Manipur: बीरेन सिंह के इस्तीफे के बाद मणिपुर में बढ़ी राजनीतिक हलचल, दो दिन में सीएम तय कर सकती है भाजपा
सोमवार से शुरू हो रहे राज्य विधानसभा के सत्र में कांग्रेस बीरेन सिंह के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने वाली थी। अविश्वास प्रस्ताव पर मतदान होने की संभावना थी। कोंराड संगमा की नेशनल पीपल्स पार्टी (एनपीपी) के समर्थन वापस लेने के बाद भी सरकार को बचाए रखने के लिए भाजपा के पास पर्याप्त संख्या थी।
विस्तार
राज्यपाल कार्यालय से विधानसभा सत्र भंग करने का आदेश जारी
विधानसभा सचिव के मेघजीत सिंह की तरफ से जारी नोटिस के मुताबिक, भारत के संविधान के अनुच्छेद 174 के खंड (1) से मिली शक्तियों का इस्तेमाल कर मणिपुर के राज्यपाल अजय कुमार भल्ला ने विधानसभा भंग करने का आदेश दिया। बता दें कि मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह की अगुवाई वाली सरकार की सिफारिश पर राज्यपाल ने 12वीं मणिपुर विधानसभा के 7वां सत्र आहूत किया था, लेकिन अब सीएम के इस्तीफे के बाद अभी तक शुरू नहीं हो सके सत्र और तदनुसार राज्यपाल के आदेश को भी तत्काल प्रभाव से निरस्त किया जाता है।
"In exercise of the powers conferred by clause (1) of Article 174 of the Constitution of India, I, Ajay Kumar Bhalla, Governor of Manipur, hereby order that the previous directive to summon the 7th session of the 12th Manipur Legislative Assembly, which has yet to commence, is… pic.twitter.com/ZbXczTsdzu
विज्ञापन विज्ञापन— ANI (@ANI) February 9, 2025
अविश्वास प्रस्ताव के कारण बैकफुट पर आए सीएम बीरेन
सोमवार से शुरू हो रहे राज्य विधानसभा के सत्र में कांग्रेस बीरेन सिंह के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने वाली थी। अविश्वास प्रस्ताव पर मतदान होने की संभावना थी। कोंराड संगमा की नेशनल पीपल्स पार्टी (एनपीपी) के समर्थन वापस लेने के बाद भी सरकार को बचाए रखने के लिए भाजपा के पास पर्याप्त संख्या थी। लेकिन सूत्रों की मानें तो कई विधायक पार्टी के व्हिप को नकारते हुए अविश्वास प्रस्ताव पर बीरेन सिंह के खिलाफ वोट दे सकते थे, क्योंकि वे मुख्यमंत्री बदलने के पक्ष में थे। सूत्रों के अनुसार, मणिपुर में लगभग 12 विधायक मुख्यमंत्री परिवर्तन के पक्ष में थे। यहां तक कि मणिपुर विधानसभा के अध्यक्ष के साथ भी बीरेन सिंह के मतभेद सामने आए हैं।
दिल्ली में भाजपा की जीत, अब मणिपुर में नेतृत्व संकट
बताया जा रहा है कि इन सभी परिस्थितियों पर केंद्रीय नेतृत्व से बातचीत के बाद ही बीरेन सिंह ने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने का निर्णय लिया। सूत्रों के मुताबिक, दिल्ली में भाजपा की जीत के बाद मणिपुर की स्थिति पर पार्टी का शीर्ष नेतृत्व कोई नकारात्मक प्रभाव नहीं चाहता है। अब यह देखना होगा कि बीरेन सिंह के स्थान पर कौन मुख्यमंत्री बनता है।
राज्य में शांति स्थापना में मदद मिलेगी
