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Maharashtra Election Results: ठाकरे बंधुओं का आखिरी किला भी ढहा, फडणवीस के सिर बंधा जीत का सेहरा
Sat, 17 Jan 2026 04:43 AM IST
निर्मल कांत
सुरेन्द्र मिश्र, मुंबई।
सुरेन्द्र मिश्र, मुंबई।
Published by: निर्मल कांत
Updated Sat, 17 Jan 2026 04:43 AM IST
सार
Maharashtra Election Results: बीएमसी में भाजपा की जीत इसलिए अहम मानी जा रही है क्योंकि इससे यहां 28 साल से चली आ रही ठाकरे परिवार की पकड़ खत्म हो गई है और देश की सबसे अमीर नगर निकाय की कमान अब भाजपा के हाथ में आ गई है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के नेतृत्व और 'ट्रिपल इंजन सरकार' के दावे को मुंबईकरों का समर्थन मिला है।
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महाराष्ट्र निकाय चुनाव में जीत के बाद नागपुर में सीएम फडणवीस का स्वागत
- फोटो : एक्स/देवेंद्र फडणवीस
विस्तार
पिछले पांच वर्षों में महाराष्ट्र की राजनीति ने कई करवट बदली है। 2019 के चुनाव में शिवसेना (अविभाजित) प्रमुख उद्धव ठाकरे से मात खाने के बाद देवेन्द्र फडणवीस ने कहा था, मेरा पानी उतरता देख किनारे पर घर मत बसा लेना, मैं समंदर हूं लौटकर आऊंगा। फडणवीस न सिर्फ लौटकर आए बल्कि मुख्यमंत्री भी बने। बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) की जीत का सेहरा भी देवेन्द्र फडणवीस (देवा भाऊ) के सिर बंधा है। मुंबई की जीत फडणवीस की तरफ से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह को नए साल का उपहार माना जा रहा है।
भाजपा का मिशन मुंबई सफल होने से बीएमसी के चुनाव में ठाकरे ब्रांड का आखिरी किला भी ढह गया। इसके साथ ही, मुंबई में ठाकरे परिवार का तीन दशक का वर्चस्व भी खत्म हो गया। वित्तीय वर्ष 2025-26 में बीएमसी का वार्षिक बजट 74,427 करोड़ रुपए है जो देश के कई राज्यों से भी अधिक है। बीते 28 साल से बीएमसी के तिजोरी की चाबी ठाकरे परिवार के पास थी जो अब भाजपा के हाथ में जाने वाली है। इससे अब भाजपा देश की आर्थिक राजधानी मुंबई में राजनीतिक तौर पर एक नई शक्ति के रूप में उभरेगी। वर्ष 2017 के चुनाव में अविभाजित शिवसेना ने 84 तो भाजपा ने 82 सीटों पर जीत हासिल की थी लेकिन महापौर उद्धव ठाकरे की पार्टी का बना था। इस बार अपना महापौर बनाकर भाजपा उद्धव से अपना बदला भी पूरा कर लेगी। महाराष्ट्र में मुख्यमंत्री के तौर पर फडणवीस का यह तीसरा कार्यकाल है। जिस तरह दूसरे नेताओं पर भ्रष्टाचार के आरोप लगते हैं उस तरह देवा भाऊ पर नहीं लगे। देवा भाऊ की छवि साफ सुथरे नेता की है। मुंबईकरों को यह पता था कि बीएमसी में बहुत बड़ा भ्रष्टाचार है।
ये भी पढ़ें: महाराष्ट्र नगर निकाय चुनाव : 29 में से 23 महानगरपालिकाओं में लहराया भगवा, मुंबई में ठाकरे की बादशाहत खत्म
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साथ ही, केंद्र और राज्य में भाजपा की सरकार है। देवेंद्र फडणवीस खुद मुख्यमंत्री हैं, इसलिए अगर मुंबई में भी भाजपा की सत्ता आती है, तो विकास को और बढ़ावा मिलेगा। खुद फडणवीस ने भ्रष्टाचार मुक्त और ट्रिपल इंजन की सरकार बनाने के लिए वोट मांगा था जिसका प्रतिसाद चुनाव नतीजे में दिखाई दिया है।
