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'कमिश्नर-SSP बैठे थे एसी बंगलों में और एसपी सिटी अकेले उपद्रवियों से भिड़ गए'

Sat, 04 Jun 2016 09:56 AM IST
ब्यूरो / अमर उजाला, मथुरा
ब्यूरो / अमर उजाला, मथुरा Updated Sat, 04 Jun 2016 09:56 AM IST
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mathura jawahar bagh late sp city mukul divedi

कमिश्नर, आईजी, डीआईजी, जिलाधिकारी और एसएसपी अपने बंगलों में थे जबकि एसपी सिटी अकेले जवाहर बाग की बाउंड्री तुड़वाने चले गए। पूर्व डीजीपी का कहना है कि जब पता है कि हजारों की भीड़ है और बवाल कर सकती है तो आईजी, कमिश्नर, एसएसपी और डीएम भारी पुलिस फोर्स के साथ वहां होने चाहिए। लेकिन अकेले एसपी सिटी को ही भेज दिया गया।

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प्रदेश के पूर्व डीजीपी एके जैन का कहना है कि जैसा कि उन्हें अफसरों से पता चला है कि जवाहर बाग में हजारों लोग थे। असलहे भी थे। तब तो पूरा आपरेशन बड़ी चौकसी के साथ चलाना चाहिए था। आईजी, कमिश्नर, डीएम और एसएसपी को भी साथ होना चाहिए था। अकेले एसपी सिटी को वहां भेजना अफसरों की बड़ी कमजोरी को साबित करता है।
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पूर्व डीजीपी विक्रम सिंह का कहना है कि इस समय पुलिस सियासी प्रेशर में है। जरा सा कोई अभियान चलता है तो फोन आने लगते हैं। इस मामले में भी यही रहा होगा। उनका कहना है कि पुलिस को पूरी प्लानिंग के साथ अभियान चलाना चाहिए था। भारी फोर्स के साथ जवाहर बाग को कवर करना चाहिए। ऐसे में पीएसी के अधिकारियों को बुलाया जाता है।
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पूर्व डीजीपी ब्रजलाल का कहना है कि पुलिस की प्लानिंग फेल रही। मथुरा के बड़े अधिकारियों ने सही से रणनीति ही नहीं बनाई। जिस तरह की सूचनाएं मिल रही हैं उसके मुताबिक एसपी सिटी को बड़े अफसरों का सहयोग नहीं मिला था। वैसे भी इस तरह के आपरेशन अर्ली मार्निंग में चलने चाहिए थे।

पूर्व डीजी उद्दयन परमार का कहना है कि जब भी कोई बड़ा आपरेशन चलाया जाता है तो वहां बड़े अधिकारियों की मौजूदगी भर से फोर्स का मनोबल बढ़ा रहता है। लेकिन इस अभियान में बड़े अधिकारियों का बाद में पहुंचना समझ से परे है। या तो किसी को उम्मीद नहीं रही होगी कि अचानक हमला हो जाएगा।

कमिश्नर और आईजी भी रात को पहुंचे
पुलिस पर शाम को करीब साढ़े पांच बजे हमला हुआ था लेकिन आगरा से कमिश्नर, डीआईजी और आईजी रात को मथुरा पहुंचे। जबकि आगरा से मथुरा की दूरी महज एक घंटे में पूरी हो सकती है। बड़े आपरेशन के दौरान इन्हें मौके पर होना चाहिए था। पुलिस पर हुए एक हजार 44 हमले
पूर्व डीजीपी ब्रजलाल का कहना है कि सपा सरकार में पुलिस पर एक हजार 44 हमले हुए हैं। आए दिन हमले किए जा रहे हैं।

कहते थे मुकुल, जवाहर बाग ले लेगा मेरी जान 

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लीडरशिप की क्वालिटी मुकुल में शुरू से ही दिखाई देती थी - फोटो : ANI

जवाहर बाग खाली कराने में शहीद हुए एसपी सिटी मुकुल द्विवेदी आला अधिकारियों के कार्रवाई खुलकर न करने देने के कारण परेशान थे। अपने परिवार से भी वह इसे शेयर करते थे। पत्नी से भी कहा था। अपने करीबियों से भी वह कहते थे कि एक दिन यह जवाहर बाग मेरी जान ही ले लेगा।

10 दिन पहले अचानक पीएसी के जवानों के  साथ हुए टकराव के बाद उनका बीपी बढ़ गया था। बताया कि वे उस रात सो नहीं सके। इसके बाद अगले दिन दवा ली और बिहारीजी की शरण में गए। 

छुट्टियों में मथुरा आ गया था परिवार 
मृदुल स्वभाव और हर किसी की समस्या को गंभीरता से सुनने वाले एसपी सिटी मुकुल द्विवेदी का परिवार चार दिन पहले ही मथुरा आया था। पत्नी अर्चना द्विवेदी (अंजू) बेटे कौस्तुभ द्विवेदी और छोटे बेटे अयूब द्विवेदी गोलू के साथ गर्मियों की छुट्टी होने पर आई थी।

ढाई साल पहले सीओ सदर के पद पर रहते हुए मुकुल द्विवेदी का बरेली के लिए तबादला हो गया था। इससे पहले उनके दोनों बच्चे मथुरा के सेक्रेड हार्ट स्कूल में पढ़ते थे। सेक्रेड हार्ट स्कूल के कई कार्यक्रमों में मुकुल द्विवेदी बतौर मुख्य अतिथि भी शामिल हुए थे।

तबादला होने पर दोनों बच्चे बरेली चले गए। अब फरवरी माह में एसपी बनने पर मथुरा पोस्टिंग मिली। सेशन पूरा न होने तक बच्चे मां के साथ बरेली ही रह रहे थे। निकट के आवास में रह रहे एसपी देहात अरुण कुमार ने बताया कि सुबह-सुबह एसपी सिटी बच्चों के साथ क्रि केट खेलकर तनाव कम करते थे।

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