MP Politics: शिवराज के भविष्य को लेकर अटकलों का बाजार गर्म, सिंधिया-कैलाश की मुलाकात के बाद लगाए जा रहे कयास
MP Politics: सूत्र ने अमर उजाला से कहा, भाजपा में नंबर दो कहे जाने वाले गृह मंत्री अमित शाह सोमवार को पूरे दिन भोपाल थे। जबकि प्रदेश में होने के बावजूद सिंधिया और विजयवर्गीय ने शाह के कार्यक्रम से दूरी बनाई रखी। जबकि इंदौर से भोपाल की दूरी महज तीन घंटे की है...
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मध्यप्रदेश की राजनीति में इन दिनों अजीब सी बेचैनी दिखाई पड़ रही है। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को भाजपा संसदीय बोर्ड से हटाए जाने के बाद कई तरह के कयास लगाए जा रहे हैं। इन कयासों के बीच केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजयवर्गीय के घर पहुंचे। इसके बाद अफवाहों को और बल मिला। सोमवार को ही गृह मंत्री अमित शाह भी भोपाल पहुंचे थे। इस दौरान आई तस्वीरों में शिवराज की बॉडी लैंग्वेज के भी मतलब निकाले जा रहे हैं। हालांकि, राजनीतिक विश्लेषक मध्य प्रदेश में किसी तरह के नेतृत्व परिवर्तन की संभावना से फिलहाल इनकार कर रहे हैं।
दरअसल, शिवराज की ही कैबिनेट में ही गृह मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा उनके प्रतिस्पर्धी माने जाते हैं। प्रदेश अध्यक्ष विष्णु दत्त शर्मा के समर्थक अपने 'भाई साहब' की ताजपोशी की शर्त लगा रहे हैं। सिंधिया ने कहा, 'कैलाश विजयवर्गीय के मार्गदर्शन में आगे बढेंगे। मैं नए जोश के साथ काम करूंगा।' तो मायने निकाले गए कि सिंधिया कोई नई जिम्मेदारी तो नहीं संभाल रहे। दरअसल, कैलाश हमेशा से शिवराज के समानांतर चलने वाली रेल की पटरी की तरह देखे गए हैं, जो कितनी ही दूर साथ चले लेकिन एक-दूसरे से अलग ही रहते है।
इसी बीच भाजपा संसदीय बोर्ड से शिवराज की विदाई हुई, तो कई तरह के कयास लगाए जाने लगे। कांग्रेस को तोड़कर भाजपा यहां सत्ता में आई है। सिंधिया पहले से ही कुर्सी के दावेदार माने जाते रहे हैं। कमलनाथ की कुर्सी गिराने में डॉ. नरोत्तम मिश्रा की भूमिका अहम रही, लेकिन उन्हें मुख्यमंत्री नहीं बनाया गया। भाजपा वैसे भी नया चेहरा और नई पैकेजिंग की राजनीति करने में माहिर मानी जाती है। भाजपा इससे पहले कर्नाटक, उत्तराखंड और गुजरात विधानसभा चुनाव से ठीक पहले इस फॉर्मूले को अमल में ला चुकी है।
सिंधिया के बयान के मायने
सोमवार का दिन मध्यप्रदेश की राजनीति के लिए बेहद अहम रहा है। भाजपा की शीर्ष कमेटी संसदीय दल से शिवराज सिंह चौहान को हटाने के बाद सीएम चौहान और शाह की पहली बार मुलाकात हुई। गृहमंत्री शाह पूरे दिन भोपाल में रहे और रात को सीएम के घर डिनर में भी पहुंचे। इसी बीच भाजपा के महासचिव कैलाश विजयवर्गीय से मिलने सिंधिया भी उनके घर पहुंचे।
केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सोमवार दोपहर तीन बजे इंदौर पहुंचे। इस दौरान उनके बेटे महाआर्यमन भी साथ थे। वे सीधे कभी अपने धुर विरोधी रहे विजयवर्गीय के घर पहुंचे। सिंधिया ने कहा, 'आज एक पारिवारिक वातावरण में कैलाश जी के यहां सामूहिक परिवार के रूप में आया हूं। मैं मानता हूं कि उनके मार्गदर्शन में पार्टी उन्हें आगे आम कार्यकर्ता के रूप में क्षेत्र और प्रदेश के विकास का बीड़ा सौंपेगी। इसके लिए कैलाश विजयवर्गीय के साथ मिलकर इसे पूरा करेंगे। आज उज्जैन में महाकाल की सवारी के लिए इंदौर आया था, तो सोचा कि कैलाश जी से भी मिल लूं।'
विजयवर्गीय और सिंधिया नहीं पहुंचे शाह के कार्यक्रम में
एक विश्वस्त सूत्र ने अमर उजाला से कहा, भाजपा में नंबर दो कहे जाने वाले गृह मंत्री अमित शाह सोमवार को पूरे दिन भोपाल थे। जबकि प्रदेश में होने के बावजूद सिंधिया और विजयवर्गीय ने शाह के कार्यक्रम से दूरी बनाई रखी। जबकि इंदौर से भोपाल की दूरी महज तीन घंटे की है। लेकिन ये दोनों नेता इंदौर में मुलाकात कर रहे थे। हालांकि प्रदेश के कई नेता इस कार्यक्रम में शामिल नहीं थे। लेकिन अन्य नेताओं की तुलना में विजयवर्गीय और सिंधिया शाह के हर छोटे-बड़े कार्यक्रम में न केवल उपस्थित होते हैं, बल्कि सबसे आगे भी रहते हैं। इस बार दोनों नेताओं की एक साथ दूरी बनाए रखना प्रदेश के राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बनी हुई है। निकाय चुनाव के परिणाम के बाद विजयवर्गीय शिवराज सरकार के खिलाफ भी बयान दे चुके हैं। ऐसे में सिंधिया और विजयवर्गीय का मिलना प्रदेश की राजनीति में नए समीकरण के तौर पर देखा जा रहा है।
एक समय दोनों थे धुर विरोधी
इसके पूर्व एक समय में एक-दूसरे के धुर विरोधी सिंधिया व विजयवर्गीय की पुरानी अदावत उस दौरान से शुरू हुई थी, जब 2010 में एमपीसीए के चुनाव में दोनों दो बार आमने-सामने थे। उस समय इस चुनाव ने एक तरह से राजनीतिक रंग ले लिया था, खासकर विजयवर्गीय गुट ने। इसमें दोनों बार सिंधिया ने विजयवर्गीय को शिकस्त दी थी। 2020 में सिंधिया के भाजपा में शामिल होने के बाद दोनों की बीच की दूरियां लगभग खत्म हो गईं। केंद्रीय मंत्री बनने के बाद सिंधिया जब इंदौर आए थे, तो उन्होंने विजयवर्गीय के घर भोजन किया था। इस दौरान वे काफी देर तक रुके थे। इसके भी कई राजनीतिक मायने निकाले गए थे।