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सैटेलाइट संचार पर भेदभाव के आरोपों को सरकार ने नकारा: कहा-तीनों कंपनियों की प्रक्रिया एक जैसी; क्या है मामला?

Thu, 08 Oct 2026 10:17 AM IST
राकेश कुमार एएनआई, नई दिल्ली।
एएनआई, नई दिल्ली। Published by: राकेश कुमार Updated Thu, 08 Oct 2026 10:17 AM IST
सार

सैटेलाइट संचार सेवाओं को लेकर सोशल मीडिया पर भारत की नियामकीय व्यवस्था पर भेदभाव के आरोप लगाए जा रहे थे। सरकार ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि तीन सेवाओं को लाइसेंस दिए गए हैं और तीनों के लिए सुरक्षा आकलन की प्रक्रिया चल रही है। सुरक्षा प्रक्रिया पूरी होने के बाद लाइसेंसधारी स्पेक्ट्रम आवंटन के अगले चरण में जा सकते हैं। मंत्रालय के अनुसार, फिलहाल तीनों कंपनियां लगभग एक ही नियामकीय चरण में हैं।
 

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Ministry of Communications Regulatory Framework Satellite Internet Telecom Licence Spectrum Allocation
सैटेलाइट संचार - फोटो : @अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

सैटेलाइट संचार सेवाओं को लेकर सोशल मीडिया पर एक पोस्ट साझा की जा रही है। इसमें भारत की नियामकीय व्यवस्था पर सवाल उठाए गए हैं। पोस्ट में दावा किया गया है कि सैटेलाइट संचार सेवाओं के लिए नियम भेदभावपूर्ण तरीके से लागू किए जा रहे हैं। केंद्रीय संचार मंत्रालय ने इन आरोपों को खारिज कर दिया है। मंत्रालय ने कहा कि भारत में सभी दूरसंचार सेवाओं के लिए निष्पक्ष और गैर-भेदभावपूर्ण व्यवस्था लागू है। इसमें सैटेलाइट संचार सेवाएं भी शामिल हैं।
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तीन सेवाओं को दिया गया है दूरसंचार लाइसेंस
मंत्रालय ने बताया कि गैर-भूस्थिर उपग्रह कक्षा आधारित सैटेलाइट संचार सेवाओं के लिए तीन ग्लोबल मोबाइल पर्सनल कम्युनिकेशन बाय सैटेलाइट सेवाओं को दूरसंचार लाइसेंस दिए गए हैं। सरकार ने कहा कि यह कदम भारत में सैटेलाइट संचार सेवाएं उपलब्ध कराने की प्रतिबद्धता का हिस्सा है। यानी सरकार की ओर से इन सेवाओं के लिए लाइसेंस देने की प्रक्रिया पहले ही शुरू की जा चुकी है।
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लाइसेंस के साथ सुरक्षा नियमों का पालन जरूरी
सरकार के मुताबिक, लाइसेंस मिलने के बाद कंपनियों को कुछ जरूरी शर्तें पूरी करनी होती हैं। इनमें सुरक्षा से जुड़ी शर्तें भी शामिल हैं। हर लाइसेंसधारी को यह साबित करना होता है कि उसकी सेवा तय सुरक्षा नियमों का पालन करती है। इसका मकसद सेवाओं का इस्तेमाल करने वाले लोगों और उनके डेटा की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।
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तीनों लाइसेंसधारियों की सुरक्षा जांच जारी
संचार मंत्रालय ने कहा कि तीनों लाइसेंसधारियों के मामले में सुरक्षा आकलन की प्रक्रिया अभी चल रही है। यानी फिलहाल किसी एक कंपनी को इस प्रक्रिया में आगे या पीछे नहीं रखा गया है। सभी तीनों कंपनियों के लिए सुरक्षा से जुड़ी जांच की जा रही है।

यह भी पढ़ें: मणिपुर में उग्रवादी कर रहे स्टारलिंक का इस्तेमाल: मस्क बोले- दावा फर्जी, भारत में बंद है बीम; विवाद क्यों?

सुरक्षा प्रक्रिया पूरी होने के बाद स्पेक्ट्रम का चरण
मंत्रालय के अनुसार, जब किसी लाइसेंसधारी की सुरक्षा से जुड़ी प्रक्रिया पूरी हो जाएगी, तब वह स्पेक्ट्रम आवंटन के लिए अगली प्रक्रिया में जाने के लिए आवेदन कर सकता है। फिलहाल तीनों कंपनियां लगभग एक ही नियामकीय चरण में हैं। इसलिए सरकार का कहना है कि किसी एक कंपनी के साथ अलग व्यवहार किए जाने की बात सही नहीं है।

सरकार ने भेदभाव के आरोपों को बताया गलत
मंत्रालय ने साफ कहा कि मौजूदा नियामकीय व्यवस्था सभी दूरसंचार सेवाओं के लिए समान है। सैटेलाइट संचार सेवाओं पर भी यही व्यवस्था लागू है। तीनों लाइसेंसधारियों की सुरक्षा जांच अभी चल रही है और तीनों लगभग एक ही चरण में हैं। ऐसे में इस व्यवस्था को अनुचित या भेदभावपूर्ण बताने का दावा बेबुनियाद और गलत धारणा पर आधारित है।

क्या है पूरा मामला? 
भारत में सैटेलाइट इंटरनेट सेवा शुरू करने के लिए कंपनियों को पहले दूरसंचार विभाग से ग्लोबल मोबाइल पर्सनल कम्युनिकेशन बाय सैटेलाइट (जीएमपीसीएस) का लाइसेंस लेना होता है। सरकार के अनुसार अभी वनवेब इंडिया, जियो सैटेलाइट कम्युनिकेशंस और स्टारलिंक सैटेलाइट कम्युनिकेशन को यह लाइसेंस मिला हुआ है। जनवरी 2026 में सरकार ने संसद में बताया था कि इन तीनों को लाइसेंस दिए गए हैं, जबकि कुछ अन्य आवेदनों को खारिज किया गया, एक कंपनी ने आवेदन वापस लिया और अमेजन कुइपर का आवेदन उस समय जांच में था। 


लाइसेंस मिलने के बाद भी कंपनियां तुरंत सेवा शुरू नहीं कर सकतीं। उन्हें सुरक्षा से जुड़ी शर्तें पूरी करनी होती हैं और उसके बाद स्पेक्ट्रम आवंटन की प्रक्रिया आती है। मौजूदा स्थिति में तीनों लाइसेंसधारियों का सुरक्षा आकलन चल रहा है और सरकार का कहना है कि वे मोटे तौर पर एक ही नियामकीय चरण में हैं।

मस्क ने क्या आरोप लगाए? 
इसी बीच एलन मस्क ने सात अक्तूबर को सोशल मीडिया पोस्ट में बिना किसी का नाम लिए आरोप लगाया कि कुछ लोग स्टारलिंक को भारत में आने से रोक रहे हैं ताकि लोगों पर अपना “एकाधिकार” बनाए रख सकें। लेकिन यह अलग बात है कि मस्क ने जिन लोगों पर आरोप लगाया है, उनके नाम या अपने दावे के समर्थन में कोई सार्वजनिक सबूत इस बयान में नहीं दिया है। सरकार ने इसके उलट कहा है कि व्यवस्था निष्पक्ष है और तीनों लाइसेंसधारी फिलहाल समान नियामकीय स्थिति में हैं।
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