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MCD Election: कांग्रेस ने उठाया रविदास मंदिर तोड़ने का मुद्दा, पूछा- कोर्ट आदेश के बाद भी अब तक क्यों नहीं बना

Mon, 07 Nov 2022 07:05 PM IST
Harendra Chaudhary डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Harendra Chaudhary Updated Mon, 07 Nov 2022 07:05 PM IST
सार

MCD Election: दिल्ली प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष चौधरी अनिल कुमार ने सोमवार को कहा कि भाजपा और अरविंद केजरीवाल दोनों ही खुद को दलितों का सबसे बड़ा हितैषी बताते हैं, लेकिन दोनों के ही पास इस बात का जवाब नहीं है कि सर्वोच्च न्यायलय के आदेश के तीन साल बीत जाने के बाद भी अब तक संत रविदास मंदिर का निर्माण क्यों नहीं किया गया...

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MCD Election: Congress asked questions on demolition of ravidas temple tughlakabad
Anil Chaudhary at Tughlakabad - फोटो : Agency

विस्तार

एमसीडी चुनाव (MCD Election) आने के साथ ही संत रविदास के मंदिर को तोड़े जाने का मुद्दा फिर गरमा गया है। कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि दिल्ली की अरविंद केजरीवाल सरकार और भाजपा की गैरजिम्मेदाराना व्यवहार के कारण दलितों के प्रसिद्ध धर्म गुरु के मंदिर को तोडा गया। जब यह मामला सर्वोच्च अदालत में गया, तो अदालत ने इस मंदिर को दोबारा बनाये जाने का आदेश दिया था, लेकिन सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के बाद भी यह मंदिर अब तक नहीं बन सका है।

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दिल्ली प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष चौधरी अनिल कुमार ने सोमवार को कहा कि भाजपा और अरविंद केजरीवाल दोनों ही खुद को दलितों का सबसे बड़ा हितैषी बताते हैं, लेकिन दोनों के ही पास इस बात का जवाब नहीं है कि सर्वोच्च न्यायलय के आदेश के तीन साल बीत जाने के बाद भी अब तक संत रविदास मंदिर का निर्माण क्यों नहीं किया गया। उन्होंने कहा कि नगर निगम की सत्ता में आने के बाद कांग्रेस दलितों के साथ-साथ पूरे देश के आराध्य संत रविदास के मंदिर का निर्माण कराएगी।

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चौ. अनिल कुमार ने सोमवार को मंदिर स्थल का दौरा कर भाजपा और आम आदमी पार्टी पर हमला बोला। उन्होंने बताया कि मंदिर के नाम पर एक ईंट तक नही लगाई गई है। उन्होंने कहा कि मंदिर स्थान पर सिर्फ पत्थरों के अवशेष हैं। उन्होंने कहा कि दलित समुदाय की धार्मिक आस्था का प्रतीक यह प्रचीन रविदास मंदिर के पुख्ता सबूतों सरकार यदि कोर्ट में पेश करती, तो यह मंदिर तोड़ने से बचाया जा सकता था, परंतु धर्म की ठेकेदार पार्टियों ने अपनी संर्कीण दलित विरोधी नीतियों और विचारधारा को उजागर करते हुए मंदिर को बचाने के लिए कुछ नही किया।

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