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घर में आग लगाने वालों को छका रहे हैं मुलायम

Tue, 10 Jan 2017 08:03 PM IST
शशिधर पाठक/ अमर उजाला, दिल्ली
शशिधर पाठक/ अमर उजाला, दिल्ली Updated Tue, 10 Jan 2017 08:03 PM IST
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Mulayam defeating rivals with his moves
मुलायम सिंह यादव - फोटो : self

समाजवादी पार्टी के  संस्थापक और खुद को पार्टी का राष्ट्रीय अध्यक्ष मानने वाले मुलायम सिंह यादव घर में आग लगाने वाले विरोधियों को छका रहे हैं। पहलवान मुलायम सिंह कभी विरोधियों को खुद पर हावी होने का मौका नहीं देते हैं।

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अपनी इसी राजनीतिक सूझ-बूझ का इस्तेमाल करके वह एक बार आगे तो फिर पीछे कदम बढ़ा रहे हैं। कुल मिलाकर उनकी रणनीति समाजवादी पार्टी को दो फाड़ में देखने वालों की मंशा को धूल चटाना है। मुलायम के बार-बार निर्णय लेने, घोषणा करने को इसी रूप में देखा जा रहा है।
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इसी नीति के तहत वह तमाम राजनीतिक टकरार के बाद भी पुत्र और मुख्यमंत्री अखिलेश यादव से बातचीत का सिलसिला टूटने पर भी बात कर रहे हैं। दरअसल मुलायम यूपी में चुनाव अधिसूचना जारी होने के बाद समय की अहमियत को पूरी तरह समझ रहे हैं। 

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विरोधी दलों की छटपटाहट

Mulayam defeating rivals with his moves

गठबंधन की आस लगाए बैठी कांग्रेस का यूपी में  बुरा हाल होता जा रहा है। हर दिन कांग्रेस के लिए भारी हो रहा है। कार्यकर्ता न तो पार्टी के प्रचार में जूझ पा रहे हैं और न झंडा, बैनर की लड़ाई आगे बढ़ा रही है। मुलायम चाहते भी नहीं कि कांग्रेस-सपा का गठबंधन हो। हालांकि भाजपा गदगद है, क्योंकि इसके चलते नोटबंदी के खिलाफ माहौल जोर नहीं पकड़ सका है। भाजपा समेत अन्य दल खुलकर चुनाव प्रचार भी नहीं कर पा रहे हैं। जनता और मीडिया का ध्यान समाजवादी पार्टी के घमासान पर टिका है। साथ ही बसपा को अपने पक्ष में माहौल बनाने में खासा दिक्कत आ रही है।


मुलायम ने सुधारी छवि

दिसंबर 2016 तक बेबस नजर आ रहे मुलायम ने 2017 में इस चोले को उतारकर फेंक दिया है। अब वह भावनाओं के साथ अपने उग्र तेवर में लौट रहे हैं। उन्होंने पिछले एक महीने के दौरान जनता के बीच में संदेश देने की कोशिश की कि वह पार्टी में एकजुटता चाह रहे हैं, लेकिन अखिलेश नहीं मान रहे हैं। अखिलेश हठी बने हुए हैं। यही संदेश देने के लिए मुलायम बार-बार झुकने का संदेश दे रहे हैं। वह अखिलेश, राम गोपाल समेत अन्य को पार्टी से निकाल रहे हैं और कुछ ही समय में वापस भी ले ले रहे हैं। बीच आजम खां से लेकर अन्य मध्यस्थ भी आ रहे हैं और मुलायम की बार-बार अखिलेश से बातचीत हो रही है।

मेरे बेटे को बहकाया

मुलायम का यह वार जनता में अपील कर सकता है। वह इसमें रामगोपाल को खलनायक की भूमिका में लाना चाह रहे हैं। मुलायम ने कहा कि पार्टी में कोई विवाद नहीं है। वह राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं। शिवपाल प्रदेश अध्यक्ष हैं और अखिलेश यादव मुख्यमंत्री। यह घोषणा उन्होंने चुनाव आयोग में अपना पक्ष रखने के बाद की। सोमवार को देर शाम स्टैंड भी लिया कि पार्टी के अगले मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ही होंगे। इसके साथ मुलायम ने कहा कि पार्टी  में एक आदमी (रामगोपाल)है, जो उनके बेटे को बहका रहा है। दरअसल अभी तक शिवपाल और अमर इस पूरे घटनाक्रम में विलेन की भूमिका में हैं। इसलिए मुलायम पूरी चालाकी से इस भूमिका में रामगोपाल को लाने में लगे हैं।

राज्यसभा में रामगोपाल नेता नहीं

मुलायम का यह पैंतरा अहम है। उन्होंने उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी को पत्र लिखकर रामगोपाल को समाजवादी पार्टी के राज्यसभा में नेता पद से हटाने का आग्रह किया है। मुलायम ने अनुरोध किया है कि राम गोपाल यादव को पार्टी से निकाला जा चुका है। इसलिए उन्हें निर्दलीय सदस्य के रूप में मान्यता दे दी जाए। विवाद न सुलझने पर जल्द ही मुलायम पार्टी के राज्यसभा में नेता के तौर पर अमर सिंह का नाम भेज सकते हैं। इससे पहले पिछले साल के आखिरी सोपान में विवाद बढ़ने पर मुलायम ने राम गोपाल को पार्टी से निष्कासित कर दिया था। हालांकि संसद का शीतकालीन सत्र शुरू होने के पहले सप्ताह में ही उन्होंने रामगोपाल की सभी पदों पर वापसी करा दी थी। निलंबन वापस ले लिया था।

दो-दो हाथ को तैयार

ताजा मुसीबत से मुलायम दो-दो हाथ को तैयार हैं। 14 जनवरी-17 जनवरी तक वह मामले को निपटाना चाहते हैं। सूत्र बताते हैं कि सबकुछ पटरी पर आ गया तो ठीक, वरना मुलायम अखिलेश को भी जवाब देंगे। वह अखिलेश के सामने चेहरा पेश करके पार्टी को उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में उतारेंगे। इसको लेकर वह आजम खां का चयन करके नया दांव भी चल सकते हैं।


स्मार्ट गेम

मुलायम ने अखिलेश की पकड़ को देखते हुए स्मार्ट गेम प्लान किया है। गेम यह कि लाठी न टूटे और सांप मर जाए। यानी दबाव के जरिए समाजवादी पार्टी में सबकुछ पटरी पर लौट आए। उनके बाद अखिलेश समाजवादी पार्टी के सर्वेसर्वा और इसके बाद शिवपाल, आजम, बेनी, अमर सब। मुलायम को पता है कि अखिलेश और रामगोपाल में गहरा नाता बना है। इस कड़ी में नरेश अग्रवाल, किरणमय नंदा, नीरज शेखर जुड़ गए हैं। तमाम नेता सत्ता के साथ चलते हैं, इसलिए भी अखिलेश के साथ हैं। युवाओं की पसंद भी अखिलेश हैं और परिवार तथा रिश्तेदारों में अखिलेश का पलड़ा भारी है। अखिलेश मुलायम के पुत्र हैं। इस हिसाब से दबाव बनाने पर सब ठीक हो जाए तो कोई बात नहीं।

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