पूर्व गैंगस्टर गवली की दोनों बेटियां हारीं
गैंगस्टर से नेता बने अरुण गवली के लिए बीएमसी चुनाव बुरा सपना साबित हुए। शुक्रवार को आए नतीजों में उसकी दोनों बेटियां गीता और योगिता को हार का सामना करना पड़ा। गीता भायखला-अगिपाड़ा इलाके के वार्ड 212 से चौथी बार चुने जाने के लिए मैदान में थी लेकिन इस बारे उन्हें सपा के उम्मीदवार से हार मिली। वहीं योगिता पहली बार भायखला-चिंचपोकली क्षेत्र के वार्ड 207 से उतरी थीं और भाजपा के रोहिदास लोखंडे से हार गईं। यही नहीं गवली की भाभी वंदना प्रदीप गवली शिवसेना के टिकट पर वार्ड 198 से चुनाव लड़ रही थीं लेकिन उन्हें शिवसेना यूबीटी के अबोली गोपाल ने हराया।
चाचा-भतीजा का गठजोड़ भी नहीं आया काम
पुणे। बीएमसी चुनाव में जब भाजपा और शिवसेना (शिंदे) ने अजित पवार की राकांपा को गठबंधन में भाव नहीं दिया तो उन्होंने पुणे और पिंपली चिंचवाड़ नगर निगमों के लिए अपने चाचा शरद पवार की राकांपा से हाथ मिला लिया। यहां तक कि दोनों धड़ों ने खुलकर एकीकरण की बातें भी कीं। बारामती के बाद पुणे हमेशा से शरद पवार और अजित पवार का गढ़ माना जाता रहा है। इसलिए जब चाचा-भतीजा एक साथ आए तो लगा कि यहां वे बढ़िया प्रदर्शन करेंगे। हालांकि शुक्रवार को आए नतीजों ने बता दिया कि उनका यह दांव काम नहीं आया। पुणे के 165 वार्डों में दोनों मिलकर सिर्फ 24 सीटें जीत पाए जबकि भाजपा अकेले 123 सीटें जीती। वहीं पिंपली चिंचवाड़ में राकांपा-अजित पवार को 128 सदस्यीय निकाय में 37 सीटें मिली लेकिन शरद पवार की पार्टी का खाता तक नहीं खुला। यहां भाजपा ने अकेले 84 सीटें जीती। चूंकि अजित पवार महायुति सरकार में उपमुख्यमंत्री हैं इसलिए इसकी संभावना तो कम है कि भाजपा फिलहाल उन्हें बाहर का रास्ता दिखाएगी। लेकिन इतना तय है कि अजित पवार को महायुति में अब दबकर ही रहना होगा।
ये भी पढ़ें: BMC चुनाव परिणाम: देश के सबसे अमीर नगर निगम पर भाजपा-शिवसेना गठबंधन का कब्जा; किस पार्टी को कितनी सीटें मिलीं?
महाराष्ट्र ने विपक्ष को मुंहतोड़ जवाब दे दिया : भाजपा
भाजपा ने बीएमसी समेत महाराष्ट्र के नगर निकाय चुनाव में भाजपा के नेतृत्व वाले महायुति की बंपर जीत पर खुशी जताई है। जीत को ऐतिहासिक बताते हुए पार्टी सांसद सुधांशु त्रिवेदी ने भाजपा और एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाले शिवसेना गठबंधन को समर्थन देने के लिए महाराष्ट्र की जनता का आभार व्यक्त किया। त्रिवेदी ने कहा, महाराष्ट्र के नगर निगम चुनाव में भाजपा और हमारे गठबंधन सहयोगियों ने एक महत्वपूर्ण जीत हासिल की है। यह दर्शाता है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भाजपा और एनडीए को लगातार समर्थन मिल रहा है। हम बीएमसी में इस सफलता के लिए भाजपा की ओर से महाराष्ट्र की जनता और सभी समर्थकों का आभार व्यक्त करते हैं। त्रिवेदी ने कहा, महाराष्ट्र की जनता ने नकारात्मक राजनीति करने वालों को मुंहतोड़ जवाब दिया है। अब सवाल यह है कि क्या इंडी गठबंधन का अस्तित्व भी बचा है? बंगाल में भी अब टीएमसी और कांग्रेस के एक साथ चुनाव लड़ने की कोई संभावना नहीं है।
