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कोरोना से जंग: महाराष्ट्र की मंत्री यशोमति ने अमरावती में अपनाए गए तरीके को बताया प्रभावी

Mon, 12 Apr 2021 05:19 PM IST
गौरव पाण्डेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अमरावती
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अमरावती Published by: गौरव पाण्डेय Updated Mon, 12 Apr 2021 05:19 PM IST
सार

महाराष्ट्र सरकार में महिला एवं बाल विकास मंत्री यशोमति ठाकुर ने कहा कि कोरोना वायरस के खिलाफ जंग में अमरावती में जिस तरह ते कदम उठाए गए, उनके चलते 13 दिनों में नए मामलों की संख्या को करीब 1000 के मुकाबले 300 तक लाने में सफलता मिली।

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Maharashtra Minister Yashoamati Thakur praised Amravati Pattern to tackle coronavirus crisis
महाराष्ट्र की मंत्री यशोमति ठाकुर - फोटो : facebook.com/AdvYashomatiINC

विस्तार

महाराष्ट्र में कोरोना वायरस संक्रमण के मामले बढ़ने के बीच फरवरी के अंतिम सप्ताह के दौरान अमरावती में जनता कर्फ्यू की तर्ज पर लॉकडाउन लागू करने के निर्णय से इस जिले में अन्य जिलों के मुकाबले हालात काबू करना ज्यादा आसान साबित हुआ। जिले की प्रभारी मंत्री यशोमति ठाकुर ने सोमवार को यह बात कही।

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राज्य सरकार में महिला एवं बाल विकास मंत्री ठाकुर ने कहा कि शुरुआत में ही 'अमरावती पैटर्न' को राज्यभर में लागू किया जाता तो महाराष्ट्र में परिस्थितियां वर्तमान से काफी अलग होतीं। उन्होंने कहा कि जब फरवरी में 1000-1200 मामले तेजी से सामने आने लगे, तब व्यापक प्रतिबंध लागू करने का ठोस निर्णय लिया गया।
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यशोमति ठाकुर ने दावा किया, 'विपक्ष की आलोचना के बावजूद हमने 26 फरवरी को लॉकडाउन लागू करने का ठोस निर्णय लिया। हमने जनता कर्फ्यू की तर्ज पर सप्ताहांत लॉकडाउन से शुरुआत की। इसके बाद 10-12 दिन हमने संपूर्ण लॉकडाउन लगाया, जिसमें आवश्यक सेवाओं और गतिविधियों को राहत दी गई। '
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मंत्री ने कहा कि संक्रमण की दूसरी लहर की आशंका के बीच अमरावती ऐसा पहला जिला था, जहां ऐसा कदम उठाया गया। उन्होंने कहा कि धीरे-धीरे हालात सामान्य होने के बाद दुकानों को शाम पांच बजे तक खोलने की अनुमति दी गई और जिले में प्रतिदिन पांच हजार लोगों का टीकाकरण करने जैसे कदम उठाए गए।

'महाराष्ट्र के जिलों में कोविड-19 की रोकथाम के उपाय मानक से कम'

कोरोना वायरस संक्रमण से निपटने में समन्वय के लिए महाराष्ट्र भेजे गए केंद्रीय दल ने पाया है कि सतारा, सांगली और औरंगाबाद जिले में रोकथाम उपाय मानक से कम हैं। केंद्र की ओक से राज्य सरकार को भेजी गई एक रिपोर्ट में यह जानकारी दी गई है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से भेजी गई इस रिपोर्ट में कहा गया है कि दल ने पाया है कि नियंत्रण के लिए संतोषजनक कदम नहीं उठाए जा रहे और निगरानी उपायों में कमी भी देखने को मिली।

रिपोर्ट में कहा गया, ‘कम कार्यबल के कारण बुलढाना, सतारा, औरंगाबाद और नांदेड़ में निगरानी और संपर्क में आए लोगों का पता लगाने का काम भी मानक से कम है। भंडारा गए दल ने कहा है कि ज्यादातर मामले निषिद्ध क्षेत्रों से बाहर से आ रहे हैं।’ महाराष्ट्र के प्रधान सचिव (स्वास्थ्य) प्रदीप व्यास को संबोधित इस रिपोर्ट में कहा गया है कि मंत्रालय महामारी से निपटने की तैयारी और कदमों को लेकर समन्वय कर रहा है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि केंद्र ने महाराष्ट्र के 30 सबसे प्रभावित जिलों के लिए केंद्रीय दल भेजे हैं और ये दल कोविड-19 के प्रसार के कारणों को समझने के लिए जिला प्रशासन के साथ मिलकर काम कर रहे हैं।

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