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Flood Alert: उत्तर से दक्षिण तक उफन रही हैं नदियां, मंडरा रहा है बड़ा खतरा, NDRF को लगातार निगरानी के निर्देश
Mon, 29 Jul 2024 03:24 PM IST
आशीष तिवारी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: आशीष तिवारी
Updated Mon, 29 Jul 2024 03:24 PM IST
सार
बीते कुछ दिनों से नदियों में बढ़े जलस्तर के चलते असम पश्चिम बंगाल और बिहार के कुछ हिस्सों में लगातार बाढ़ के हालात बने हुए थे। इसके अलावा उत्तर प्रदेश की अलग-अलग नदियों में पानी की अधिकता के कारण जबरदस्त नुकसान हुआ था। इन राज्यों में तो अभी भी नदियों में अधिक पानी और बाढ़ के हालात बने हैं।
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मानसून के बीच बढ़ा नदियों का जलस्तर।
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
देश के अलग-अलग हिस्सों में हो रही बारिश के बाद नदियों में पानी लगातार बढ़ता जा रहा है। हालात ऐसे हो गए हैं कि उत्तर से लेकर दक्षिण और पूर्व से लेकर पश्चिम की सभी नदियां उफान पर हैं। देश के अलग-अलग राज्यों में उफनाई नदियों की पूरी रिपोर्ट केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय से साझा की गई है। फिलहाल नदियों में बाढ़ जैसे हालत के चलते कुछ राज्यों में अभी भी स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। जिन इलाकों में नदियों से बाढ़ के हालात बने हैं, वहां पर केंद्र सरकार में इस रिपोर्ट के आधार पर तुरंत सहायता उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं। आपदा से निपटने के लिए एनडीआरएफ के टीमों को भी तैनात किया गया है।
बीते कुछ दिनों से नदियों में बढ़े जलस्तर के चलते असम पश्चिम बंगाल और बिहार के कुछ हिस्सों में लगातार बाढ़ के हालात बने हुए थे। इसके अलावा उत्तर प्रदेश की अलग-अलग नदियों में पानी की अधिकता के कारण जबरदस्त नुकसान हुआ था। इन राज्यों में तो अभी भी नदियों में अधिक पानी और बाढ़ के हालात बने हैं। साथ ही केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय को मिली रिपोर्ट के मुताबिक महाराष्ट्र से लेकर कर्नाटक और तमिलनाडु समेत तेलंगाना की कई नदियों में भी तेज बहाव और और जलस्तर खतरे के निशान से ऊपर पहुंच चुका है। ऐसे हालात में केंद्र सरकार की मॉनिटरिंग टीम इन नदियों के किनारे बसी आबादी को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचने की तैयारी में लग गई है। अलग-अलग राज्यों में बहने वाली नदियों के जलस्तर की पूरी रिपोर्ट सोमवार सुबह भी जल शक्ति मंत्रालय को दी गई है। इस रिपोर्ट के मुताबिक मुख्य नदियों के साथ तकरीबन 23 सहायक नदियों में लगातार पानी का जलस्तर बढ़ता जा रहा है।
जानकारी के मुताबिक महाराष्ट्र के कोल्हापुर में बहने वाली कृष्णा नदी का जल स्तर अपने सामान्य जलस्तर से ऊपर बहना शुरू हो चुका है। स्थिति यह है कि कोल्हापुर के कुरुनवाड इलाके में जलस्तर को सामान्य से ऊपर पाया गया है। इसी तरह कर्नाटक के हवेरी जिले में बहने वाली कुमुदवती नदी भी अपने सामान्य जलस्तर से ऊपर बह रही है। इस नदी का पानी कूपेलूर इलाके में सामान्य से ऊपर पाया गया है। राज्य सरकार ने इस इलाके में रह रही आबादी को अलर्ट रहने के निर्देश भी जारी किए हैं। इसी तरह तेलंगाना में बहने वाली गोदावरी नदी भी लगातार अपने बढ़े हुए जलस्तर के साथ इस राज्य में बह रही है। तेलंगाना के अलग-अलग जिलों से बहने वाली इस नदी का सबसे ज्यादा जलस्तर मुलुगू जिले में पाया गया है। केंद्र सरकार की ओर से राज्य सरकार को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि उनके राज्य में जहां-जहां पर अधिक जलस्तर नदियों का मिल रहा है वहां के स्थानीय निवासियों को अलर्ट मोड पर रखा जाए। इसके अलावा किसी भी तरीके की आपदा के लिए बचाव कार्य की एजेंसियों को भी अलर्ट कर दिया गया है।
