Maharashtra New Govt: '26 नवंबर से पहले सरकार गठन संवैधानिक रूप से अनिवार्य नहीं'; सूत्रों ने किया बड़ा दावा
महाराष्ट्र में महायुति को प्रचंड बहुमत मिला है। विधानसभा चुनाव के नतीजों की घोषणा के बाद अब सरकार गठन की कवायद हो रही है। खबरों के मुताबिक 26 नवंबर से पहले सरकार बनाना जरूरी है। हालांकि, इस सवाल के संवैधानिक पहलू पर सूत्रों ने कहा कि 26 नवंबर से पहले सरकार गठन अनिवार्य नहीं है।
विस्तार
उदाहरण के लिए 10वीं विधानसभा का कार्यकाल 19 अक्टूबर 2004 को खत्म हुआ था, लेकिन 11वीं विधानसभा के नए मुख्यमंत्री ने 1 नवंबर 2004 को शपथ ली थी। इसी तरह, 11वीं विधानसभा का कार्यकाल 3 नवंबर 2009 को समाप्त हुआ था लेकिन 12वीं विधानसभा के मुख्यमंत्री ने 7 नवंबर 2009 को शपथ ली।
पिछले समय का तर्क
सूत्रों ने आगे उदाहरण देते हुए कहा कि 12वीं विधानसभा का कार्यकाल 8 नवंबर 2014 को खत्म हुआ था। फिर भी 13वीं विधानसभा के नए मुख्यमंत्री का शपथ ग्रहण 31 अक्टूबर 2014 को हुआ। 13वीं विधानसभा का कार्यकाल 9 नवंबर 2019 को खत्म हुआ और 14वीं विधानसभा के नए मुख्यमंत्री का शपथ ग्रहण 28 नवंबर 2014 को हुआ। शायद इसी कारण राज्य में सरकार बनाने में थोड़ा समय लग रहा है।
शरद पवार की राजनीतिक कॅरिअर की सबसे बड़ी हार
84 साल की उम्र में शरद पवार राजनीति की सबसे बड़ी शिकस्त खा गए। हालत इतनी खराब रही कि उनकी पार्टी को मिली सीटें अन्य के खाते में गई सीटों के करीब पहुंच गईं। एनसीपी (शरद पवार) को 10 और अन्य के खाते में 08 सीटें रहीं। वहीं, अजीत गुट ने राज्य में सिर्फ 59 सीटों पर प्रत्याशी उतारे और 41 पर जीत हासिल की।
नेता प्रतिपक्ष पद के लायक विधायक भी नहीं...
एमवीए की हालत इतनी खराब है कि इसके घटक दलों में से कोई भी विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष के पद पर दावा नहीं कर सकता। नेता प्रतिपक्ष के पद के लिए विपक्ष की सबसे बड़ी पार्टी के पास कम से कम 29 विधायक होना चाहिए। इस बार विपक्ष में सबसे बड़ी पार्टी शिवसेना (यूबीटी) के पास सिर्फ 20 विधायक हैं।
पांच दशक में पहली बार नेता विपक्ष नहीं
महाराष्ट्र में विपक्ष की कोई पार्टी 28-29 के आंकड़े तक नहीं पहुंची। इससे विपक्षी गठबंधन महाविकास आघाड़ी को विपक्ष का नेता पद मिलना भी मुश्किल दिखाई दे रहा है। ऐसा हुआ तो पांच दशक में पहली बार महाराष्ट्र विधानसभा नेता प्रतिपक्ष विहीन रहेगी। शिवसेना (उद्धव) ने सर्वाधिक 20 सीटें जीती है। कांग्रेस 16 और शरद पवार की एनसीपी 10 सीटों पर ही सिमट गई है। जरूरी मानक तक न पहुंचने के कारण आघाड़ी का कोई दल नेता विपक्ष पद पर दावा नहीं कर सकता।
- 1972 में महाराष्ट्र में कांग्रेस 270 सीटों में से 222 सीटों पर जीती थी। तब दिनकर बालू पाटील नेता विपक्ष बने थे। तब 7 सदस्यों वाली भारतीय किसान श्रमिक पार्टी विपक्ष में सबसे बड़ा दल था।
- लोकसभा चुनाव 2014 में कांग्रेस सबसे बड़ी विपक्षी पार्टी थी, लेकिन सांसदों की संख्या कुल सदस्यों की संख्या का 10 प्रतिशत नहीं था। इसके चलते लोकसभा में कोई विपक्ष का नेता नहीं था।