भाजपा के सूत्रों ने उम्मीद जताई है कि बीरेन सिंह के इस्तीफे से राज्य में दो मुख्य जातीय समुदायों के बीच शांति स्थापित करने के लिए केंद्र के प्रयासों को बढ़ावा मिलेगा। सूत्रों ने कहा कि राज्य में शांति और सुरक्षा उपायों में तेजी लाने के मकसद से ही पिछले साल दिसंबर में अजय भल्ला को राज्यपाल नियक्त किया गया था। सिंह के इस्तीफे से इस प्रक्रिया में मदद मिलेगी।
एनपीपी ने भी किया इस्तीफे का स्वागत, कहा करेंगे भाजपा का सहयोग
नेशनल पीपल्स पार्टी (एनपीपी) ने भी सिंह के इस्तीफे का स्वागत किया और राज्य में शांति और सामान्य स्थिति बहाल करने के लिए भाजपा के साथ सहयोग करने की अपनी प्रतिबद्धता की पुष्टि की। एनपीपी के विधायक दल के नेता शेख नूरुल हसन ने संवाददाताओं से कहा, हमने सिंह सरकार से अपना समर्थन वापस लिया क्योंकि हमें उनके नेतृत्व पर विश्वास नहीं रहा था, क्योंकि उन्होंने राज्य में शांति और स्थिरता बहाल रखने में विफल रहे। उनका इस्तीफा इस लक्ष्य को प्राप्त करने की दिशा में एक स्वागत योग्य कदम है। उन्होंने कहा, केंद्र में एनडीए गठबंधन का हिस्सा होते हुए, हम आने वाले दिनों में राज्य को पूरी तरह से सामान्य बनाने के लिए भाजपा के साथ सहयोग और काम करना जारी रखेंगे।एनपीपी, जो 60 सदस्यीय विधानसभा में सात विधायकों का प्रतिनिधित्व करती है, ने पिछले साल नवम्बर में बीरेन सिंह की सरकार से अपना समर्थन वापस लिया था।
संबंधित वीडियोइस्तीफे से पहले का घटनाक्रम
2-3 फरवरी को मणिपुर के राज्यपाल अजय भल्ला दिल्ली गए थे। उन्होंने गृहमंत्री से मुलाकात की थी। राज्य के ताजा हालात पर विस्तृत रिपोर्ट दिया था। 5 फरवरी को दिल्ली विधानसभा चुनाव के दिन एन बीरेन सिंह दिल्ली गए थे। उन्होंने गृहमंत्री अमित शाह और बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा से मिलने का समय मांगा था। दिल्ली में उनकी बैठक नहीं हुई। 6 फरवरी को वह कुंभ में स्नान करने प्रयागराज गए, जहां उनके कई साथी कैबिनेट मंत्री भी थे। 6 फरवरी को राज्यपाल भल्ला भी प्रयागराज गए और उन्होंने भी महाकुंभ स्नान किया। 7 फरवरी को एन बीरेन सिंह प्रयागराज से दिल्ली लौटे। 9 फरवरी को बीरेन सिंह ने गृहमंत्री अमित शाह और जेपी नड्डा से मुलाकात की। इसके बाद वे दिल्ली से मणिपुर लौटे और राज्यपाल से मिलने का समय मांगा और शाम को इस्तीपा सौंपा।
सीएम का कथित ऑडियो क्लिप लीक हुआ
मुख्यमंत्री बीरेन सिंह का एक कथित ऑडियो क्लिप लीक हुआ था। कुकी समुदाय की याचिका पर 3 फरवरी को सुप्रीम कोर्ट ने इस ऑडियो को लेकर केंद्रीय फोरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला ( सीएफएसएल) से छह सप्ताह के भीतर रिपोर्ट देने को कहा था। 24 मार्च को शीर्ष अदालत में सुनवाई होनी है। इस ऑडियों में कथित रूप से सीएम सिंह की बातचीत शामिल है। इसमें वह सुझाव दे रहे हैं कि मैतेई समूहों को अशांति के दौरान राज्य सरकार से हथियार और गोला-बारूद लूटने की अनुमति दी जानी चाहिए। कुकी समुदाय ने आरोप लगाया है कि जातीय हिंसा में सिंह ने अहम भूमिका निभाई।