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कर्नाटक के ही हासन जिले में हेमावती नदी भी अपने तेज जल बहाव के कारण इलाकों में खतरा बनती जा रही है। इस नदी का जलस्तर हसन जिले के सकलेशपुर इलाके में सबसे ज्यादा पाया गया है। दक्षिण भारत तेलंगना कर्नाटक की नदियों में ही जलस्तर ज्यादा नहीं है, बल्कि केरल और तमिलनाडु समेत आंध्र प्रदेश की नदियों में भी ज्यादा पाया गया है। इसके अलावा उडुपी में बहने वाली स्वर्ण नदी का जलस्तर भी लगातार बढ़ता जा रहा है। कर्नाटक के मांड्या जिले से बहने वाली हेमावती नदी अपने सामान्य जलस्तर से लगातार ऊपर बह रही है। जबकि कर्नाटक में ही अग्नाशिनी नदी का जलस्तर भी अपने सामान्य बहाव से ऊपर ही लगातार बह रहा है। दरअसल यह सभी नदियां दक्षिण के अलग-अलग नदियों के साथ सहायक नदियों में मिलाकर अलग-अलग राज्यों में बहती हैं। इसलिए इन नदियों में बड़े हुए जलस्तर का असर दक्षिण के अन्य राज्यों पर भी पड़ना तय माना जा रहा है।
दक्षिण भारत के अलावा उत्तर भारत में भी लगातार नदियों से बाढ़ का कहर जारी है। उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले में रामगंगा नदी लगातार खतरे के निशान से ऊपर बह रही है। हालांकि बीते दो दिनों में इस नदी में जलस्तर में बहुत थोड़ी कमी जरूर देखी गई है। बावजूद इसके इस नदी के आसपास खतरा बना हुआ है। पिथौरागढ़ में ही सरजू नदी का भी पानी लगातार बढ़ रहा है। जबकि उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले में बहने वाली कुआनु नदी में पानी का बहाव तेज हुआ है। रिपोर्ट के मुताबिक उत्तर और दक्षिण के साथ-साथ पश्चिम में पुणे जिले से होकर बहने वाली मूला नदी अपने सामान्य जलस्तर से लगातार ऊपर बह रही है। इसी राज्य के सांगली में बहने वाली येरला नदी भी लगातार अपने बड़े हुए जलस्तर के साथ आगे बढ़ रही है। जानकारी के मुताबिक इस नदी में पानी का जलस्तर लगातार बढ़ता जा रहा है। महाराष्ट्र के ही कोल्हापुर जिले में बहने वाली पंचगंगा नदी का भी जलस्तर सामान्य से दशमलव 83 मीटर ऊपर बह रहा है। पुणे की भीमा नदी में भी जलस्तर बीते कुछ दिनों से लगातार बढ़ता जा रहा है।
इसी तरह गुजरात के सूरत जिले में बहने वाली पूर्णा नदी में भी खतरनाक स्थिति बनी हुई है। इस नदी का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है। बिहार की कोसी नदी खगड़िया में लगातार बढ़े हुए जलस्तर के साथ आगे बढ़ रही है। जबकि बिहार के ही सुपौल में भी कोसी नदी का कहर जारी है। गोपालगंज में गंडक नदी अपने बड़े हुए जलस्तर के साथ आसपास के इलाकों को चपेट में ले रही है। दो दिन पहले इस नदी में पानी का जलस्तर कुछ कम जरूर हुआ है। उत्तर से लेकर दक्षिण और पश्चिम से लेकर पूर्व तक नदियों में पानी का उफान बना हुआ है। असम के शिवसागर से बहने वाली देसांग नदी भी अपने बढ़े हुए जलस्तर के साथ आगे बढ़ रही है।
देश के सभी राज्यों की नदियों में लगातार बड़े हुए जलस्तर के साथ केंद्र सरकार ने एनडीआरएफ को लगातार निगरानी करने के निर्देश भी दिए हैं। इसके अलावा केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय ने राज्य के अलग-अलग इलाकों में बहने वाली नदियों की पूरी रिपोर्ट केंद्रीय गृह मंत्रालय के साथ भी साझा की है। मंत्रालय से जुड़े अधिकारियों के मुताबिक जिन इलाकों में नदियों का जलस्तर अभी भी खतरे से ऊपर बना हुआ है, वहां पर सभी एजेंसियां और राज्य सरकार के जिम्मेदार महकमें लगातार काम कर रहे हैं। अधिकारियों का कहना है कुछ राज्य में नदियों का जलस्तर अभी भी खतरनाक स्तर पर ही बह रहा है। जबकि कुछ नदियों में पानी के सामान्य जलस्तर पर पहुंचने की भी सूचना मिली है।
