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"हमारे घर जाने पर इतना तमाशा क्यों, कभी सरकार कहती है ऐसे जाओ और कभी कहती वैसे जाओ"

Wed, 20 May 2020 05:12 PM IST
Harendra Chaudhary शशिधर पाठक, अमर उजाला, नई दिल्ली
शशिधर पाठक, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Harendra Chaudhary Updated Wed, 20 May 2020 05:12 PM IST
सार

  • सरकार कुछ न दे तब भी घर तो पहुंच ही जाएंगे
  • जब काम धंधा नहीं है तो दिल्ली में रुक कर क्या करेंगे, खिलाएगा कौन?
  • एक सवारी का ई-रिक्शा भी 50 रुपया मांगने लगा है, कहीं मजदूर के पास इतना पैसा होता है?

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migrants are angry over government, govt flip flop
Migrants in delhi - फोटो : Amar Ujala

विस्तार

दरभंगा के विनोद कुमार ने ठान लिया है कि पत्नी सुनीता और दो छोटी बेटियों (छह साल और तीन साल) को लेकर आरा जिला जाएंगे। मकान मालिक को आधे से ज्यादा किराया देकर हिसाब करके आ गए हैं।
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पटपड़गंज में मंगलम हास्पिटल की रेडलाइट के पास साढे़ पांच बजे सुबह से जमे हुए हैं और शाम चार बजे तक सड़क के किनारे गुजारा हो रहा है। विनोद कुमार को समझ में नहीं आ रहा है कि सरकार उन जैसे तमाम कामगारों को उनके गांव भेजने के लिए इतना तमाशा क्यों कर रही है।

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मैट्रिक फेल विनोद कुमार को काफी कुछ पता है। वह कहते हैं कि सरकार कभी कहती है, मजदूर ऐसे जाएंगे और कभी कहती है कि मजदूर वैसे जाएंगे? कभी आधिकारी यह नियम बताते हैं और कभी वह नियम बताते हैं।
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विनोद कुमार कहते हैं कि अधिकारियों को लगता है कि सभी मजदूर पीएचडी हैं। अपनी बेबसी को जोड़कर विनोद कुमार कहते हैं कि अगर इतना पढ़े-लिखे होते या फार्म भरना ही आता तो बमुश्किल नौ हजार रुपये महीने पर मजदूरी करते?

कौन खिलाएगा और कितने दिन खिलाएगा जो दिल्ली में रुकें?

विनोद कुमार से बात करते समय चार-पांच घर जाने के लिए मजदूर और उनके बच्चे वहां आ गए। जब पूछा कि अब तो काम धंधा शुरू हो गया है, गांव क्यों जा रहे हैं? आए तो कमाकर जाइए? रुकिए? तपाक से विनोद कुमार कहते हैं अभी हम लोगों के लिए कोई काम धंधा नहीं है।

हमारे कुछ साथी रुके हैं। वह आज बवाना इंडस्ट्रियल एरिया में गए थे। हालत बहुत खराब है। फैक्टी आधे से कम लोगों पर काम कर रही है। लाला कह रहा है कि उसके पास आर्डर नहीं है। मजदूरी भी कम दे रहे हैं। ऐसे में कौन रुकेगा।

विनोद के साथ खड़े प्रमोद ने कहा कि कुछ दिन रुक भी जाएं तो कौन और कितने दिन खिलाएगा? सोनू का कहना है कि लॉकडाउन में गरीब, मजदूर तो बहुत हुआ, लेकिन हुआ क्या? तमाम लोग सड़क दुर्घटना में मारे गए।

सोनू का कहना है कि गरीबों की कोई सुनवाई नहीं है। वह खुद अपनी नौ महीने की बच्ची के साथ छह घंटे से यहां पड़े हैं।

ई-रिक्शा वाला 50 रुपया सवारी मांगता है

राजेश कुमार का कहना है कि अब आप किसी ई-रिक्शा में नहीं बैठ सकते। एक सवारी का 50 रुपये मांगता है। पहले दस रुपये में पहुंचा देता था। राजेश का कहना है कि आज 150 रुपया देकर वह पटपड़गंज पहुंचे हैं।

रिक्शे वाला कहता है कि पहले एक बार में पांच-छह सवारी ढोता था। अब सरकार उसे एक बार में एक सवारी ढोने के लिए कह रही है। राजेश कहते हैं कि आप बताइए, गरीब, मजदूर या आठ-नौ हजार रुपया कमाने वाला कैसे ई-रिक्शा में बैठ पाएगा।

राजेश नोएडा में एक कपड़े की फैक्टी में दैनिक मजदूरी करते थे। वह बताते हैं कि जिस तरह से अभी बाजार खुला है, लोगों को संभलने में ही छह महीने लग जाएंगे। इसलिए अभी तो गांव जाना ही ठीक है, वरना भूखे मर जाएंगे।

सरकार कुछ न दे तब भी पहुंच जाएंगे, बस जाने दे

कमल दिल्ली में पेंटिंग का काम करते हैं। नवंबर में आए थे। उनकी योजना सितंबर, अक्टूबर तक जाने की थी, लेकिन कोविड-19, लॉकडाउन ने डरा दिया। कमल के साथ तीन साल का बेटा, नौ साल की बेटी और पत्नी है।

वह कहते हैं कि दिल्ली ने डीटीसी की बस लगाई है। यहां से हम लोग नई दिल्ली रेलवे स्टेशन जाएंगे। वहां से श्रमिक ट्रेन से बिहार रवाना होंगे। हालांकि कमल का कहना है कि सरकार अगर कोई साधन न देती, तब भी वह जाते।

उनके पास एक साइकिल थी। कल उन्होंने एक आदमी को 700 रुपये में बेच दी। पहले कमल ने यही ठाना था कि साइकिल से परिवार को लेकर बिहार पहुंच जाएंगे। कमल का कहना है कि साधन भी न दे, बस जाने की अनुमति चाहिए।

योगी तो प्रियंका से भिड़े हैं, नीतीश कुमार कमजोर मुख्यमंत्री हैं।

हाजीपर के रघु की सुनिए। रघु ने बीए के बाद पढ़ाई छोड़ दी थी। लेकिन राजनीति में भी खासी रुचि लेते हैं। अखबार और मोबाइल पर खबर पढ़ना नहीं भूलते। प्रधानमंत्री मोदी अच्छे हैं लेकिन गरीबों के लिए कुछ नहीं कर पा रहे हैं।

रघु का कहना है कि केजरीवाल बहुत चालाक मुख्यमंत्री हैं। मासूमियत से बुद्धू बनाना जानते हैं। नीतीश कुमार के बारे में रघु का कहना है कि भाजपा के साथ साझा सरकार के कारण नीतीश कुमार कमजोर मुख्यमंत्री साबित हो रहे हैं।

वह बिहार के लोगों के मान सम्मान में निर्णय नहीं ले पा रहे हैं। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के बारे में रघु का कहना है कि वह तो प्रियंका गांधी से भिड़े पड़े हैं। योगी चाहते तो सभी यूपी, बिहार, झारखंड के मजदूरों को नोएडा, गाजियाबाद से अब तक बिहार से लगती सीमा के पास पहुंचा देते।

इससे बड़ी मदद हो जाती, लेकिन वह प्रियंका गांधी से भिड़े पड़े हैं। बताते हैं कि वह भाजपा, कांग्रेस, राजद, जद (यू) सभी पार्टी के नेताओं का झंडा उठा चुके हैं।



उन्हें तकलीफ हो रही है कि सभी राज्यों की सड़क पर बसें नहीं चल रही है। सब डिपो में खड़ी हैं, तब भी योगी जी को प्रियंका से बस लेनी पड़ रही है। प्रियंका जो भी बस दे रही हैं, वह उसे नहीं ले रहे हैं।

 

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