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Manipur: अब कहीं भी बच नहीं पाएंगे उग्रवादी, के-9 योद्धाओं के साथ भारतीय सेना की घातक तैयारी; यूं दिखाया दम

Sat, 09 May 2026 07:30 PM IST
Devesh Tripathi डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, इंफाल/गुवाहाटी
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, इंफाल/गुवाहाटी Published by: Devesh Tripathi Updated Sat, 09 May 2026 07:30 PM IST
सार

सूत्रों के मुताबिक, पूर्वोत्तर के कठिन इलाकों में उग्रवाद विरोधी अभियानों को और प्रभावी बनाने के लिए सेना लगातार नई रणनीतियों और आधुनिक तकनीकों पर काम कर रही है। ऐसे में के-9 यूनिट की भूमिका बेहद अहम मानी जा रही है।

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Manipur Indian Army preparing for deadly attack with K-9 warriors demonstrated strength landing by helicopter
भारतीय सेना - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

देश की सुरक्षा में चौबीसों घंटे तैनात भारतीय सेना अब उग्रवाद और आतंकवाद के खिलाफ अपने अभियान को और धारदार बनाने में जुटी है। मणिपुर के लीमाखोंग सैन्य स्टेशन में शुक्रवार को भारतीय सेना की स्पीयर कोर के तहत रेड शील्ड डिवीजन के के-9 योद्धाओं ने ऐसा युद्धाभ्यास किया, जिसने साफ कर दिया कि दुर्गम जंगल, ऊंचे पहाड़ या मुश्किल घाटियां अब आतंकियों के लिए सुरक्षित ठिकाना नहीं रह जाएंगी।
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सेना की ओर से आयोजित विशेष स्लिथरिंग अभ्यास में पांच डॉग टीमों ने हिस्सा लिया। हेलीकॉप्टर से रस्सी के सहारे तेजी से जमीन पर उतरते प्रशिक्षित सैन्य कुत्तों और उनके हैंडलरों ने अपनी फुर्ती, साहस और समन्वय का प्रदर्शन किया। पूरे अभ्यास के दौरान सेना की तैयारी, अनुशासन और ऑपरेशन क्षमता साफ दिखाई दी।
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के-9 यूनिट निभाएगी अहम भूमिका
सूत्रों के मुताबिक, पूर्वोत्तर के कठिन इलाकों में उग्रवाद विरोधी अभियानों को और प्रभावी बनाने के लिए सेना लगातार नई रणनीतियों और आधुनिक तकनीकों पर काम कर रही है। ऐसे में के-9 यूनिट की भूमिका बेहद अहम मानी जा रही है। ये प्रशिक्षित सैन्य कुत्ते घने जंगलों और दुर्गम पहाड़ियों में छिपे आतंकियों का पता लगाने, विस्फोटकों की पहचान करने और सर्च ऑपरेशन को सफल बनाने में बड़ी भूमिका निभाते हैं।

सूत्रों के मुतबिक, सेना का कहना है कि मौजूदा समय में आतंकवाद निरोधी अभियानों, खोज एवं बचाव कार्यों और आपदा प्रबंधन में के-9 टीमों का इस्तेमाल तेजी से बढ़ा है। यही वजह है कि सैनिकों और सैन्य कुत्तों के बीच तालमेल को और मजबूत करने के लिए इस तरह के विशेष अभ्यास नियमित रूप से कराए जा रहे हैं। 


अभ्यास के दौरान प्रशिक्षित कुत्तों का आत्मविश्वास, तेजी और आदेशों के प्रति सटीक प्रतिक्रिया देखने लायक थी। सैन्य विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की तैयारियां भविष्य के अभियानों में सेना को बड़ी बढ़त दिला सकती हैं।

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क्या है स्लिथरिंग अभ्यास?
स्लिथरिंग एक विशेष सैन्य तकनीक है, जिसमें जवान या विशेष टीम हेलीकॉप्टर से रस्सी के सहारे तेजी से जमीन पर उतरती है। इसका इस्तेमाल उन इलाकों में किया जाता है, जहां हेलीकॉप्टर की लैंडिंग संभव नहीं होती। आतंकवाद विरोधी अभियानों और दुर्गम क्षेत्रों में यह तकनीक बेहद प्रभावी मानी जाती है।

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