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Manipur: मणिपुर में क्यों भड़की हिंसा, मैतेई समुदाय को अनुसूचित जनजाति में शामिल करने को लेकर विवाद क्या है?

Thu, 04 May 2023 06:32 PM IST
शिवेंद्र तिवारी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: शिवेंद्र तिवारी Updated Thu, 04 May 2023 06:32 PM IST
सार

मैतेई समुदाय को अनुसूचित जनजाति (एसटी) श्रेणी में शामिल करने की मांग के विरोध में छात्रों के संगठन ‘ऑल ट्राइबल स्टूडेंट्स यूनियन ऑफ मणिपुर’ (एटीएसयूएम) ने मार्च बुलाया था। ‘आदिवासी एकता मार्च’ के नाम से हो रहे प्रदर्शन के दौरान हिंसा भड़क गई।
 

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Manipur: Why violence broke out in State, what is controversy over inclusion of Meitei community in ST group
मणिपुर - फोटो : AMAR UJALA

विस्तार

मणिपुर में बहुसंख्यक मैतेई समुदाय को अनुसूचित जनजाति श्रेणी में शामिल करने के खिलाफ हो रहा विरोध प्रदर्शन उग्र हो गया। कई संगठनों ने  बुधवार को ‘आदिवासी एकता मार्च’ का आह्वान किया, जिसमें हिंसा भड़क गई। हालात को देखते हुए राज्य के कई इलाकों में सेना को तैनात किया गया। गुरुवार को हिंसाग्रस्त इलाकों में देखते ही गोली मारने के आदेश जारी कर दिए गए। 
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आइये जानते हैं कि आखिर मणिपुर में क्या हो रहा है? विरोध प्रदर्शन क्यों हो रहा है? मैतेई समुदाय का क्या कहना है? राज्य सरकार का इस विरोध प्रदर्शन को लेकर क्या कहना है?
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Manipur: Why violence broke out in State, what is controversy over inclusion of Meitei community in ST group
Manipur - फोटो : Social Media
मणिपुर में क्या हो रहा है? 
मैतेई समुदाय को अनुसूचित जनजाति (एसटी) श्रेणी में शामिल करने की मांग के विरोध में छात्रों के संगठन ‘ऑल ट्राइबल स्टूडेंट्स यूनियन ऑफ मणिपुर’ (एटीएसयूएम) ने मार्च बुलाया था। ‘आदिवासी एकता मार्च’ के नाम से हो रहे प्रदर्शन के दौरान हिंसा भड़क गई।

एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने कहा कि रैली में हजारों आंदोलनकारियों ने हिस्सा लिया और इस दौरान तोरबंग इलाके में आदिवासियों और गैर-आदिवासियों के बीच झड़प शुरू हो गई। अधिकारी ने बताया कि भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने आंसू गैस के गोले दागे।

स्थिति को काबू करने के लिए क्या कदम उठाए गए?
 पुलिस अधिकारी के मुताबिक, स्थिति को देखते हुए गैर-आदिवासी बहुल इंफाल पश्चिम, काकचिंग, थौबल, जिरिबाम और बिष्णुपुर जिलों और आदिवासी बहुल चुराचांदपुर, कांगपोकपी और तेंगनौपाल जिलों में कर्फ्यू लगा दिया गया है।
 राज्यभर में मोबाइल इंटरनेट सेवाओं को तत्काल प्रभाव से पांच दिनों के लिए निलंबित कर दिया गया है, लेकिन ब्रॉडबैंड सेवाएं चालू हैं। कर्फ्यू लगाने संबंधी अलग-अलग आदेश आठ जिलों के प्रशासन द्वारा जारी किए गए हैं।