पर्यावरण विशेषज्ञ प्रोफेसर जीएस चंदेल कहते हैं कि नदियों में लगातार बढ़ता हुआ पानी इस बात का संकेत है कि जहां-जहां पर उसके कैचमेंट में लोगों ने अपनी बस्तियां बसाई हैं, उन्हें अब खाली कर देना चाहिए। प्रोफेसर चंदेल कहते हैं कि यह शहरों की बसावट और तैयार किया जा रहे नए इलाकों की बनावट में हो रही खामियों का ही नतीजा है। क्योंकि नदियां भले ही अपने मूल स्वरूप में ना बहें, लेकिन जो उनका कैचमेंट एरिया है, वहां पर किसी भी तरीके की बसावट न सिर्फ गैरकानूनी है। बल्कि मानवीय जीवन के लिहाज से खतरनाक भी है। यही वजह है कि जब-जब नदियों का जलस्तर बढ़ता है तब तक वही आबादी सबसे ज्यादा मुसीबत में आती है, जो उसके आसपास बसी हैं। खासतौर से नदी के अपने कैचमेंट इलाके में हुई बसावट पर सबसे बड़ा बाढ़ का कहर टूटता है।
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बीते कुछ दिनों से नदियों में बढ़े जलस्तर के चलते असम पश्चिम बंगाल और बिहार के कुछ हिस्सों में लगातार बाढ़ के हालात बने हुए थे। इसके अलावा उत्तर प्रदेश की अलग-अलग नदियों में पानी की अधिकता के कारण जबरदस्त नुकसान हुआ था। इन राज्यों में तो अभी भी नदियों में अधिक पानी और बाढ़ के हालात बने हैं। साथ ही केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय को मिली रिपोर्ट के मुताबिक महाराष्ट्र से लेकर कर्नाटक और तमिलनाडु समेत तेलंगाना की कई नदियों में भी तेज बहाव और और जलस्तर खतरे के निशान से ऊपर पहुंच चुका है। ऐसे हालात में केंद्र सरकार की मॉनिटरिंग टीम इन नदियों के किनारे बसी आबादी को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचने की तैयारी में लग गई है। अलग-अलग राज्यों में बहने वाली नदियों के जलस्तर की पूरी रिपोर्ट सोमवार सुबह भी जल शक्ति मंत्रालय को दी गई है। इस रिपोर्ट के मुताबिक मुख्य नदियों के साथ तकरीबन 23 सहायक नदियों में लगातार पानी का जलस्तर बढ़ता जा रहा है।
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जानकारी के मुताबिक महाराष्ट्र के कोल्हापुर में बहने वाली कृष्णा नदी का जल स्तर अपने सामान्य जलस्तर से ऊपर बहना शुरू हो चुका है। स्थिति यह है कि कोल्हापुर के कुरुनवाड इलाके में जलस्तर को सामान्य से ऊपर पाया गया है। इसी तरह कर्नाटक के हवेरी जिले में बहने वाली कुमुदवती नदी भी अपने सामान्य जलस्तर से ऊपर बह रही है। इस नदी का पानी कूपेलूर इलाके में सामान्य से ऊपर पाया गया है। राज्य सरकार ने इस इलाके में रह रही आबादी को अलर्ट रहने के निर्देश भी जारी किए हैं। इसी तरह तेलंगाना में बहने वाली गोदावरी नदी भी लगातार अपने बढ़े हुए जलस्तर के साथ इस राज्य में बह रही है। तेलंगाना के अलग-अलग जिलों से बहने वाली इस नदी का सबसे ज्यादा जलस्तर मुलुगू जिले में पाया गया है। केंद्र सरकार की ओर से राज्य सरकार को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि उनके राज्य में जहां-जहां पर अधिक जलस्तर नदियों का मिल रहा है वहां के स्थानीय निवासियों को अलर्ट मोड पर रखा जाए। इसके अलावा किसी भी तरीके की आपदा के लिए बचाव कार्य की एजेंसियों को भी अलर्ट कर दिया गया है।
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कर्नाटक के ही हासन जिले में हेमावती नदी भी अपने तेज जल बहाव के कारण इलाकों में खतरा बनती जा रही है। इस नदी का जलस्तर हसन जिले के सकलेशपुर इलाके में सबसे ज्यादा पाया गया है। दक्षिण भारत तेलंगना कर्नाटक की नदियों में ही जलस्तर ज्यादा नहीं है, बल्कि केरल और तमिलनाडु समेत आंध्र प्रदेश की नदियों में भी ज्यादा पाया गया है। इसके अलावा उडुपी में बहने वाली स्वर्ण नदी का जलस्तर भी लगातार बढ़ता जा रहा है। कर्नाटक के मांड्या जिले से बहने वाली हेमावती नदी अपने सामान्य जलस्तर से लगातार ऊपर बह रही है। जबकि कर्नाटक में ही अग्नाशिनी नदी का जलस्तर भी अपने सामान्य बहाव से ऊपर ही लगातार बह रहा है। दरअसल यह सभी नदियां दक्षिण के अलग-अलग नदियों के साथ सहायक नदियों में मिलाकर अलग-अलग राज्यों में बहती हैं। इसलिए इन नदियों में बड़े हुए जलस्तर का असर दक्षिण के अन्य राज्यों पर भी पड़ना तय माना जा रहा है।
