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सतारा में सब पर भारी शिवाजी महाराज की शिवशाही, 13वीं पीढ़ी के उदयन भोसले से भाजपा को उम्मीद
Thu, 17 Oct 2019 01:28 PM IST
Harendra Chaudhary
विनोद अग्निहोत्री, अमर उजाला, सतारा
विनोद अग्निहोत्री, अमर उजाला, सतारा
Published by: Harendra Chaudhary
Updated Thu, 17 Oct 2019 01:28 PM IST
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Udyan Raje Bhosle Satara
- फोटो : AmarUjala
पूरे महाराष्ट्र और देश में भले ही लोकशाही हो, लेकिन शिवाजी महाराज की नगरी सतारा में आज भी शिवशाही ही चलती है। इसलिए यहां चुनावी हवा उधर ही बहती है, जिधर छत्रपति शिवाजी महाराज के वंशज चल देते हैं। लंबे समय से शिवाजी के वंशज और सतारा के महाराज उदयन राजे भोसले राष्ट्रवादी कांग्रेस का झंडा संभाले हुए थे, तो सतारा में एनसीपी का बोलबाला रहता था, लेकिन इस बार महाराज उदयन राजे ने भाजपा के कमल को थाम लिया है।
इसलिए भाजपा नेता दावा करते हैं कि सतारा भी कमलमय है। भाजपा को उम्मीद है कि शरद पवार और एनसीपी का गढ़ रहे सतारा में इस बार लोकसभा उपचुनाव के साथ-साथ विधानसभा चुनावों में भी उदयन राजे भोंसले की वजह से पार्टी को भारी सफलता मिलेगी।
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शिवाजी की 13वीं पीढ़ी के वारिस मौजूदा महाराज उदयन राजे भोसले लगातार तीन बार यहां से लोकसभा के लिए चुने गए। 2014 और 2019 के लोकसभा चुनावों में राष्ट्र और महाराष्ट्र में भले ही मोदी की आंधी चली हो लेकिन सतारा में शिवशाही का झंडा बुलंद रहा और उदयन राजे चुनाव जीते।
भोसले कहते हैं कि उन्होंने एनसीपी-कांग्रेस को को बहुत मौका दिया कि क्षेत्र के विकास के कामों को आगे बढ़ाए, लेकिन 15 साल के कांग्रेस एनसीपी राज में कुछ भी नहीं हुआ, जबकि वह बराबर इसके लिए आवाज उठाते रहे। लेकिन पिछले पांच सालों में जब केंद्र और राज्य में भाजपा सरकार आई, उनकी हर बात सुनी गई और विकास के काफी काम हुए। इसलिए उन्होंने एनसीपी छोड़ने और भाजपा में शामिल होना तय किया।
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इसलिए भाजपा नेता दावा करते हैं कि सतारा भी कमलमय है। भाजपा को उम्मीद है कि शरद पवार और एनसीपी का गढ़ रहे सतारा में इस बार लोकसभा उपचुनाव के साथ-साथ विधानसभा चुनावों में भी उदयन राजे भोंसले की वजह से पार्टी को भारी सफलता मिलेगी।
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आहत हैं शरद पवार
लेकिन एनसीपी अध्यक्ष और मराठा छत्रप शरद पवार सतारा के राजघराने और शिवाजी की विरासत के भाजपा में चले जाने से बेहद आहत हैं। 2019 के लोकसभा चुनाव में एनसीपी के अनेक स्थानीय नेताओं के विरोध को दरकिनार करते हुए पवार ने फिर से उदयन राजे भोसले को पार्टी उम्मीदवार बनाया और वह जीते भी। लेकिन जीत के महज तीन महीने बाद ही भोसले ने एनसीपी को छोड़कर भाजपा का झंडा उठा लिया, जिसे पवार पचा नहीं पा रहे हैं।
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शिवाजी महाराज का पसंद था सतारा
पुणे से करीब 150 किलोमीटर दूर खूबसूरत पहाड़ियों के बीच और झीलों के किनारे बसे इस शहर को शिवाजी महाराज ने अपना निवास बनाया था। मराठा साम्राज्य की स्थापना के बाद शिवाजी ने अपनी राजधानी तो रायगढ़ को बनाया, लेकिन रहने के लिए उन्हें सतारा ही पसंद था। रायगढ़ से शिवाजी राजकाज चलाते थे, लेकिन आराम के लिए सतारा आ जाते थे। शिवाजी के बाद उनके वंशजों ने सतारा को ही अपना स्थाई ठिकाना बना लिया था। तब से ही महाराष्ट्र की मराठा राजनीति में सतारा की अपनी खास जगह है।शिवाजी की 13वीं पीढ़ी के वारिस मौजूदा महाराज उदयन राजे भोसले लगातार तीन बार यहां से लोकसभा के लिए चुने गए। 2014 और 2019 के लोकसभा चुनावों में राष्ट्र और महाराष्ट्र में भले ही मोदी की आंधी चली हो लेकिन सतारा में शिवशाही का झंडा बुलंद रहा और उदयन राजे चुनाव जीते।
कांग्रेस-एनसीपी राज में नहीं हुआ सतारा का भला
लेकिन विधानसभा चुनावों से महज कुछ दिन पहले ही अचानक उदयन राजे का मन बदला और उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की रैली में भाजपा में शामिल होने की घोषणा की और लोकसभा से भी इस्तीफा दे दिया। महाराज के पाला बदलते ही सतारा का रंग भी बदल गया। सतारा में उदयन राजे भोसले से मुलाकात होती है। लोकसभा का उपचुनाव भाजपा उम्मीदवार के तौर पर लड़ रहे भोसले कहते हैं कि उन्हें किसी दल या किसी नेता से कोई मतलब नहीं है। उन्हें सिर्फ सतारा की जनता और इस इलाके के कल्याण और हितों से ही मतलब है।भोसले कहते हैं कि उन्होंने एनसीपी-कांग्रेस को को बहुत मौका दिया कि क्षेत्र के विकास के कामों को आगे बढ़ाए, लेकिन 15 साल के कांग्रेस एनसीपी राज में कुछ भी नहीं हुआ, जबकि वह बराबर इसके लिए आवाज उठाते रहे। लेकिन पिछले पांच सालों में जब केंद्र और राज्य में भाजपा सरकार आई, उनकी हर बात सुनी गई और विकास के काफी काम हुए। इसलिए उन्होंने एनसीपी छोड़ने और भाजपा में शामिल होना तय किया।