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हवा के बदले रूख ने फेल किया पुलिस का मिर्ची, खांसी स्प्रे और आंसू गैस का प्लान

Sat, 04 Jun 2016 04:00 AM IST
ब्यूरो / अमर उजाला, मथुरा
ब्यूरो / अमर उजाला, मथुरा Updated Sat, 04 Jun 2016 04:00 AM IST
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mathura police plan failed of jawahar bagh
जवाहर बाग के कब्जाधारियों को मिर्ची, खांसी स्प्रे और आंसू गैस के गोले छोड़कर हताश करने की योजना भी हवा के बदले रुख ने फेल कर दी थी। प्रशासन और पुलिस अधिकारी करीब एक माह से इसकी रणनीति बना रहे थे।
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चार मई को तहसील परिसर में कब्जाधारियों द्वारा मारपीट करने के बाद इसे खाली कराए जाने के लिए पहली बार प्रशासन की ओर से कड़ी पहल हुई। आलाधिकारियों के बीच बैठकों का दौर चला। इसमें जवाहर बाग में जमे कब्जाधारियों को हटाने के लिए होने वाली कार्रवाई में पुलिस द्वारा पहले मिर्ची स्प्रे, खांसी स्प्रे और आंसू गैस के गोलों का प्रयोग किया जाना था।
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लेकिन गुरुवार शाम को अचानक उम्मीद के विपरीत हुई कार्रवाई पुलिस पर ही भारी पड़ गई। पुलिस ने स्प्रे का प्रयोग करने का प्रयास किया तो हवा का रुख उनकी ही ओर था। इससे पुलिसकर्मियों को ही परेशानी होने लगी तो इसका प्रयोग बंद कर दिया गया। 
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भय के साए में गुजरा डेढ़ साल,400 लोगों का जीना हो गया था मुश्किल

mathura police plan failed of jawahar bagh

जवाहर बाग से सटकर बनी जवाहर बाग कालोनी में रह रहे करीब 400 लोगों का बीते डेढ़ साल में जीना मुश्किल हो गया था। दिन भर सहमे सहमे से रहने वाले ये लोग रात को तो कमरे से भी बाहर नहीं निकलते थे। जवाहरबाग आपरेशन होने के बाद अब इन्हें खुशी का अहसास हो रहा है।

जिला मुख्यालय पर सिविल लाइन क्षेत्र में ही जवाहर बाग से सटी जवाहर बाग कालोनी में विभिन्न विभागों के करीब 72 कर्मचारी परिवार रहते हैं। इनमें सदस्यों की संख्या करीब 400 के आसपास है। ढाई साल पहले जब जवाहर बाग पर स्वाधीन भारत विधिक सत्याग्रह के लोगों ने कब्जा किया तो जवाहर बाग कालोनी के लोग तमाशा देखने पहुंचते थे।

लेकिन एक साल बाद कथित सत्याग्रहियों द्वारा एक के बाद एक घटना को दिए गए अंजाम ने जवाहर बाग कालोनी वासियों को भयभीत कर दिया।

पुलिस और प्रशासनिक अफसरों पर हुए हमलों से पिछले छह माह से तो यहां के लोग इस कदर भयभीत हो गए कि बच्चों को दिन में भी सावधानी पूर्वक निकलने देते थे। रात को तो भय का आलम ऐसा रहता था कि घर की चाहरदीवारी में बने शौचालय तक जाने की हिम्मत नहीं जुटा पाते थे।

इस दौरान रात को थोड़ी सी भी किसी प्रकार की आहत लोगों को हिला देती थी। पूरा परिवार सहम जाता था। एक दूसरे को फोन करके प्रत्येक गतिविधि की जानकारी देते थे। हाल ही में आयोजित हुई बोर्ड परीक्षाओं में हाईस्कूल और इंटर के बच्चों ने परिचितों के घरों में रहकर परीक्षाएं दीं। आपरेशन होने के बाद अब लोग इस गुजरे वक्त को बुरा सपना मानते हैं।

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