इस बीच, सेना ने जानकारी दी है कि मणिपुर नागरिक प्रशासन की अपील पर विभिन्न इलाकों में सेना की तैनाती की गई है। यह तैनाती तीन मई शाम से की गई है। लोगों को सुरक्षित जगहों पर शिफ्ट किया जा रहा है और कानून व्यवस्था बनाए रखने की कोशिश की जा रही है।
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Manipur: Why violence broke out in State, what is controversy over inclusion of Meitei community in ST group
बीरेन सिंह, बीजेपी
मुख्यमंत्री ने हिंसा पर क्या कहा?
राज्य में कई हिस्सों में जारी हिंसा और तनाव के बीच मणिपुर के मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह का भी बयान आया है। उन्होंने कहा, 'पिछले 24 घंटे के दौरान कुछ जगहों पर झड़प और तोड़फोड़ की घटनाएं सामने आई हैं। ये घटनाएं हमारे समाज के दो वर्गों के बीच पैदा हुई गलतफहमी की वजह से हुई हैं। राज्य सरकार स्थिति को नियंत्रित करने के लिए सभी कदम उठा रही है।

Manipur: Why violence broke out in State, what is controversy over inclusion of Meitei community in ST group
कोर्ट का आदेश - फोटो : SOCIAL MEDIA
क्यों हो रहा विरोध?
राज्य में मैतेई समुदाय के लोगों की संख्या करीब 60 प्रतिशत है। ये समुदाय इंफाल घाटी और उसके आसपास के इलाकों में बसा हुआ है। समुदाय का कहना रहा है कि राज्य में म्यांमार और बांग्लादेश के अवैध घुसपैठियों की वजह से उन्हें परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। 

वहीं, मौजूदा कानून के तहत उन्हें राज्य के पहाड़ी इलाकों में बसने की इजाजत नहीं है। यही वजह है कि मैतेई समुदाय ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर उन्हें जनजातीय वर्ग में शामिल करने की गुहार लगाई थी। अदालत में याचिकाकर्ता ने कहा कि 1949 में मणिपुर की रियासत के भारत संघ में विलय से पहले मैतेई समुदाय को एक जनजाति के रूप में मान्यता थी। 

इसी याचिका पर बीती 19 अप्रैल को हाईकोर्ट ने अपना फैसले सुनाया। इसमें कहा गया कि सरकार को मैतेई समुदाय को जनजातीय वर्ग में शामिल करने पर विचार करना चाहिए। साथ ही हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को इसके लिए चार हफ्ते का समय दिया। अब इसी फैसले के विरोध में मणिपुर में हिंसा हो रही है।

फैसले का जनजाति विरोध क्यों कर रहे हैं?
हाईकोर्ट के फैसले का राज्य का जनजातीय वर्ग विरोध कर रहा है। जनजातीय संगठनों का कहना है, 'मैतेई समुदाय को अगर जनजातीय वर्ग में शामिल कर लिया जाता है तो वह उनकी जमीन और संसाधनों पर कब्जा कर लेंगे।' 
विरोध में एक और तर्क दिया जाता है कि जनसंख्या और राजनीतिक प्रतिनिधित्व दोनों में मैतेई का दबदबा है।

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Manipur Violence - फोटो : सोशल मीडिया
क्या एसटी स्टेटस की मांग हिंसा की एकमात्र वजह है?
राज्य की पहाड़ी जनजातियों में फैली अशांति को समझने के लिए यहां की डेमोग्राफी समझना जरूरी है। भौगोलिक रूप से, राज्य को दो इलाकों, पहाड़ियों और मैदानों में बंटा है। 2011 की जनगणना के अनुसार मणिपुर की जनसंख्या 28,55,794 है। इसमें से 57.2 फीसदी घाटी के जिलों में और बाकी 42.8 फीसदी पहाड़ी जिलों में रहते हैं। मैदानी इलाकों में मुख्य रूप से मैतेई बोलने वाली आबादी रहती है। वहीं, पहाड़ियों में मुख्य रूप से नागा, कुकी जैसी जनजातियां निवास करती हैं। राज्य की मान्यता प्राप्त जनजातियां इन्हीं पहाड़ी क्षेत्रों तक सुरक्षा और वहां जमीन की खरीद पर प्रतिबंध की मांग भी करती रही हैं।
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