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चीन से नौ दौर की वार्ता हुई, पर नहीं दिखा जमीनी असर: जयशंकर

Sun, 07 Feb 2021 02:39 AM IST
Jeet Kumar एजेंसी, अमरावती।
एजेंसी, अमरावती। Published by: Jeet Kumar Updated Sun, 07 Feb 2021 02:39 AM IST
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Military commanders will continue to talk in future, says s jaishankar
विदेश मंत्री एस जयशंकर - फोटो : twitter.com/DrSJaishankar

विदेश मंत्री एस जयशंकर ने शनिवार को कहा, भारत और चीन की सेना के शीर्ष कमांडर पूर्वी लद्दाख में सैनिकों को पीछे हटाने की प्रक्रिया को लेकर नौ दौर की वार्ता कर चुके हैं, मगर अब तक की वार्ताओं का कोई जमीनी असर नहीं दिखा है।

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हालांकि, उन्होंने यह भी कहा, फिलहाल सैन्य कमांडरों के बीच बातचीत चल रही है और भविष्य में भी दोनों देशों के बीच ऐसी बातचीत होती रहेगी।

आंध्र प्रदेश के विजयवाड़ा में जयशंकर ने कहा, सैनिकों के पीछे हटने का मुद्दा बहुत पेचीदा है। यह सैनिकों पर निर्भर करता है। आपको अपनी (भौगोलिक) स्थिति और घटनाक्रम के बारे में पता होना चाहिए। सैन्य कमांडर इस पर काम कर रहे हैं।
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विदेश मंत्री ने कहा, सैन्य कमांडर अब तक नौ दौर की वार्ताएं कर चुके हैं। हमें लगता है कि कुछ प्रगति हुई है लेकिन इसे समाधान के तौर पर नहीं देखा जा सकता। विदेेश मंत्री ने पिछले साल मॉस्को में दोनों देशों के विदेश मंत्रियों और रक्षा मंत्रियों के बीच हुई बातचीत की ओर इशारा करते हुए कहा, मैंने और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने पिछले साल अपने-अपने समकक्षों से बात की थी और इस बात पर सहमति बनी थी कि कुछ हिस्सों में सैनिकों को पीछे हटना चाहिए।
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दरअसल, जयशंकर से पूछा गया था कि क्या भारत और चीन के सैनिकों के बीच हुईं झड़पों को लेकर दोनों देशों के बीच मंत्रिस्तरीय वार्ता हो सकती है। उल्लेखनीय है कि भारत-चीन के बीच बीते साल पांच मई से पूर्वी लद्दाख में सैन्य गतिरोध चल रहा है। गतिरोध खत्म करने लिये दोनों देशों के बीच कई दौर की सैन्य और राजनयिक स्तर की वार्ताएं हो चुकी हैं, लेकिन अब तक कोई हल नहीं निकल पाया है।

रक्षा में पूंजीगत व्यय में 18 फीसदी बढ़ोतरी, 15 साल में सबसे ज्यादा
जयशंकर ने हाल ही में पेश किए गए बजट का जिक्र करते हुए कहा, रक्षा पर पूंजीगत व्यय के साथ-साथ अतिरिक्त खर्च किया जाना है। पूंजीगत व्यय में 18 फीसदी की बढ़ोतरी की गई है, जो बीते 15 साल में सबसे ज्यादा है। उन्होंने कहा, बीते साल लॉकडाउन के दौरान विदेशों में फंसे 40 लाख भारतीयों को 17,000 उड़ानों से देश लाया गया।

कोरोना के बाद अब पहले से बहुत अलग है भारत
जयशंकर ने कोरोना महामारी के दौरान पैदा हुई स्वास्थ्य चुनौतियों के बारे में कहा, कोरोना महामारी के बाद भारत पहले से बहुत अलग है। आज हमारे लिए स्वास्थ्य और कल्याण क्षेत्र महत्वपूर्ण हो गए हैं और यही वजह है कि बजट में सरकार ने इस क्षेत्र को बड़ी प्राथमिकता दी है।


मेड इन इंडिया टीके के लिए 25 और देश कतार में
विदेश मंत्री ने कहा, कोरोना के टीके की आपूर्ति 15 देशों को की जा रही है, जबकि 25 और देश टीके के लिए कतार में हैं। कुछ गरीब देशों को टीके की आपूर्ति की जा रही है, जबकि कुछ देश भारत सरकार की तय कीमतों पर खरीद रहे हैं। वहीं, कुछ देश सीधे टीका बनाने वाली कंपनियों से संपर्क साध रहे हैं।

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