फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   Amar Ujala Samvad Gurugram Motivational Speaker BK Shivani to Share Tips for a Peaceful Life

Amar Ujala Samvad: अमर उजाला के मंच पर बोलीं बीके शिवानी- आज हम साधन के गुलाम हो गए हैं और साधना से दूर

Mon, 02 Sep 2024 01:07 PM IST
अभिषेक दीक्षित न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अभिषेक दीक्षित Updated Mon, 02 Sep 2024 01:07 PM IST
सार

अमर उजाला संवाद कार्यक्रम में मोटिवेशनल स्पीकर बीके शिवानी ने कहा कि 'अपना जीवन सफल किया, अपनी हर सांस सफल की तो आप सफल हैं। लेकिन किसी ने हमें बताया कि जितना आप कमाएंगे, जितना नाम कमाएंगे, वो उतना सफल है। तो सभी वो ही बनना चाहेंगे और सभी उसी दिशा में चल रहे हैं। अब बीते 20-30 वर्षों में हमें उसके नतीजे दिख रहे हैं।'

विज्ञापन
Amar Ujala Samvad Gurugram Motivational Speaker BK Shivani to Share Tips for a Peaceful Life
अमर उजाला संवाद - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

अमर उजाला संवाद कार्यक्रम में मशहूर मोटिवेशनल स्पीकर और आध्यात्मिक गुरु बीके शिवानी शामिल हुईं। इस दौरान उन्होंने जीवन, आध्यात्म, सफलता आदि विषयों पर अपने विचार साझा किए। बीके शिवानी ने कहा कि आज इंसान साधन का गुलाम हो गया है और साधना से दूर हो गया है। आइए जानते हैं कि बीके शिवानी ने मौजूदा समाज, देश और आध्यात्म जैसे विषयों पर क्या-क्या कहा-

विज्ञापन

 
विज्ञान और आध्यात्म के संबंध को हम भारतीयों ने पांच हजार या उससे भी ज्यादा पुराने समय में खोज लिया था। लेकिन फिर ऐसा क्या हुआ कि हम उस धारा से दूर हो गए। अब जब यही चीज पश्चिम से होकर हमारे पास आती है तो हमें बड़ी अच्छी लगती है। 
विज्ञापन

इसके जवाब में बीके शिवानी ने कहा कि 'साइंस बहुत ताकतवर चीज है। उसमें कोई शक की बात नहीं है। बीते 30 वर्षों में साइंस ने जीवन को बहुत आसान बना दिया है। 20-30 वर्षों में हम तनाव, डिप्रेशन, तलाक जैसे शब्द बहुत दुर्लभ सुनने को मिलते थे, लेकिन आज ये बहुत आम हो गए हैं। साइंस ने साधन दिए, लेकिन साधनों के साथ हम बच्चों की तरह खेलने लग गए। परमात्मा ने कहा है कि साधनों का प्रयोग करो, लेकिन साधना को नहीं भूलना है। लेकिन आज हम साधन के गुलाम हो गए हैं और हमने अपने मन के लिए समय ही नहीं निकाला। किसी को कहो कि ध्यान करिए तो लोगों को ये बेफिजूल की बात लगती है। हमने बाहरी शक्ति को अहमियत दी है, लेकिन अंदरुनी शक्ति को अहमियत नहीं दी है।'
विज्ञापन
विज्ञापन




'अपना जीवन सफल किया, अपनी हर सांस सफल की तो आप सफल हैं। लेकिन किसी ने हमें बताया कि जितना आप कमाएंगे, जितना नाम कमाएंगे, वो उतना सफल है। तो सभी वो ही बनना चाहेंगे और सभी उसी दिशा में चल रहे हैं। अब बीते 20-30 वर्षों में हमें उसके नतीजे दिख रहे हैं। ड्रग्स आ गया, कैंसर आ गया, डायबिटीज आ गया, यही वजह है कि हम एक असफल समाज हो गए हैं। हम इस समय बहुत बड़ा फेलियर हैं। आज अहम है कि आप कितना कमाते हैं। 40-50 वर्षों पहले अहम था कि आप कैसे कमाते हैं। कितना कमाते हैं वो साधन है, लेकिन कैसे कमाते हैं वो संस्कार है। महिमा उसकी है।' 

