी करीब 1800 एकड़ में फैला शहरी जंगल है। इस इलाके में 300 से ज्यादा पेड़-पौधों और जीवों की प्रजातियां रहती हैं। फडणवीस सरकार ने जब इस प्रोजेक्ट को शुरू किया उस वक्त सरकार में उसकी सहयोगी शिवसेना ने इसका विरोध किया था। शिवसेना की युवा विंग युवा सेना और उसके नेता आदित्य ठाकरे इस विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे थे। विरोध करने वालों का तर्क था कि ये कदम मुंबई के पर्यावरण को नुकसान पहुंचाएगा। सरकार के इस कदम के खिलाफ स्थानीय लोगों और पर्यावरणविद भी कोर्ट पहुंच गए थे।  

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कांजुरमार्ग में कार शेड की जमीन को लेकर केंद्र और राज्य सरकारें आमने-सामने हैं। - फोटो : सोशल मीडिया

कोर्ट ने आरे मेट्रो कार शेड के मामले में क्या कहा था?

याचिकाकर्ताओं ने बीएमसी द्वारा आरे में पेड़ काटने की अनुमति देने के फैसले को कोर्ट में चुनौती दी थी। याचिका दायर करने वालों की मांग थी कि आरे को जंगल घोषित किया जाए। हालांकि, चार अक्तूबर 2019 को बॉम्बे हाईकोर्ट ने इन याचिकाओं को खारिज कर दिया। 

कोर्ट के आदेश के 24 घंटे के भीतर इस प्रोजेक्ट पर काम कर रही मुंबई मेट्रो रेल कोऑपरेशन लिमिटेड (MMRCL) ने इस इलाके के दो हजार से ज्यादा पेड़ काट दिए थे। अगले ही दिन याचिकाकर्ता हाईकोर्ट की विशेष पीठ पहुंचे। विशेष बेंच ने पेड़ काटने पर स्टे लगाने से इनकार कर दिया। कोर्ट का कहना था कि वह किसी मौखिक कथन पर कोई स्टे नहीं दे सकती।  

हालांकि, दो दिन बाद सुप्रीम कोर्ट ने और पेड़ काटने पर रोक लगा दी। कोर्ट में महाराष्ट्र सरकार ने कहा कि जितने पेड़ कटने थे वो काटे जा चुके हैं। अब और पेड़ नहीं काटे जाएंगे। इसके बाद भी कोर्ट ने आरे में यथास्थिति बनाए रखने का आदेश जारी किया।  बाद में पेड़ काटने वाली MMRCL ने काटे गए पेड़ों का आंकड़ा भी जारी किया था। इसके मुताबिक उसने कुल 2,141 पेड़ काटे थे। पेड़ काटे जाने के खिलाफ मुंबई में जमकर विरोध प्रदर्शन भी हुए थे। 

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आरे के जंगलों को बचाने के लिए सड़कों पर उतरे थे लोग। - फोटो : सोशल मीडिया

आरे में पेड़ काटने को लेकर हुआ विरोध कितना तीखा था?

बीएमसी द्वारा पेड़ काटने की मंजूरी देने और कोर्ट के आदेश के बाद रातों-रात हजारों पेड़ काटने का स्थानीय लोगों ने जमकर विरोध किया था। आम लोगों के साथ ही कई एक्टिविस्ट और बॉलीवुड सितारे भी विरोध में सड़कों पर उतरे थे। लोगों ने ‘सेव आरे’ कैम्पेन चलाया था। विरोध को दबाने के लिए फडणवीस सरकार ने धारा-144 लगा दी थी। विरोध को दबाने के लिए इस इलाके में 500 से ज्यादा पुलिसकर्मी तैनात किए गए। 29 लोगों को गिरफ्तार किया गया। जिन्हें बाद में सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर जमानत पर छोड़ा गया। 

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उद्धव ठाकरे - फोटो : अमर उजाला

उद्धव ठाकरे सरकार आने के बाद आरे का क्या हुआ?

इस पूरे हंगामे के एक महीने बाद नवंबर 2019 में राज्य में उद्धव ठाकरे सरकार सत्ता में आई। चुनाव के दौरान आदित्य ठाकरे ने कार शेड को आरे से कहीं और स्थांतरित करने वादा किया था। सत्ता में आने के एक दिन बाद 29 नवंबर 2019 को उद्धव ठाकरे ने फडणवीस सरकार के फैसले को पलट दिया।  प्रोजेक्ट को आरे से कंजरमार्ग शिफ्ट कर दिया गया। इसके साथ ही आरे की करीब आठ सौ एकड़ जमीन को रिजर्व फॉरेस्ट घोषित कर दिया गया।  अक्तूबर 2020 में मुंबई सबअर्बन डिस्ट्रिक्ट कलेक्टर ने कंजरमार्ग की 102 एकड़ जमीन MMRDA को स्थानांतरित कर दी। MMRDA ने ये जमीन दिल्ली मेट्रो रेल कोऑपरेशन को स्थानांतरित की, जो इस प्रोजेक्ट में कार शेड और इंटरचेंज स्टेशन बना रही है।  

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बॉम्बे हाईकोर्ट - फोटो : ANI

इस पूरे मामले में केंद्र सरकार का क्या रुख रहा है?

उद्धव सरकार के फैसले के खिलाफ केंद्र ने बॉम्बे हाईकोर्ट में याचिका लगाई। केंद्र ने कंजरमार्ग में आवंटित की गई जमीन पर अपना दावा जताया। केंद्र की याचिका पर 16 दिसंबर 2020 को हाईकोर्ट ने डिस्ट्रिक्ट कलेक्टर के आदेश पर स्टे लगा दिया। ये आदेश समय-समय पर बढ़ता रहा।

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आरे कार शेड प्रोजेक्ट। - फोटो : अमर उजाला

आठ साल में क्या-क्या हुआ? 

  • 2014: तत्कालीन मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने आरे में कार शेड बनाने का एलान किया। विरोध शुरू हुए। 
  • 2016: NGT ने मुंबई मेट्रो रेल कोऑपरेशन को काम रोकने का आदेश दिया। 
  • 2018: NGT ने मुंबई मेट्रो रेल कोऑपरेशन से कहा- राहत चाहिए तो सुप्रीम कोर्ट जाएं।  
  • 2019: हाईकोर्ट ने पेड़ काटने से रोक लगाने की याचिका खारिज की, आदेश के 24 घंटे के अंदर दो हजार से ज्यादा पेड़ काटे गए। सुप्रीम कोर्ट ने पेड़ काटने पर रोक लगाई। 
  • 2019: सत्ता में आते ही उद्धव ठाकरे ने आरे में कार शेड बनाने की योजना पर रोक लगाई, कार शेड को कांजुरमार्ग शिफ्ट किया। 
  •  2020: मुंबई सबअर्बन डिस्ट्रिक्ट कलेक्टर ने कांजुरमार्ग की 102 एकड़ जमीन MMRDA को स्थानांतरित कर दी, केंद्र सरकार कोर्ट पहुंची। 
  • 16 दिसंबर 2020: हाईकोर्ट ने डिस्ट्रिक्ट कलेक्टर के आदेश पर स्टे लगा दिया।  ये आदेश समय-समय पर बढ़ता रहा। 
  • 2022: सत्ता बदलते ही डिप्टी सीएम देवेंद्र फडणवीस ने कार शेड आरे में ही बनाए जाने की बात कही।
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