कौन बनेगा सतर्कता आयुक्त: सीबीआई, एनआईए और दिल्ली पुलिस के चीफ रहे आईपीएस हैं दौड़ में
केन्द्रीय सतर्कता आयोग में इस वक्त सतर्कता आयुक्त का एक पद खाली है। पिछले साल पूर्व आईपीएस अधिकारी शरद कुमार अंतरिम सीवीसी के तौर पर कार्य कर रहे थे। राष्ट्रपति के सचिव रहे पूर्व आईएएस संजय कोठारी को अप्रैल 2020 में केंद्रीय सतर्कता आयुक्त की शपथ दिलाई गई थी...
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केन्द्रीय सतर्कता आयोग में 'सतर्कता आयुक्त' बनने की दौड़ शुरू हो गई है। सतर्कता आयुक्त बनने के लिए तीन पूर्व आईपीएस अधिकारियों का नाम सामने आया है। इनमें सबसे पहला नाम एनआईए के चीफ रहे वाईसी मोदी का है। वे हाल ही में रिटायर हुए हैं। उन्हें प्रधानमंत्री मोदी व केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का खास माना जाता है।
दूसरा नाम, सीबीआई के पूर्व निदेशक आरके शुक्ला का है। वे फरवरी में रिटायर हुए थे।
तीसरा नाम दिल्ली पुलिस के पूर्व आयुक्त अमूल्य पटनायक का बताया जा रहा है। हालांकि इनके कार्यकाल के दौरान पुलिस हेडक्वार्टर के समक्ष पुलिसकर्मी हड़ताल पर बैठ गए थे। इनके खिलाफ जमकर नारेबाजी भी हुई थी।
दूसरी तरफ, दिल्ली पुलिस के मौजूदा सीपी का जाना लगभग तय माना जा रहा है। ऐसी खबरें आ रही थीं कि उन्हें एक्सटेंशन दिया जा सकता है। सूत्रों का कहना है कि पुलिस आयुक्त एसएन श्रीवास्तव की राह में कथित तौर पर कुछ विभागीय टिप्पणियां बाधा बन गई हैं। इसके चलते उन्हें सेवा विस्तार मिलना मुश्किल है।
केन्द्रीय सतर्कता आयोग में इस वक्त सतर्कता आयुक्त का एक पद खाली है। पिछले साल पूर्व आईपीएस अधिकारी शरद कुमार अंतरिम सीवीसी के तौर पर कार्य कर रहे थे। राष्ट्रपति के सचिव रहे पूर्व आईएएस संजय कोठारी को अप्रैल 2020 में केंद्रीय सतर्कता आयुक्त की शपथ दिलाई गई थी। उनके बाद सुरेश एन पटेल को सतर्कता आयुक्त बनाया गया।
चूंकि सीवीसी में एक केंद्रीय सतर्कता आयुक्त और दो सतर्कता आयुक्त हो सकते हैं, इसलिए तीसरा पद अभी खाली है। शरद कुमार हरियाणा कैडर के आईपीएस अधिकारी रहे हैं। वे सीवीसी में आने से पहले एनआईए के डीजी रह चुके थे। केन्द्रीय सतर्कता आयोग की अवधारणा एक शीर्षस्थ सतर्कता संस्थान के रूप में की गई है जो किसी भी कार्यकारी प्राधिकारी के नियंत्रण से मुक्त है।
केन्द्रीय सरकार के अन्तर्गत सभी सतर्कता गतिविधियों की निगरानी करता है और केन्द्रीय सरकारी संगठनों में विभिन्न प्राधिकारियों को उनके सतर्कता कार्यों की योजना बनाने, निष्पादन करने, समीक्षा करने तथा सुधार करने में सलाह देता है।
इससे पहले वाईसी मोदी का नाम सीबीआई निदेशक की दौड़ में भी शामिल रहा था, लेकिन चयन समिति में उस अधिकारी को किसी संस्था के डीजी का पदभार सौंपने पर सहमति नहीं बन पाई, जिसकी सेवानिवृत्ति में छह माह से कम का समय बचा हो। इस नियम के चलते रॉ प्रमुख का पद भी उनके हाथ से निकल गया। मोदी 31 मई को रिटायर हुए हैं।
बता दें कि वाईसी मोदी, गुजरात दंगों की जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित कमेटी के सदस्य रहे थे। उस कमेटी ने मोदी को क्लीन चिट दी थी। पूर्व सीबीआई चीफ आरके शुक्ला का नाम भी सतर्कता आयुक्त की दौड़ में शामिल है। आलोक वर्मा और राकेश अस्थाना के विवाद के बाद जब उन्हें सीबीआई प्रमुख बनाया गया था तो उनका नाम कहीं नहीं चल रहा था।
अब बताया जा रहा है कि वे भी सीवीसी में जाने के इच्छुक हैं। उनका नाम भी पीएमओ की सूची में शामिल है। दिल्ली पुलिस के पूर्व सीपी अमूल्य पटनायक का नाम भी सतर्कता आयुक्त के लिए आगे किया जा रहा है। हालांकि उनका कार्यकाल विवादों से घिरा रहा था, लेकिन उन्हें बेहतरीन यस मैन कहा जाता है।