दक्षिण भारत के अलावा उत्तर भारत में भी लगातार नदियों से बाढ़ का कहर जारी है। उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले में रामगंगा नदी लगातार खतरे के निशान से ऊपर बह रही है। हालांकि बीते दो दिनों में इस नदी में जलस्तर में बहुत थोड़ी कमी जरूर देखी गई है। बावजूद इसके इस नदी के आसपास खतरा बना हुआ है। पिथौरागढ़ में ही सरजू नदी का भी पानी लगातार बढ़ रहा है। जबकि उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले में बहने वाली कुआनु नदी में पानी का बहाव तेज हुआ है। रिपोर्ट के मुताबिक उत्तर और दक्षिण के साथ-साथ पश्चिम में पुणे जिले से होकर बहने वाली मूला नदी अपने सामान्य जलस्तर से लगातार ऊपर बह रही है। इसी राज्य के सांगली में बहने वाली येरला नदी भी लगातार अपने बड़े हुए जलस्तर के साथ आगे बढ़ रही है। जानकारी के मुताबिक इस नदी में पानी का जलस्तर लगातार बढ़ता जा रहा है। महाराष्ट्र के ही कोल्हापुर जिले में बहने वाली पंचगंगा नदी का भी जलस्तर सामान्य से दशमलव 83 मीटर ऊपर बह रहा है। पुणे की भीमा नदी में भी जलस्तर बीते कुछ दिनों से लगातार बढ़ता जा रहा है।
इसी तरह गुजरात के सूरत जिले में बहने वाली पूर्णा नदी में भी खतरनाक स्थिति बनी हुई है। इस नदी का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है। बिहार की कोसी नदी खगड़िया में लगातार बढ़े हुए जलस्तर के साथ आगे बढ़ रही है। जबकि बिहार के ही सुपौल में भी कोसी नदी का कहर जारी है। गोपालगंज में गंडक नदी अपने बड़े हुए जलस्तर के साथ आसपास के इलाकों को चपेट में ले रही है। दो दिन पहले इस नदी में पानी का जलस्तर कुछ कम जरूर हुआ है। उत्तर से लेकर दक्षिण और पश्चिम से लेकर पूर्व तक नदियों में पानी का उफान बना हुआ है। असम के शिवसागर से बहने वाली देसांग नदी भी अपने बढ़े हुए जलस्तर के साथ आगे बढ़ रही है।
देश के सभी राज्यों की नदियों में लगातार बड़े हुए जलस्तर के साथ केंद्र सरकार ने एनडीआरएफ को लगातार निगरानी करने के निर्देश भी दिए हैं। इसके अलावा केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय ने राज्य के अलग-अलग इलाकों में बहने वाली नदियों की पूरी रिपोर्ट केंद्रीय गृह मंत्रालय के साथ भी साझा की है। मंत्रालय से जुड़े अधिकारियों के मुताबिक जिन इलाकों में नदियों का जलस्तर अभी भी खतरे से ऊपर बना हुआ है, वहां पर सभी एजेंसियां और राज्य सरकार के जिम्मेदार महकमें लगातार काम कर रहे हैं। अधिकारियों का कहना है कुछ राज्य में नदियों का जलस्तर अभी भी खतरनाक स्तर पर ही बह रहा है। जबकि कुछ नदियों में पानी के सामान्य जलस्तर पर पहुंचने की भी सूचना मिली है।
पर्यावरण विशेषज्ञ प्रोफेसर जीएस चंदेल कहते हैं कि नदियों में लगातार बढ़ता हुआ पानी इस बात का संकेत है कि जहां-जहां पर उसके कैचमेंट में लोगों ने अपनी बस्तियां बसाई हैं, उन्हें अब खाली कर देना चाहिए। प्रोफेसर चंदेल कहते हैं कि यह शहरों की बसावट और तैयार किया जा रहे नए इलाकों की बनावट में हो रही खामियों का ही नतीजा है। क्योंकि नदियां भले ही अपने मूल स्वरूप में ना बहें, लेकिन जो उनका कैचमेंट एरिया है, वहां पर किसी भी तरीके की बसावट न सिर्फ गैरकानूनी है। बल्कि मानवीय जीवन के लिहाज से खतरनाक भी है। यही वजह है कि जब-जब नदियों का जलस्तर बढ़ता है तब तक वही आबादी सबसे ज्यादा मुसीबत में आती है, जो उसके आसपास बसी हैं। खासतौर से नदी के अपने कैचमेंट इलाके में हुई बसावट पर सबसे बड़ा बाढ़ का कहर टूटता है।