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Maharashtra: किन्नरों की मदद के लिए आगे आया प्रशासन, नौकरियां देकर बराबरी के अधिकार सुनिश्चित कर रहे अधिकारी
Sat, 23 Jul 2022 01:15 PM IST
सुरेंद्र जोशी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पुणे
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पुणे
Published by: सुरेंद्र जोशी
Updated Sat, 23 Jul 2022 01:15 PM IST
सार
23 साल की किन्नर शाइना रॉय कुछ माह पूर्व तक दुकानों और ट्रैफिक सिग्नलों पर लोगों के आगे हाथ फैलाती थी, लेकिन अब उसने नई जिंदगी शुरू की है। वह अब रोज वर्दी पहनकर पिंपरी चिंचवड़ नगर निगम में अपनी ड्यूटी देने जाती है।
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प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : Amar Ujala
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विस्तार
देशभर में किन्नर लोगों के आगे हाथ फैलाते नजर आते हैं, लेकिन महाराष्ट्र के पुणे के समीप स्थित पिंपरी चिंचवड़ नगर निगम ने उन्हें आत्म निर्भर बनाने के लिए बड़ा फैसला लिया है। नगर निगम ने किन्नरों को सुरक्षा गार्ड और ग्रीन मार्शल की नौकरी दी है।
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23 साल की किन्नर शाइना रॉय कुछ माह पूर्व तक दुकानों और ट्रैफिक सिग्नलों पर लोगों के आगे हाथ फैलाती थी, लेकिन अब उसने नई जिंदगी शुरू की है। वह अब रोज वर्दी पहनकर पिंपरी चिंचवड़ नगर निगम में अपनी ड्यूटी देने जाती है। इसके साथ ही पिंपरी चिंचवड़ महाराष्ट्र और संभवत: पूरे देश में किन्नरों या ट्रांसजेंडरों को रोजगार देने वाला नगर निकाय बन गया है।
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मुख्य धारा में लाने का प्रयास : पाटिल
पिंपरी चिंचवड़ के नगर आयुक्त राजेश पाटिल ने हाल ही में किन्नर समुदाय के सदस्यों को मुख्यधारा में लाने और उन्हें सम्मानजनक जीवन जीने में मदद करने का निर्णय लिया। पाटिल ने कहा कि सभी जानते हैं कि ट्रांसजेंडर समुदाय बहुत सारी समस्याओं का सामना करता है और दुर्व्यवहार और शोषण का शिकार होता है।
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उन्हें मुख्यधारा में लाने और सम्मानजनक जीवन प्रदान करने के लिए, हमने कुछ उपाय किए हैं। हमने नगर निगम में 30 से 35 किन्नरों की भर्ती की है। इनमें से कुछ को ग्रीन मार्शल बनाया है। ये स्वच्छता अभियान में सहयोग करेंगे। वहीं, अन्य को नगरीय निकाय में सुरक्षा गार्ड बनाया है, जबकि कुछ अन्य को शहर के बगीचों की साज संभाल का जिम्मा दिया गया है।
एक जुलाई से दी गई नौकरी
पाटिल ने बतया कि किन्नरों को एक जुलाई को भर्ती किया गया था और अब तक वे अच्छा काम कर रहे हैं। उम्मीद है कि यह अवसर निश्चित रूप से उन्हें अपनी पहचान बनाने और सम्मान के साथ जीने में मदद करेगा। कुछ किन्नरों को संविदाकर्मी बनाया गया है, उन्हें न्यूनतम मजदूरी मिलेगी, जो उन्हें अन्य सुरक्षा गार्डों और ग्रीन मार्शलों की तरह जीवन जीने में मदद करेगी। नागरिक प्रमुख ने कहा, "हमारी योजना ट्रांसजेंडर समुदाय के सदस्यों को स्वयं सहायता समूह (एसएचजी) बनाने और आजीविका कमाने में मदद करके उन्हें वित्तीय सहायता प्रदान करके उन्हें सशक्त बनाने की भी है। पाटिल ने कुछ भर्ती किए गए ट्रांसजेंडरों को नागरिक निकाय मुख्यालय में अपने केबिन के बाहर सुरक्षा गार्ड के रूप में तैनात किया है।
सड़कों पर कभी भीख नहीं मांगी, ट्रांस-मेन को भी दें नौकरी : रूपा
किन्नर रूपा टकसाल (31) को सुरक्षा गार्ड के रूप में भर्ती किया गया है। उसे नगर निगम आयुक्त कार्यालय के बाहर तैनात किया गया है। रूपा ने बताया कि 'मैंने सड़कों पर कभी भीख नहीं मांगी। यहां भर्ती होने से पहले, मैंने एक एनजीओ में प्रोजेक्ट असिस्टेंट और काउंसलर के रूप में काम किया था। मैंने मित्र क्लिनिक के साथ लॉजिस्टिक्स असिस्टेंट के रूप में भी काम किया था, जो भारत में पहला ट्रांसजेंडर क्लिनिक है। रूपा ने जोर देकर कहा कि ट्रांस-मेन (जो महिला से पुरुष बनते हैं) को भी नौकरी मिलनी चाहिए क्योंकि उन्हें भी आजीविका के लिए बहुत सारे मुद्दों का सामना करना पड़ता है।