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जब स्मृति ने राहुल गांधी को हरा दिया तो मेनका, वरुण का क्या काम?

Sat, 01 Jun 2019 08:29 PM IST
आसिम खान डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: आसिम खान Updated Sat, 01 Jun 2019 08:29 PM IST
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Maneka Gandhi and Varun Gandhi did not get chance in Modi cabinet due to Smriti Irani?
मेनका गांधी-वरुण गांधी (फाइल फोटो) - फोटो : सोशल मीडिया

भाजपा के भीतर मेनका गांधी को मंत्रिमंडल में शामिल न किए जाने पर यह सवाल लगातार ट्रेंड कर रहा है। जवाब में पार्टी मुख्यालय में एक भाजपा नेता ने कहा कि कब तक गांधी-नेहरु परिवार से प्रेम किया जाए। सूत्र ने कहा कि राजनीति में बदलाव को समझिए। तर्क में संकेत साफ था कि जब केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने कड़ी मेहनत करके कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी से पार्टी की पारंपरिक अमेठी सीट को जीत लिया तो मेनका और वरुण का क्या काम? लेकिन वह भाजपा के नेता हैं और भाजपा अपने हर नेता का आदर करती है।

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मेनका गांधी को 2019 में वरुण गांधी की सुल्तानपुर की सीट से और वरुण को मां मेनका की सीट से उतारा गया था। मेनका ने सुल्तानपुर में कहा था कि यदि पार्टी कहेगी तो वह सोनिया गांधी और राहुल के खिलाफ पार्टी उम्मीदवार का प्रचार करने को तैयार हैं। भाजपा के एक अन्य नेता ने कहा कि लेकिन इसकी नौबत ही नहीं आई। वैसे भी वरुण गांधी भाजपा के युवा, होमवर्क करने वाले नेता हैं। वह कभी खुद को यूपी के मुख्यमंत्री पद की दौड़ में समझ रहे थे। 
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वह भाजपा में महासचिव पद पर रह चुके हैं, लेकिन जब भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने संगठन की अपनी टीम बनाई तो उसमें वरुण को नहीं लिया। वरुण के बारे में पिछले साल तक यह भी कयास लगते रहे कि वह नेतृत्व से नाराज हैं और कांग्रेस पार्टी में शामिल हो सकते हैं। हालांकि लोकसभा चुनाव से पहले वरुण ने आखिरी बार दमदारी से इसका खंडन कर दिया था।

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क्या होगा वरुण और मेनका का?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपनी सरकार के मंत्रिमंडल का गठन कर लिया है। इसमें भाजपा के कुछ और बड़े नेताओं की तरह मेनका गांधी और वरुण गांधी को जगह नहीं मिली है। मंत्रिमंडल का कोई भी विस्तार अब कुछ महीने बाद होने के आसार हैं। भाजपा अध्यक्ष अमित शाह केंद्रीय गृहमंत्री बन चुके हैं। भाजपा ने एक व्यक्ति, एक पद का फार्मूला अपना रखा है। वह लगातार दो बार अध्यक्ष पद भी रह चुके हैं। 



संभव है अमित शाह भाजपा अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दें और भाजपा अपने कुछ वरिष्ठ नेताओं को संगठन में जगह दे। पूर्व कंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा, उमा भारती, सुषमा स्वराज, शिव प्रताप शुक्ला, मनोज सिन्हा, सत्यपाल सिंह समेत तमाम चहरे बाहर हैं। अमित शाह के करीबी, विश्वस्त भूपेन्द्र यादव को भी सरकार में जगह नहीं मिली है। ऐसे में वरुण गांधी या मेनका गांधी का यहां पार्टी उपयोग कर सकती है।

 

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