MP Election: मध्यप्रदेश में 30 साल में सपा के जीते 13 प्रत्याशी, इसलिए INDIA गठबंधन के सहारे थी यह बड़ी योजना
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विस्तार
बीते तीस सालों में समाजवादी पार्टी हर बार मध्यप्रदेश विधानसभा के चुनावों में अपने प्रत्याशी उतारती आई है। इन तीन दशक में लड़े गए चुनावों में समाजवादी पार्टी का सबसे बेहतर प्रदर्शन 2003 और उससे पहले 1998 में ही रहा था। सियासी जानकारों का कहना है कि अब जब INDIA गठबंधन बनकर तैयार हुआ, तो समाजवादी पार्टी अपने फलक को और बड़ा विस्तार देने की योजना में लग गई। इसी गठबंधन के साथ पार्टी ने मध्यप्रदेश में अपने विस्तार की बड़ी योजना बनाई। विशेषज्ञों का कहना है कि फिलहाल कांग्रेस की ओर से सीटों के इनकार के बाद बड़े गठबंधन के सहारे सपा को विस्तार देने का एक सियासी झटका तो समाजवादी पार्टी को लगा ही है।
सियासी जानकार मानते हैं कि समाजवादी पार्टी और अन्य कई प्रादेशिक राजनीतिक दल INDIA गठबंधन के सहारे अपनी पार्टी को अन्य राज्यों तक पहुंचाने की बड़ी योजना में लगे हुए हैं। क्योंकि यह गठबंधन राज्य स्तर के विधानसभा चुनाव में उतना प्रभावी नहीं है। इसलिए क्षेत्रीय दलों के विस्तार का इस गठबंधन के सहारे बड़ा फलक पाने की योजना फिलहाल आगे बढ़ती हुई नहीं दिख रही है। राजनीतिक विश्लेषक आरए सचान कहते हैं कि सिर्फ समाजवादी पार्टी ही नहीं बल्कि कई राजनीतिक दल इस गठबंधन के माध्यम से अपनी पार्टी को अलग-अलग राज्यों में विस्तार देना चाहते थे। ताकि गठबंधन की नींव के आधार पर उनको भी कुछ सीटें मिलें और वह इस गठबंधन के सहारे आगे बढ़ सकें। लेकिन कांग्रेस की ओर से हाथ खींचने पर समाजवादी पार्टी अब बीते तीन दशकों की तरह इस बार भी अकेले ही बगैर किसी बड़े गठबंधन के सियासी मैदान में मध्यप्रदेश में अपनी किस्मत आजमाएगी।
मध्यप्रदेश में समाजवादी पार्टी के सियासी आंकड़ों को देखें तो पता चलता है कि अब तक पार्टी ने 30 साल में कुल 13 विधायक ही अपने खाते में जोड़े हैं। हालांकि यह बात अलग है कि 1993 से लेकर पिछले विधानसभा के चुनाव तक समाजवादी पार्टी हर बार अपने प्रत्याशी सियासी मैदान में उतारती आई है। मध्यप्रदेश चुनाव आयोग के आंकड़ों के मुताबिक समाजवादी पार्टी के साल 2003 में सबसे ज्यादा 7 प्रत्याशी यहां पर जीते थे। उसके पहले 1998 के विधानसभा चुनाव में भी समाजवादी पार्टी के चार प्रत्याशी चुनाव जीत कर विधानसभा पहुंचे थे। उसके बाद 2008 और 2018 में भी समाजवादी पार्टी का एक-एक प्रत्याशी चुनाव जीता।
मध्यप्रदेश चुनाव आयोग के आंकड़े बताते हैं कि समाजवादी पार्टी ने 1993 में 109 विधानसभा सीटों पर अपने प्रत्याशी उतारे थे। पहला मौका था जब सपा ने सबसे ज्यादा प्रत्याशी मध्यप्रदेश में अपनी पार्टी को विस्तार देने के लिए उतारे, लेकिन चुनाव परिणाम में सभी प्रत्याशियों की जमानत तक जब्त हो गई थी। उसके अगले विधानसभा के चुनाव में समाजवादी पार्टी ने 94 प्रत्याशी मध्यप्रदेश के सियासी मैदान में उतारे। इनमें से चार प्रत्याशी जीते, लेकिन 84 की जमानत जब्त हो गई। 2003 में समाजवादी पार्टी ने मध्यप्रदेश में सबसे अच्छा प्रदर्शन किया और 161 प्रत्याशी मैदान में उतारे। 7 प्रत्याशी जीतने के बाद 140 प्रत्याशियों की जमानत जब्त हो गई। 2008 में समाजवादी पार्टी ने मध्यप्रदेश विधानसभा के चुनाव में अब तक सबसे ज्यादा प्रत्याशी, 187 मैदान में उतारे थे। इस चुनाव में समाजवादी पार्टी का जीता तो सिर्फ एक प्रत्याशी लेकिन 183 की जमानत जब्त हो गई थी।
2013 में 164 प्रत्याशी समाजवादी पार्टी ने मध्यप्रदेश में उतारे। इनमें 161 प्रत्याशियों की जमानत जब्त हो गई थी और समाजवादी पार्टी का कोई भी प्रत्याशी चुनाव भी नहीं जीता था। हालांकि पिछले विधानसभा चुनाव में भी समाजवादी पार्टी ने मध्यप्रदेश में अपने सबसे कम प्रत्याशी सियासी मैदान में उतारे। आंकड़ों के मुताबिक समाजवादी पार्टी ने पिछले चुनाव में 52 प्रत्याशी मैदान में उतारे। इसमें 45 प्रत्याशियों की जमानत जब्त हो गई और एक प्रत्याशी विधानसभा में चुनाव जीत कर पहुंचा। उत्तर प्रदेश कांग्रेस पार्टी से ताल्लुक रखने वाले एक वरिष्ठ नेता कहते हैं कि बीते चार चुनावों में समाजवादी पार्टी का मध्यप्रदेश में ना कोई बड़ा अस्तित्व रहा है ना ही उनकी पार्टी की कोई मजबूत पकड़ है। ऐसे में सिर्फ गठबंधन के सहारे अपनी पार्टी को विस्तार देना उचित नहीं लग रहा।
हालांकि सियासी जानकारों का कहना है कि समाजवादी पार्टी मध्यप्रदेश के बुंदेलखंड इलाके में जातिगत समीकरणों के आधार पर अपना अस्तित्व बनाए हुए हैं। वरिष्ठ पत्रकार और राजनीतिक विश्लेषक हेमेंद्र बरतवाल कहते हैं कि समाजवादी पार्टी ने पिछले विधानसभा के चुनाव में कांग्रेस का बड़ा सियासी गणित बिगाड़ दिया था। उनका कहना है कि कई सीटों पर समाजवादी पार्टी कांग्रेस से ऊपर थी। बल्कि मैहर की सीट पर कांग्रेस महज तीन हजार वोटों से हार गई थी। जबकि इसी सीट पर समाजवादी पार्टी को 11 हजार से ज्यादा वोट मिले थे। बरतवाल कहते हैं कि अगर इन सियासी समीकरण और गणित को समझें, तो आमने-सामने के मुकाबले में संभव है कि कुछ हद तक समाजवादी पार्टी कांग्रेस के वोट बैंक में सेंधमारी भी कर सकती है। हालांकि उनका कहना है कि कांग्रेस ने मध्यप्रदेश में जिन सियासी समीकरण और जातिगत आधार पर टिकटों का बंटवारा किया है उसमें पार्टी अपनी मजबूत स्थिति देख रही है।