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Adani Share Crash: अदाणी मामले की जांच करेंगे ये छह एक्सपर्ट, इनके बारे में सबकुछ जानिए

Thu, 02 Mar 2023 05:04 PM IST
निर्मल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: निर्मल कांत Updated Thu, 02 Mar 2023 05:04 PM IST
सार

शीर्ष अदालत ने विशेषज्ञ समिति से दो महीने के भीतर सीलबंद लिफाफे में अपनी रिपोर्ट सौंपने को कहा है। पूर्व न्यायाधीश एएम सापरे, ओ पी भट, बंबई उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश जे पी देवधर, के वी कामत, नंदन नीलेकणि और सोमशेखरन सुंदरेसन होंगे।

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Meet the members of SC appointed panel on Adani share crash
गौतम अदाणी - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

अदाणी समूह के शेयरों में हाल में हुई गिरावट और शेयर बाजार के अन्य नियामकीय पहलुओं की जांच करने के लिए उच्चतम न्यायालय ने गुरुवार को पूर्व न्यायाधीश एएम सापरे की अध्यक्षता में छह सदस्यीय समिति गठित करने का फैसला किया। अदालत ने समिति से दो महीने के भीतर सीलबंद लिफाफे में अपनी रिपोर्ट सौंपने को कहा है। शीर्ष अदालत के पूर्व न्यायाधीश सापरे के अलावा समिति के अन्य सदस्य ओ पी भट, बंबई उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश जे पी देवधर, के वी कामत, नंदन नीलेकणि और सोमशेखरन सुंदरेसन होंगे।

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कौन हैं सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश एएम सापरे
पूर्व न्यायाधीश एएम सापरे (68 वर्षीय) मध्य प्रदेश से हैं। उन्हें 25 अक्तूबर, 1999 को मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय में न्यायाधीश के रुप में नियुक्त किया गया था, जहां उन्होंने 10 फरवरी, 2010 तक सेवा दी। इसके बाद उन्हें राजस्थान उच्च न्यायालय में स्थानांतरित कर दिया गया, जहां वह 22 मार्च, 2013 तक रहे। इसके बाद उन्हें 23 मार्च, 2013 को मणिपुर उच्च न्यायालय का मुख्य न्यायाधीश बनाया गया था, जहां उन्होंने 18 अक्तूबर, 2023 तक सेवा दी। फिर उन्हें गुवाहाटी उच्च न्यायालय का मुख्य न्यायाधीश नियुक्त किया गया, जहां उन्होंने 12 अगस्त, 2014 तक सेवा दी। उन्हें 13 अगस्त 2014 को शीर्ष अदालत में पदोन्नत किया गया था,  जहां उन्होंने 27 अगस्त, 2019 तक सेवा की।
 

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समिति के अन्य सदस्यों के बारे में जानिए
समिति के अन्य सदस्यों में ओ पी भट भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) के पूर्व चेयरमैन हैं। भट वर्तमान में तेल एवं प्राकृतिक गैस निगम लिमिटेड (ओएनजीसी), टाटा स्टील लिमिटेड और हिंदुस्तान यूनिलीवर लिमिटेड के निदेशक मंडल में निदेशक हैं। समिति के तीसरे सदस्य बंबई उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश जेपी देवधर हैं। उन्होंने प्रतिभूति अपीलीय न्यायाधिकरण के पीठासीन अधिकारी के रूप में काम किया है। 

समिति के चौथे सदस्य के वी कामत हैं, जो ब्रिक्स देशों के न्यू डेवलपमेंट बैंक के पूर्व प्रमुख हैं और इन्फोसिस के चेयरमैन भी रह चुके हैं। समिति में नियुक्त पांचवें सदस्य नंदन नीलेकणि इंफोसिस के सह-संस्थापक हैं। उन्होंने यूआईडीएआई (भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण) का भी नेतृत्व किया है। समिति के छठे सदस्य वकील सोमशेखरन सुंदरेसन प्रतिभूति एवं नियामकीय विशेषज्ञ हैं। उनके नाम की सिफारिश हाल ही में केंद्र को बंबई उच्च न्यायालय के न्यायाधीश के रूप में की गई थी। 
 

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अदाणी समूह के शेयरों में बड़ी गिरावट
अमेरिकी शॉर्टसेलर हिंडनबर्ग रिसर्च की ओर से बीते 24 जनवरी को अदाणी समूह से संबंधित एक रिपोर्ट प्रकाशित की गई थी। इस रिपोर्ट में अदाणी समूह के संबंध में शेयरों की कीमत गलत तरीके से बढ़ाने और वित्तीय गड़बड़ियों के दावे किए गए थे। हालांकि, अपने ऊपर लगे आरोपों को अदाणी समूह ने खारिज कर दिया था। उसके बाद यह मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा था।
 

गौतम अदाणी ने किया कोर्ट के फैसले का स्वागत 
अदाणी समूह ने उच्चतम न्यायालय के आदेश का स्वागत किया है। समूह ने कहा है कि यह समयबद्ध तरीके से इस मामले को अंतिम रूप देगा। सुप्रीम कोर्ट ने विशेषज्ञ समिति गठित करते हुए सेबी को निर्देश दिया है कि इस बात की जांच की जाए कि सेबी के नियमों का उल्लंघन और स्टॉक की कीमतों में हेरफेर हुआ है या नहीं। इसके बाद अदाणी समूह के मुखिया गौतम अदाणी ने ट्वीट कर कहा, "सच्चाई की जीत होगी।"

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