औरंगजेब के शहीद होने से बेखबर मां-बहन लगाती रहीं रिहाई की गुहार, पिता ने नेताओं के लिए कही बड़ी बात
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सलानी के जांबाज जवान औरंगजेब को अगवा कर आतंकियों ने बृहस्पतिवार को निर्मम हत्या कर दी, लेकिन शुक्रवार की सुबह नौ बजे तक उनके परिवार वालों को इसकी जानकारी नहीं थी। औरंगजेब की मां और बहनें मीडिया के माध्यम से उसकी रिहाई की गुहार आतंकियों से लगा रही थीं। गांव वालों में इतनी हिम्मत नहीं थी कि वह उन्हें हकीकत बता पाएं।
औरंगजेब को अगवा कर उसकी हत्या की जा चुकी थी लेकिन इसके 15 घंटे बाद भी उसकी मां और पांच बहनें इस बात से अंजान थीं। हालांकि गांव के ज्यादातर लोगों को समाचारों के माध्यम से सच्चाई का पता बृहस्पतिवार की रात को ही चल चुका था। इसके चलते पूरे गांव में मातम छा गया। सुबह उजाला होने के साथ ही गांव की महिलाएं औरंगजेब के घर में इस बहाने से जमा होने लगी थी कि उसका कुछ पता चला कि नहीं।
महिलाओं की चीत्कार से गमगीन हुआ गांव
इस दौरान गांव के पुरुष जिनको इस बात की पूरी खबर थी। वे शहीद औरंगजेब के मकान के पीछे खेतों में ही डेरा डाले रहे तकि भीड़ देख कर घर की महिलाओं को शहादत का पता न चल पाए। पर सच्चाई कब तक छुपती, करीब 11 बजे परिवार की महिलाओं को हकीकत का पता चला तो पूरा गांव उनकी चीत्कार से गमगीन हो गया।
आप चुनाव लड़ो, कुर्सी बचाओ लेकिन आतंकवाद खत्म करवाओ
औरंगजेब के पिता ने कहा कि आप लोग चुनाव लड़ो। आप अपनी कुर्सी बचाओ लेकिन आतंकवाद को खत्म करवाओ। जिससे की हिंदुस्तान फिर सोने का बन सके। रही बात कश्मीर की तो वो हिंदुस्तान का अंग है और रहेगा। अगर दो भाइयों में बाप की जमीन का बंटवारा होता है तो उसके बाद एक भाई दूसरे भाई को अपनी एक इंच जमीन लेने के प्रयास में मार मिटाने को तैयार हो जाता है तो कश्मीर तो हिंदुस्तान का अंग है उसे कोई क्या छीनेगा।
पिता बोले, आतंकवाद से हिंदुस्तान का ज्यादा नुकसान
औरंगजेब के पिता ने कहा कि आतंकवाद ने हम लोगों को बहुत जलील कर दिया है चाहे वह पाकिस्तान हो या कश्मीर। इसे हर जगह से खत्म करना चाहिए। आज मेरे घर में मातम है, लेकिन 2003 से अब तक सैकड़ों घरों में इस प्रकार के हालात होते आए हैं। सबसे ज्यादा नुकसान हिंदुस्तान का हुआ है।
औरंगजेब के पिता ने आगे कहा कि हिंदुस्तान इतना बड़ा मुल्क है क्या आतंकवाद को यहां से खत्म नहीं किया जा सकता। अगर नेता लोग चाहें तो क्या इसे खत्म कर सकते हैं। कश्मीर में ही आतंकी ट्रेनिंग होती है। हथियार तो कोई कारपेंटर नहीं बनाता। आतंकवादी मारे जाते हैं हथियार पकड़े जाते। फिर नए आतंकवादी और हथियार कहां से आते हैं। इसके पीछे कई बड़े लोग शामिल हैं। जो आतंकवाद को खत्म नहीं करने देते।
मेरा बेटा अकेले चला गया
मेरे बेटे का समय पूरा हो गया था। मगर मुझे इस बात का दुख है कि वो अकेला चला गया। अपने साथ एक आतंकी को भी ले जाता तो मुझे बड़ी खुशी होती। उन लोगों ने चोरों की तरह हमला किया है अगर वो उसके साथ सामने से लड़ते तो वो उन्हें कभी जिंदा नहीं छोड़ता। उसे तो साजिश के साथ मारा गया है। जो गाड़ी उसे आर्मी कैंप से लाई उसमें एक पोर्टर लेकर आया था। उसका ड्राइवर पोर्टर और न जाने कौन-कौन आतंकियों से मिला हुआ था। जिसने उसे मरवाया है। उसके बारे में बताया गया कि वह घर जा रहा है।