हम जब ये बातें सुन रहे हैं तो ये हमें प्रभावित कर रही हैं, लेकिन कड़वा सच ये भी है कि जैसे ही हम सभागार से बाहर जाते हैं तो हम वापस दुनिया के उसी चक्र में फंस जाते हैं। ये दुश्चक्र आसानी से खत्म नहीं हो पा रहा है। ऐसा सोचने वाले भी लोग हैं कि ये सब बकवास है और जीवन के लिए साधन तो चाहिए। 
इसके जवाब में बीके शिवानी ने कहा कि 'नौकरी चाहिए, गाड़ी चाहिए, उसमें कोई दिक्कत नहीं है। आध्यात्म ये नहीं कहता कि पैसे मत कमाइए। बहुत तरक्की करिए, लेकिन ध्यान रखिए धन वो पहली ऊर्जा है जो घर आती है। अगर मन और तन को शक्तिशाली बनाना है तो धन सही आना चाहिए घर पर। हमारे समाज में धन को लक्ष्मी का रूप माना गया है। इसलिए कमाने का तरीका कमल पुष्प की तरह होना चाहिए। इस कीचड़ में रहना है और कमाना है, लेकिन हम जो धन कमाएं उसमें किसी की दुआ लगी होनी चाहिए। वो जो धन आए दुआओं के साथ वो सेहत और सुकून लेकर आएगा। वहीं अगर गलत तरीके से धन कमाया तो धन घर आ जाएगा लेकिन धन के साथ विपरीत ऊर्जा भी घर आएगी। इससे हमारे हर चीज के अंदर विपरीत ऊर्जा आ जाएगी। इसलिए धन कमाना है लेकिन दुआओं के साथ कमाना है।'



आप पहले ब्रह्मकुमारीज के आध्यात्मिक चैनल पर प्रवचन देतीं थी तो उस यात्रा की शुरुआत कैसे हुई?
हम सेवा करते हैं और सेवा आध्यात्मिक जीवन का अहम हिस्सा होता है। पहले जैसे बैकस्टेज सेवा होती थी, मुझे उसमें बहुत अच्छा लगता है। तो हमारे यहां जो भी दीदियां, भाई आते थे प्रवचन करते थे। एक दिन मुझे ही बोल दिया गया प्रवचन के लिए। मुझे कुछ आता नहीं था तो मैंने भगवान का ध्यान लगाया और खुद को समर्पित कर दिया। सवाल पूछे जाते रहे और मैं जवाब देती रही और इस तरह मैंने एक ही दिन में आठ एपिसोड शूट कर डाले। वो टीवी पर चल गए और लोगों को वो पसंद आया। इसके बाद मुझे फिर शूट करने के लिए बोला गया। फिर ऐसे करते करते डेढ़-दो हजार एपिसोड हो गए। फिर एक दिन सुरेश ओबेरॉय जी से बात हुई। वो भी काफी चर्चित हुआ। 

जब आप पीछे मुड़कर देखती हैं तो आपको कैसे लगता है?
मैं आज भी बोलते हुए मैं खुद को समर्पित कर देती हूं। करवाने वाला कोई और है। मैं जब सोचकर बोलती हूं तो वो समझ आ जाता है। 

लोग उस डिवाइन एनर्जी से जुड़ना चाहते हैं, लेकिन जो डिलेमा है उसे भी नहीं छोड़ पाते। 
ये बहुत बड़ी भ्रांति है कि लोग पूछते हैं कि आप इंजीनियरिंग कर रहे थे और आध्यात्म की तरफ चले गए, लेकिन आध्यात्म दूसरा रास्ता नहीं है, ये भ्रांति है। जीवन में कैसे चलना है, क्या सोचना है और क्या संस्कार बनाने हैं, वो सीखाता है। बहुत कमाएं और मेहनत करें, लेकिन साथ-साथ संस्कारों का भी ध्यान रखें। शरीर के साथ-साथ मन का ध्यान रखना भी जरूरी है। अब साधनों के आने के बाद हम न ठीक से सोते हैं, न खाते हैं। आज लोग कहीं भी बैठे-बैठे सो जाते हैं। इसका मतलब है कि नींद की कमी है। ये बड़ी समस्या है। आज हम घर पर काम कर रहे हैं और फिर काम, क्रोध, लोभ के कंटेंट उपभोग करने के बाद नींद में हमारे चित्त पर वही सब चीजें चलती हैं। आध्यात्म हमें सीखाता है कि रात में सोने से पहले मेडिटेशन करो और सुबह का एक घंटा अपने लिए रखो। जिससे हम सही और संस्कारों से कमाएं और मेहनत करें। आध्यात्म भी हमें यही सिखाता है। आज लोगों के पास सारे साधन हैं, लेकिन फिर भी लोगों को शांति और खुशी चाहिए, ये आध्यात्म की कमी है। 


आपकी दिनचर्या कैसी होती है?
दिनचर्या सुबह ब्रह्म महूर्त से शुरू होती है। सुबह 4 से 5 बजे का समय राजयोग के लिए है और उसके बाद शारीरिक व्यायाम या सुबह की सैर से होती है। उसके बाद दिन के सामान्य काम जैसे हम सेवा करते हैं और रात में सोने से पहले फिर से मेडिटेशन करते अपने मन को साफ करके सोते हैं। अब ये दिनचर्या मेरे जीवन का हिस्सा बन गई है। भोजन में सात्विक खाना लेती हूं और बाहर का खाना नहीं खाती। 

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed