फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   Mere possession of sexually explicit photos will not amount to crime: Kerala High Court

अपने पास केवल अश्लील तस्वीरें रखना दंडनीय अपराध नहीं : केरल हाईकोर्ट

Mon, 10 Jun 2019 12:19 PM IST
Sneha Baluni न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोच्चि
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोच्चि Published by: Sneha Baluni Updated Mon, 10 Jun 2019 12:19 PM IST
विज्ञापन
Mere possession of sexually explicit photos will not amount to crime: Kerala High Court
केरल हाईकोर्ट (फाइल फोटो)

केरल उच्च न्यायालय ने एक आदेश में कहा है कि अपने पास केवल अश्लील तस्वीरें रखना स्त्री अशिष्ट रूपण प्रतिषेध कानून के तहत अपराध नहीं है। अदालत ने यह टिप्पणी एक व्यक्ति और एक महिला के खिलाफ आपराधिक मुकदमे को निरस्त करते हुए की। हालांकि उसने स्पष्ट किया कि ऐसी तस्वीरों का प्रकाशन या वितरण कानून के तहत दंडनीय है।

विज्ञापन


न्यायामूर्ति विजयराघवन ने अपने आदेश में कहा, 'यदि किसी वयस्क व्यक्ति के पास अपनी  कोई तस्वीर है जो अश्लील है तो 1968 के कानून 60 के प्रावधान तब तक उस पर लागू नहीं होंगे जब तक कि उन तस्वीरों को किसी अन्य उद्देश्य या विज्ञापन के लिए वितरित या प्रकाशित न किया जाए।’
विज्ञापन


उच्च न्यायालय ने यह फैसला उस याचिका पर दिया जिसमें एक व्यक्ति और महिला के खिलाफ मुकदमे को रद्द करने की मांग की गई थी। यह मामला कोल्लम में एक मजिस्ट्रेट अदालत में लंबित था। यह मामला 2008 में दर्ज किया गया था। पुलिस ने कोल्लम के बस अड्डे पर तलाशी अभियान के दौरान दोनों लोगों के बैगों की जांच की थी जो एक साथ थे। तलाशी में उनके पास दो कैमरे मिले थे।
विज्ञापन
विज्ञापन


जांच करने पर यह पाया गया कि उनके पास उनमें से एक की अश्लील तस्वीरें और वीडियो हैं। उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया था और कैमरे जब्त कर लिए गए थे। जिसके बाद एक मामला दर्ज किया गया था और जांच के बाद कोल्लम न्यायिक मजिस्ट्रेट के सामने अंतिम रिपोर्ट रखी गई थी।


उच्च न्यायालय ने कहा, 'अभियोजन पक्ष यह नहीं बता पाया है कि याचिकाकर्ताओं ने अपने कब्जे में पाए गए कैमरों के निजी चित्रों को विज्ञापित या प्रसारित किया है। हरियाणा राज्य बनाम भजनलाल के मामले में शीर्ष अदालत द्वारा निर्धारित कानूनी सिद्धांतों की पृष्ठभूमि में तथ्यात्मक परिदृश्य की जांच की गई तो यह निष्कर्ष निकला कि याचिकाकर्ताओं के खिलाफ आपराधिक कार्यवाही कुछ नहीं बल्कि कानून की प्रक्रिया का दुरुपयोग है।'


विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed