एसआईआर विवाद: ज्ञानेश कुमार की गिरफ्तारी से लेकर बंगाल में फिर से चुनाव कराने तक, ममता बनर्जी ने की क्या मांग?
ममता बनर्जी ने एसआईआर को लेकर चुनाव आयोग के भीतर कथित मतभेद की रिपोर्ट के बाद मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की गिरफ्तारी की मांग की है। उन्होंने पश्चिम बंगाल समेत उन राज्यों में नए सिरे से विधानसभा चुनाव कराने की मांग की, जहां एसआईआर के बाद भाजपा ने जीत दर्ज की।
विस्तार
बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा कि मुख्य चुनाव आयुक्त को तुरंत गिरफ्तार किया जाना चाहिए। उन्होंने पश्चिम बंगाल समेत उन सभी राज्यों में दोबारा विधानसभा चुनाव कराने की मांग की है, जहां विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के बाद चुनाव हुए और भाजपा ने जीत दर्ज की। ममता बनर्जी ने पश्चिम बंगाल में पुरानी मतदाता सूची के आधार पर दोबारा चुनाव कराने की मांग की।
ममता बनर्जी ने की क्या मांगें?
ममता ने कहा कि विपक्षी दलों के इंडिया गुट के सहयोगी जल्द ही बैठक करेंगे। ममता बनर्जी ने कहा कि जब तक ज्ञानेश कुमार मुख्य चुनाव आयुक्त बने रहेंगे, तब तक पूरे देश में विरोध प्रदर्शन किए जाएंगे। ममता बनर्जी ने कहा कि एक खबर में दावा किया गया है कि दो चुनाव आयुक्तों ने देशभर में लागू किए जा रहे एसआईआर को लेकर कई मुद्दे उठाए थे।
#WATCH | Former West Bengal CM Mamata Banerjee reacts to Indian Express report on 2 ECs objecting to discrepancies in SIR process.
She says, "This is such a scandalous story. We had never seen this in our lives. This Election Commissioner must be arrested. He has no moral… pic.twitter.com/nExp1JSLxk — ANI (@ANI) September 23, 2026
ममता ने दावा करते हुए कहा कि यह आजादी के लिए एक और लड़ाई है। इस बार लड़ाई ऐसे मुख्य चुनाव आयुक्त और भाजपा से है, जिन्होंने भारत को बर्बाद किया है।
मीडिया रिपोर्ट से शुरू हुआ विवाद
ममता की मांग उस मीडिया रिपोर्ट के बाद सामने आई, जिसमें कहा गया था कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में कम से कम 14 बार चुनाव आयोग के फैसलों और आदेशों पर आपत्ति जताई। इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, दोनों ने कुछ फैसलों और आदेशों के बारे में कहा था कि वे उनकी जानकारी के बिना लिए गए।
रिपोर्ट के सामने आने के बाद चुनाव आयोग ने बुधवार को इसका खंडन किया। आयोग ने कहा कि उसके सभी आदेशों को पूरा कानूनी समर्थन हासिल है और मसौदा तैयार करने के दौरान सदस्यों की ओर से सवाल उठाना सामान्य प्रक्रिया है।
चुनाव आयोग ने आरोपों पर दिया क्या जवाब?
चुनाव आयोग ने कहा कि लिखित टिप्पणियां, सुझाव और आंतरिक जांच एवं संतुलन पारदर्शिता, कानूनी अनुपालन और कामकाज में मजबूती सुनिश्चित करने की नियमित प्रक्रिया का हिस्सा हैं। आयोग ने कहा कि 10 महीने की अवधि में सामने आई कुछ आंतरिक टिप्पणियों को अलग करके देखने से पूरी तस्वीर सामने नहीं आती। आयोग के अनुसार पिछले एक साल में लिए गए उसके सभी फैसले, जिसमें SIR भी शामिल है, पूर्ण आयोग के सर्वसम्मत फैसलों का परिणाम हैं।
चुनाव आयोग के बचाव में क्या बोली भाजपा?
भाजपा सांसद संबित पात्रा ने चुनाव आयुक्तों के बीच हुई बातचीत को चुनाव आयोग के भीतर आधिकारिक विचार-विमर्श बताया। उन्होंने कहा कि इस तरह की चर्चा स्वस्थ लोकतंत्र का संकेत है। पात्रा ने कांग्रेस पर चुनाव हारने के बाद सांविधानिक संस्थाओं को निशाना बनाने का आरोप लगाया।
अभिषेक बनर्जी ने लगाए क्या आरोप?
वहीं, मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर तीखा हमला करते हुए टीएमसी सांसद अभिषेक बनर्जी ने आरोप लगाया कि पश्चिम बंगाल में भाजपा को फायदा पहुंचाने के लिए मतदाता सूची से 30 लाख नाम जानबूझकर हटाए गए। उन्होंने यह दावा चुनाव आयोग के चयन पैनल को लेकर सुप्रीम कोर्ट के विभाजित फैसले का हवाला देते हुए किया।
टीएमसी के राष्ट्रीय महासचिव ने आरोप लगाया कि हरियाणा और बिहार में भी इसी तरह मतदाता सूची में हेरफेर किया गया। उन्होंने केंद्र सरकार के इशारे पर काम करने का आरोप लगाते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ लुक आउट सर्कुलर यानी एलओसी जारी करने और उन्हें तत्काल गिरफ्तार करने की मांग की।
अभिषेक बनर्जी ने कहा, "हमने पहले जो आरोप लगाए थे, आज दूसरे चुनाव आयुक्तों ने भी उन्हीं बातों को दोहराया है। जिस तरह एक राजनीतिक दल को फायदा पहुंचाने के लिए 30 लाख लोगों के नाम मतदाता सूची से हटाए गए, उसी तरह हरियाणा और बिहार में भी किया गया।"
विपक्षी दलों ने लगाए क्या आरोप?
इस पूरे विवाद के बाद विपक्षी दलों ने चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ अपना हमला तेज कर दिया है। कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने कथित वोट चोरी को भारतीय लोगों के खिलाफ अपराध और संविधान पर सीधा हमला बताया।
राहुल गांधी ने एक सोशल मीडिया पोस्ट में भाजपा, आरएसएस और चुनाव आयोग पर गंभीर आरोप लगाए और कहा कि न्याय किया जाएगा।
आम आदमी पार्टी प्रमुख अरविंद केजरीवाल, शिवसेना उद्धव ठाकरे गुट के प्रमुख उद्धव ठाकरे, टीएमसी सांसद अभिषेक बनर्जी, माकपा सांसद जॉन ब्रिटास और सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने भी चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त को लेकर सवाल उठाए हैं। विपक्षी दलों ने संयुक्त रूप से मुख्य चुनाव आयुक्त को पद से हटाने की मांग की है। उनका आरोप है कि चुनाव आयोग चुनाव प्रक्रिया को अपने नियंत्रण में लेने की कोशिश कर रहा है।