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MP BJP: भाजपा अध्यक्ष नड्डा ने बनाई नई टीम, इन वजहों एमपी से विजयवर्गीय, सौदान सिंह और धुर्वे को फिर मिला मौका

Sat, 29 Jul 2023 01:58 PM IST
Rahul Sampal राहुल संपाल
Updated Sat, 29 Jul 2023 01:58 PM IST
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सार
पश्चिम बंगाल में हुई भाजपा की करारी हार के बाद ये कयास लगाए जा रहे थे कि मध्यप्रदेश के वरिष्ठ नेता और राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजयवर्गीय की राष्ट्रीय संग़ठन से विदाई हो सकती है। क्योंकि बंगाल में मिली हार के बाद विजयवर्गीय ने खुद को मध्यप्रदेश तक ही सीमित कर लिया था...
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MP BJP: why kailash Vijayvargiya, Saudan Singh and Dhruve get another chance in JP Nadda new team
MP BJP - फोटो : Amar Ujala/Rahul Bisht

विस्तार

लोकसभा चुनाव 2024 को ध्यान में रखते हुए भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा की नई टीम का एलान कर दिया है। इसमें सभी राज्यों के खास और बड़े नेताओं को अहम जिम्मेदारी दी गई है। चुनावी राज्य मध्य प्रदेश से कैलाश विजयवर्गीय, सौदान सिंह और ओम प्रकाश धुर्वे को फिर से नई टीम शामिल किया गया है। खास बात ये है कि, राष्ट्रीय संगठन ने एक बार फिर विजयवर्गीय पर भरोसा जताया है। पार्टी ने उन्हें लगातार चौथी बार राष्ट्रीय महामंत्री बनाया है। जबकि सौदान सिंह को भी पार्टी का राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनाए रखा है। ओमप्रकाश धुर्वे को भी राष्ट्रीय सचिव के पद पर बरकरार रखा गया है। पार्टी ने सह कोषाध्यक्ष पद से मंदसौर सांसद सुधीर गुप्ता को हटा दिया है।

लगातार चौथी बार महामंत्री बने कैलाश विजयवर्गीय

पश्चिम बंगाल में हुई भाजपा की करारी हार के बाद ये कयास लगाए जा रहे थे कि मध्यप्रदेश के वरिष्ठ नेता और राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजयवर्गीय की राष्ट्रीय संगठन से विदाई हो सकती है। क्योंकि बंगाल में मिली हार के बाद विजयवर्गीय ने खुद को मध्यप्रदेश तक ही सीमित कर लिया था। लेकिन हाल में पार्टी ने उन्हें इस साल होने वाले पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव की पॉलिटिकल विंग की कमान सौंपी है। जब मध्यप्रदेश में विधानसभा चुनाव सिर पर हैं, ऐसे में पार्टी ने उन्हें महासचिव की जिम्मेदारी पर बरकरार रखा है। विजयवर्गीय को चुनावी मैनेजमेंट का माहिर माने जाते हैं। साथ ही उनकी प्रदेश के मालवा-निमाड़ क्षेत्र में अच्छी गहरी पकड़ है।

कैलाश विजयवर्गीय लगातार चौथी बार भाजपा के राष्ट्रीय महामंत्री बने हैं। वे पार्टी के अकेले ऐसे नेता हैं। पहली बार अमित शाह के अध्यक्ष रहते समय उन्हें महामंत्री बनाया गया था। दो बार वे अमित शाह के साथ महामंत्री रहे। जेपी नड्डा ने भी उन्हें अपने कार्यकाल में दोबारा महामंत्री बनाया है। स्थानीय मीडिया ने जब विजयवर्गीय से लगातार चौथी बार राष्ट्रीय महामंत्री बनाए जाने का सवाल पूछा तो उन्होंने हंसते हुए जवाब दिया। वे बोले कि मैंने जब घोषणा सुनी तो राष्ट्रीय अध्यक्ष नड्डा जी को फोन किया। उनसे पूछा कि आपने तो मुझे चौथी बार महामंत्री बना दिया। इस पर वे मुझसे बोले कि हां यार, बनाना तो कुछ और चाहता था, पर अभी यह ठीक है।

सौदान सिंह की एमपी के साथ छत्तीसगढ़-राजस्थान में भी है पकड़

इसी तरह मध्यप्रदेश के विदिशा से आने वाले सौदान सिंह को पार्टी ने राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनाए रखा है। सिंह पहले राष्ट्रीय सह संगठन महामंत्री भी रह चुके हैं। छत्तीसगढ़ में संगठन के प्रभारी रहते हुए पहली बार भाजपा की सरकार बनाने में सौदान सिंह की बड़ी भूमिका थी। इसके बाद लंबे समय तक उन्होंने छत्तीसगढ़ में काम किया। 2018 के चुनाव में भाजपा की हार के बाद सौदान सिंह की भूमिका पर भी सवाल उठे। इसके बाद आरएसएस से वे भाजपा में शामिल हो गए और उनका केंद्र छत्तीसगढ़ के बजाय उत्तर भारत में दिया गया। जेपी नड्डा ने सिंह को हिमाचल प्रदेश के चुनाव प्रभारी की जिम्मेदारी भी सौपी थी। हालांकि पार्टी को वहां हार का सामना करना पड़ा। सौदान सिंह को आरएसएस से जुड़े होने के कारण देश के कई राज्यों में संगठन के कार्यों का अनुभव है। सिंह की छत्तीसगढ़-मध्यप्रदेश के साथ साथ राजस्थान में भी अच्छी पकड़ है। इस साल होने वाले विधानसभा चुनाव और अगले साल के लोकसभा चुनाव को देखते हुए उन्हें फिर उपाध्यक्ष बनाया गया है।

धुर्वे को चुनावी राज्यों के आदिवासी क्षेत्रों में काम की मिल सकती है जिम्मेदारी
प्रदेश के डिंडोरी जिले से पूर्व विधायक ओमप्रकाश धुर्वे को भी सचिव पद पर बरकरार रखा गया है। धुर्वे अनुसूचित जनजाति वर्ग से आते हैं। भाजपा का मध्यप्रदेश विधानसभा चुनाव में इस वर्ग पर ज्यादा फोकस है। चार बार विधायक रह चुके धुर्वे 2018 के विधानसभा चुनाव में जबलपुर जिले के शाहपुरा से हार गए थे। वे बाबूलाल गौर, उमा भारती और शिवराज सिंह चौहान की कैबिनेट में मंत्री भी रह चुके हैं। मध्यप्रदेश में होने वाले विधानसभा चुनाव को देखते हुए धुर्वे को दोबारा मौका दिया गया है। धुर्वे को मध्यप्रदेश के साथ ही छत्तीसगढ़ और राजस्थान के आदिवासी इलाकों में चुनाव प्रचार की जिम्मेदारी मिल सकती है।

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