उद्धव को मिला मुस्लिम मतों का सहारा
बीएमसी चुनाव में महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) अध्यक्ष राज ठाकरे का साथ होने के बावजूद उद्धव को सत्ता नहीं मिल सकी। 163 सीटों पर चुनाव लड़ने वाली उद्धव ठाकरे की शिवसेना (यूबीटी) को 67 और 53 सीटों पर चुनाव लड़ने वाली मनसे को 10 सीटें ही मिली। हालांकि राज को साधकर उद्धव मराठी मतों का बंटवारा रोकने में काफी हद तक सफल रहे। कई सीटों पर उद्धव को मुस्लिम मतों का सहारा मिला जिससे मुंबई में ठाकरे की पार्टी भाजपा के बाद दूसरे नंबर पर आ गई और यहां एकनाथ शिंदे की शिवसेना को तीसरे नंबर पर धकेल दिया।
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भाजपा का मिशन मुंबई सफल होने से बीएमसी के चुनाव में ठाकरे ब्रांड का आखिरी किला भी ढह गया। इसके साथ ही, मुंबई में ठाकरे परिवार का तीन दशक का वर्चस्व भी खत्म हो गया। वित्तीय वर्ष 2025-26 में बीएमसी का वार्षिक बजट 74,427 करोड़ रुपए है जो देश के कई राज्यों से भी अधिक है। बीते 28 साल से बीएमसी के तिजोरी की चाबी ठाकरे परिवार के पास थी जो अब भाजपा के हाथ में जाने वाली है। इससे अब भाजपा देश की आर्थिक राजधानी मुंबई में राजनीतिक तौर पर एक नई शक्ति के रूप में उभरेगी। वर्ष 2017 के चुनाव में अविभाजित शिवसेना ने 84 तो भाजपा ने 82 सीटों पर जीत हासिल की थी लेकिन महापौर उद्धव ठाकरे की पार्टी का बना था। इस बार अपना महापौर बनाकर भाजपा उद्धव से अपना बदला भी पूरा कर लेगी। महाराष्ट्र में मुख्यमंत्री के तौर पर फडणवीस का यह तीसरा कार्यकाल है। जिस तरह दूसरे नेताओं पर भ्रष्टाचार के आरोप लगते हैं उस तरह देवा भाऊ पर नहीं लगे। देवा भाऊ की छवि साफ सुथरे नेता की है। मुंबईकरों को यह पता था कि बीएमसी में बहुत बड़ा भ्रष्टाचार है।
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साथ ही, केंद्र और राज्य में भाजपा की सरकार है। देवेंद्र फडणवीस खुद मुख्यमंत्री हैं, इसलिए अगर मुंबई में भी भाजपा की सत्ता आती है, तो विकास को और बढ़ावा मिलेगा। खुद फडणवीस ने भ्रष्टाचार मुक्त और ट्रिपल इंजन की सरकार बनाने के लिए वोट मांगा था जिसका प्रतिसाद चुनाव नतीजे में दिखाई दिया है।
पूर्व गैंगस्टर गवली की दोनों बेटियां हारीं
गैंगस्टर से नेता बने अरुण गवली के लिए बीएमसी चुनाव बुरा सपना साबित हुए। शुक्रवार को आए नतीजों में उसकी दोनों बेटियां गीता और योगिता को हार का सामना करना पड़ा। गीता भायखला-अगिपाड़ा इलाके के वार्ड 212 से चौथी बार चुने जाने के लिए मैदान में थी लेकिन इस बारे उन्हें सपा के उम्मीदवार से हार मिली। वहीं योगिता पहली बार भायखला-चिंचपोकली क्षेत्र के वार्ड 207 से उतरी थीं और भाजपा के रोहिदास लोखंडे से हार गईं। यही नहीं गवली की भाभी वंदना प्रदीप गवली शिवसेना के टिकट पर वार्ड 198 से चुनाव लड़ रही थीं लेकिन उन्हें शिवसेना यूबीटी के अबोली गोपाल ने हराया।
चाचा-भतीजा का गठजोड़ भी नहीं आया काम
