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Morbi Bridge Tragedy: मोरबी पुल का मरम्मत करने वाली कंपनी की मुश्किल बढ़ी, हाईकोर्ट ने जारी किया नोटिस

Wed, 21 Dec 2022 06:24 PM IST
गुलाम अहमद न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अहमदाबाद
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अहमदाबाद Published by: गुलाम अहमद Updated Wed, 21 Dec 2022 06:24 PM IST
सार

गुजरात हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश अरविंद कुमार और न्यायमूर्ति आशुतोष शास्त्री की खंडपीठ ने एक याचिका पर सुनवाई करते हुए अजंता कंपनी को नोटिस जारी किया है। 

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Morbi bridge tragedy Gujarat high court issues notice to maintenance firm Ajanta Manufacturing
Gujarat High Court - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

गुजरात हाईकोर्ट में बुधवार को मोरबी पुल हादसा मामले पर सुनवाई हुई। हाईकोर्ट ने मोरबी सस्पेंशन ब्रिज का रखरखाव और संचालन करने वाली कंपनी अजंता मैन्युफैक्चरिंग लिमिटेड को नोटिस जारी किया है। इसी साल अक्तूबर में हुए इस हादसे में 135 लोगों की मौत हुई थी। हाईकोर्ट में एक याचिका दायर कर अदालत द्वारा स्वत: संज्ञान लेकर शुरू की गई कार्यवाही में कंपनी को प्रतिवादी बनाने की मांग की गई है।

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याचिका पर सुनवाई करते हुए मुख्य न्यायाधीश अरविंद कुमार और न्यायमूर्ति आशुतोष शास्त्री की खंडपीठ ने अजंता कंपनी को नोटिस जारी किया। याचिकाकर्ता ने मांग की है कि कंपनी को हादसे से हुई क्षति के भुगतान के लिए उत्तरदायी बनाया जाए। 
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खंडपीठ ने मोरबी नगरपालिका के 46 पार्षदों द्वारा दायर एक आवेदन को भी खारिज कर दिया, जिसमें उन्हें कार्यवाही में शामिल होने की मांग की गई थी क्योंकि उन्हें डर है कि हाईकोर्ट द्वारा अपने पिछले आदेश में की गई टिप्पणियों के कारण नागरिक निकाय को हटाया जा सकता है। गुजरात हाईकोर्ट अब 19 जनवरी को मामले में सुनवाई करेगा।
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आवेदकों संजीव एझावा और दिलीप चावड़ा ने कहा कि कंपनी और स्थानीय नागरिक निकाय के बीच अनुबंध के बारे में कुछ संदेह हो सकता है, लेकिन अदालत में दायर हलफनामे में कहा गया है कि कंपनी मोरबी पुल के पूरे प्रशासन, मरम्मत, रखरखाव और संचालन को नियंत्रित करती है। याचिका में कहा गया है कि कंपनी ने बड़े पैमाने पर जनता की देखभाल का कर्तव्य निभाया, जिसे वह प्रदर्शित करने में विफल रही और जिसके कारण दुर्भाग्यपूर्ण घटना हुई। याचिका में कहा गया है कि मेसर्स अजंता को इस याचिका में प्रतिवादी संख्या 7 के रूप में शामिल किया जाए।

अजंता ने पुल की मरम्मत के लिए देवप्रकाश सॉल्यूशंस के साथ किया था अनुबंध
याचिका के मुताबिक, अजंता कंपनी ने पुल की मरम्मत के लिए स्थानीय फैब्रिकेटर देवप्रकाश सॉल्यूशंस के साथ अनुबंध किया था। सरकार को जानकारी दिए किए बिना या फिटनेस प्रमाणपत्र हासिल किए बिना दीपावली की छुट्टियों के दौरान पुल को लोगों के लिए खोल दिया गया। अपनी याचिका में, 46 पार्षदों ने तर्क दिया कि हाईकोर्ट ने गुजरात नगर पालिका अधिनियम, 1963 के तहत नागरिक निकाय को हटाने के लिए राज्य सरकार की आवश्यकता वाली टिप्पणियां की हैं।


आवेदन में कहा गया है कि अगर उन्हें इस तरह के किसी भी फैसले में पक्षकार नहीं बनाया जाता है और उन्हें हटाने का फैसला किया जाता है, तो इससे उनके अधिकार प्रभावित होंगे। पार्षदों ने दावा किया कि वे निर्णय लेने की प्रक्रिया का हिस्सा नहीं थे और न ही मोरबी पुल के पट्टे के अनुदान से पहले कोई प्रस्ताव पारित किया गया था। हालांकि, पीठ ने उनके आवेदनों को खारिज करते हुए कहा कि इस कार्यवाही के लिए आवेदकों की कोई जरूरत नहीं है और न ही वे उचित पक्ष हैं।

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