Manipur: मैतई प्रवासियों ने पीएम मोदी को लिखा खुला खत; डॉक्टरों की टीम ने किया पूर्वोत्तर राज्य का दौरा
Manipur: मणिपुर में मई के महीने से जारी जातीय हिंसा के बीच दुनियाभर के सैकड़ों मैतई लोगों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक खुला पत्र लिखा है। इसमें उन्होंने पूर्वोत्तर राज्य में सामान्य स्थिति बहाल करने के लिए उनसे दखल देने की मांग की है।
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मणिपुर में मई के महीने से जारी जातीय हिंसा के बीच दुनियाभर के सैकड़ों मैतई लोगों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक खुला पत्र लिखा है। इसमें उन्होंने पूर्वोत्तर राज्य में सामान्य स्थिति बहाल करने के लिए उनसे दखल देने की मांग की है।
इस पत्र का शीर्षक दिया गया है- मणिपुर में सामान्य स्थिति और सद्भाव बहाल करने के लिए तत्काल हस्तक्षेप का अनुरोध। मैतई प्रवासी और मैतई मूल के विदेशी नागरिकों ने प्रधानमंत्री से मणिपुर जाने और हिंसा से प्रभावित लोगों से मिलने का भी आग्रह किया है। पत्र में कहा गया है कि भारत जी-20 शिखर सम्मेलन की मेजबानी करने की तैयारी कर रहा है, ऐसे में मणिपुर में जारी हिंसा इसकी उपलब्धियों के लिए खतरा हो सकती है। सोमवार को प्रधानमंत्री कार्यालय को सौंपे गए इस पत्र पर 48 घंटे के भीतर ही 1,300 से अधिक लोगों ने हस्ताक्षर किए।
पत्र में कहा गया है, एकजुट और सामंजस्यपूर्ण मणिपुर और भारत की आकांक्षाओं के संरक्षक के रूप में, हम आपसे स्थिति को और अधिक बढ़ने से रोकने के लिए ठोस उपाय करने का आग्रह करते हैं। मणिपुर के लोग भयमुक्त जीवन के हकदार हैं, जहां वे शांति, स्थिरता और सुरक्षा वाले माहौल में पनप सकें।
डॉक्टरों ने मणिपुर ने किया मणिपुर दौरा
हिंसा प्रभावित मणिपुर में हजारों मैतई और कुकी राहत शिविरों में रह रहे हैं, ऐसे में राज्य का दौरा करने वाले डॉक्टरों के एक समूह ने वहां रहने वाले लोगों के पोषण और मानसिक स्वास्थ्य की स्थिति के बारे में चिंता जताई है। 'इंडियन डॉक्टर्स फॉर पीस एंड डेवलपमेंट' के डॉक्टरों की एक टीम ने मैतई और कुकी इलाकों में एक-एक राहत शिविर का दौरा किया।
टीम में डॉ. अरुण मित्रा, डॉ. शकील, डॉ. रविंद्रनाथ और डॉ. रजनी शामिल थे, जो 1 से 3 सितंबर तक मणिपुर में थे। उन्होंने इंफाल में खुमानलंकपाक खेल छात्रावास में एक राहत शिविर और पहाड़ी क्षेत्र में कांगपोकपी जिले में आईआईटी राहत शिविर का दौरा किया। मणिपुर में इस समय ऐसे 334 राहत शिविर हैं। डॉक्टरों ने इन राहत शिविरों में रह रहे लोगों के साथ-साथ जिला प्रशासन के नोडल अधिकारियों से भी मुलाकात की।