पुणे। बीएमसी चुनाव में जब भाजपा और शिवसेना (शिंदे) ने अजित पवार की राकांपा को गठबंधन में भाव नहीं दिया तो उन्होंने पुणे और पिंपली चिंचवाड़ नगर निगमों के लिए अपने चाचा शरद पवार की राकांपा से हाथ मिला लिया। यहां तक कि दोनों धड़ों ने खुलकर एकीकरण की बातें भी कीं। बारामती के बाद पुणे हमेशा से शरद पवार और अजित पवार का गढ़ माना जाता रहा है। इसलिए जब चाचा-भतीजा एक साथ आए तो लगा कि यहां वे बढ़िया प्रदर्शन करेंगे। हालांकि शुक्रवार को आए नतीजों ने बता दिया कि उनका यह दांव काम नहीं आया। पुणे के 165 वार्डों में दोनों मिलकर सिर्फ 24 सीटें जीत पाए जबकि भाजपा अकेले 123 सीटें जीती। वहीं पिंपली चिंचवाड़ में राकांपा-अजित पवार को 128 सदस्यीय निकाय में 37 सीटें मिली लेकिन शरद पवार की पार्टी का खाता तक नहीं खुला। यहां भाजपा ने अकेले 84 सीटें जीती। चूंकि अजित पवार महायुति सरकार में उपमुख्यमंत्री हैं इसलिए इसकी संभावना तो कम है कि भाजपा फिलहाल उन्हें बाहर का रास्ता दिखाएगी। लेकिन इतना तय है कि अजित पवार को महायुति में अब दबकर ही रहना होगा।
ये भी पढ़ें: BMC चुनाव परिणाम: देश के सबसे अमीर नगर निगम पर भाजपा-शिवसेना गठबंधन का कब्जा; किस पार्टी को कितनी सीटें मिलीं?
महाराष्ट्र ने विपक्ष को मुंहतोड़ जवाब दे दिया : भाजपा
भाजपा ने बीएमसी समेत महाराष्ट्र के नगर निकाय चुनाव में भाजपा के नेतृत्व वाले महायुति की बंपर जीत पर खुशी जताई है। जीत को ऐतिहासिक बताते हुए पार्टी सांसद सुधांशु त्रिवेदी ने भाजपा और एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाले शिवसेना गठबंधन को समर्थन देने के लिए महाराष्ट्र की जनता का आभार व्यक्त किया। त्रिवेदी ने कहा, महाराष्ट्र के नगर निगम चुनाव में भाजपा और हमारे गठबंधन सहयोगियों ने एक महत्वपूर्ण जीत हासिल की है। यह दर्शाता है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भाजपा और एनडीए को लगातार समर्थन मिल रहा है। हम बीएमसी में इस सफलता के लिए भाजपा की ओर से महाराष्ट्र की जनता और सभी समर्थकों का आभार व्यक्त करते हैं। त्रिवेदी ने कहा, महाराष्ट्र की जनता ने नकारात्मक राजनीति करने वालों को मुंहतोड़ जवाब दिया है। अब सवाल यह है कि क्या इंडी गठबंधन का अस्तित्व भी बचा है? बंगाल में भी अब टीएमसी और कांग्रेस के एक साथ चुनाव लड़ने की कोई संभावना नहीं है।
उद्धव को मिला मुस्लिम मतों का सहारा
बीएमसी चुनाव में महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) अध्यक्ष राज ठाकरे का साथ होने के बावजूद उद्धव को सत्ता नहीं मिल सकी। 163 सीटों पर चुनाव लड़ने वाली उद्धव ठाकरे की शिवसेना (यूबीटी) को 67 और 53 सीटों पर चुनाव लड़ने वाली मनसे को 10 सीटें ही मिली। हालांकि राज को साधकर उद्धव मराठी मतों का बंटवारा रोकने में काफी हद तक सफल रहे। कई सीटों पर उद्धव को मुस्लिम मतों का सहारा मिला जिससे मुंबई में ठाकरे की पार्टी भाजपा के बाद दूसरे नंबर पर आ गई और यहां एकनाथ शिंदे की शिवसेना को तीसरे नंबर पर धकेल दिया।
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