{"_id":"62330f9b79338f25997af2df","slug":"meghalaya-high-court-says-sexual-assault-without-undergarment-removal-will-still-amount-to-rape-news-in-hindi","type":"story","status":"publish","title_hn":"मेघालय हाई कोर्ट का फैसला: बिना कपड़े उतारे की गई जबरदस्ती भी दुष्कर्म की श्रेणी में मानी जाएगी, 2006 का मामला","category":{"title":"India News","title_hn":"देश","slug":"india-news"}}
मेघालय हाई कोर्ट का फैसला: बिना कपड़े उतारे की गई जबरदस्ती भी दुष्कर्म की श्रेणी में मानी जाएगी, 2006 का मामला
Thu, 17 Mar 2022 04:08 PM IST
गौरव पाण्डेय
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शिलांग
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शिलांग
Published by: गौरव पाण्डेय
Updated Thu, 17 Mar 2022 04:08 PM IST
सार
हाईकोर्ट ने एक 10 साल की बच्ची से दुष्कर्म से साल 2006 में हुए दुष्कर्म के मामले में ट्रायल कोर्ट की ओर से दोषी ठहराए गए शख्स की याचिका को खारिज करते हुए यह टिप्पणी की।
विज्ञापन
केरल हाई कोर्ट
- फोटो : अमर उजाला (फाइल)
विस्तार
मेघालय हाई कोर्ट ने गुरुवार को एक मामले की सुनवाई के दौरान कहा कि बिना कपड़े उतारे महिला के साथ की गई जबरदस्ती भी दुष्कर्म की श्रेणी में आती है। इस तरह के मामलों में आरोपी के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 375(बी) के तहत मामला दर्ज किया जाएगा।
विज्ञापन
मुख्य न्यायाधीश संजीव बनर्जी और न्यायाधीश डब्ल्यू डिएंगडोह की खंड पीठ ने साल 2006 के 10 साल की बच्ची से कथित दुष्कर्म मामले में एक याचिका पर सुनवाई करते हुए यह टिप्पणी की। हाई कोर्ट ने निचली अदालत का आदेश भी बरकरार रखा, जिसमें आरोपी को दोषी ठहराया गया था।
विज्ञापन
ट्रायल कोर्ट ने 31 अक्तूबर 2018 को इस मामले में आरोपी को दोषी करार देते हुए 10 साल कारावास की सजा सुनाई थी और 25 हजार रुपये का जुर्माना लगाया था। दोषी ने इसे चुनौती देते हुए कहा था कि बच्ची का अंडरवियर नहीं निकाला गया था ऐसे में दुष्कर्म का आरोप नहीं लगाया जा सकता।
विज्ञापन
हाई कोर्ट ने सुनवाई के दौरान कहा कि चूंकि आरोपी ने स्वीकार किया है कि उसने अपने आप पर से नियंत्रण खो दिया था और अपराध को अंजाम दिया था, ऐसे में उसे ट्रायल कोर्ट की ओर से सुनाई गई सजा अनुचित नहीं लगती है। इसके साथ ही अदालत ने ट्रायल कोर्ट का आदेश बकरकरार रखा।