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अमरावती NICU अग्निकांड: तीन नवजात बच्चों की मौत; CM फडणवीस ने दिए जांच के आदेश, परिजनों को पांच लाख की मदद

Mon, 24 Aug 2026 07:49 AM IST
शिवम गर्ग आईएएनएस, मुंबई।
आईएएनएस, मुंबई। Published by: शिवम गर्ग Updated Mon, 24 Aug 2026 07:49 AM IST
सार

अमरावती जिला महिला अस्पताल के NICU में तड़के आग लगने से तीन नवजातों की मौत हो गई। हादसे के वक्त 39 बच्चों का इलाज चल रहा था। वेंटिलेटर में धमाके के बाद आग लगने की बात सामने आई है। छह नवजातों को सुपर-स्पेशियलिटी अस्पताल भेजा गया।

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Maharashtra Amravati Hospital Fire: Several Newborns Die in NICU Blaze, Many Shifted Updates Hindi
अमरावती अस्पताल हादसा - फोटो : Amar Ujala Graphics

विस्तार

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महाराष्ट्र के अमरावती स्थित जिला महिला अस्पताल के नवजात शिशु गहन चिकित्सा कक्ष (एनआईसीयू) में सोमवार तड़के आग लगने से तीन नवजातों की मौत हो गई। हादसे के दौरान अस्पताल के डॉक्टरों, नर्सों और कर्मचारियों ने तत्परता दिखाते हुए कई बच्चों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया।

सुबह करीब साढ़े तीन बजे हुआ हादसा

अधिकारियों के मुताबिक, सोमवार तड़के करीब 3:15 बजे जिला महिला अस्पताल की तीसरी मंजिल स्थित नवजात गहन चिकित्सा कक्ष में आग लगी। शुरुआती जानकारी में एक वेंटिलेटर में स्पार्क होने के बाद आग भड़कने की बात सामने आई है। बताया गया कि आग अस्पताल के उस हिस्से में लगी, जहां बाहर से लाए गए नवजात बच्चों को रखा गया था। घटना के बाद छह बच्चों को इलाज के लिए सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल में भेजा गया।

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NICU में भर्ती थे 39 नवजात

घटना के समय एनआईसीयू में कुल 39 नवजातों का इलाज चल रहा था। आग और धुआं फैलते ही ड्यूटी पर तैनात डॉक्टर, नर्स और अन्य अस्पताल कर्मचारियों ने तुरंत बच्चों को वार्ड से बाहर निकालना शुरू कर दिया। अस्पताल स्टाफ ने अधिकांश नवजातों को सुरक्षित बाहर निकालकर उन्हें आग और धुएं से दूर पहुंचाया। हालांकि, हादसे में तीन नवजात गंभीर रूप से झुलस गए और बाद में उनकी मौत हो गई।

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छह नवजातों को सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल भेजा

बचाए गए बच्चों में से छह नवजातों को आगे की चिकित्सा निगरानी और इलाज के लिए सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल में भर्ती कराया गया है। उनकी हालत को देखते हुए उन्हें वहां बेहतर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है। एनआईसीयू में लगी आग के कारण कई मेडिकल उपकरण और अन्य सामान जलकर राख हो गए। काफी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया गया। राहत की बात यह रही कि आग अस्पताल के दूसरे कक्षों तक नहीं फैल सकी।

स्वास्थ्य मंत्री बोले- बचाने की हरसंभव कोशिश की

स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री प्रकाशराव अबितकर ने घटना पर दुख जताते हुए कहा कि अस्पताल के कर्मचारियों ने बच्चों को बचाने के लिए हरसंभव प्रयास किया। मंत्री ने कहा कि अस्पताल के स्टाफ ने नवजातों को वेंटिलेटर सपोर्ट दिया और उन्हें बचाने की पूरी कोशिश की, लेकिन दुर्भाग्य से तीन बच्चों की जान नहीं बचाई जा सकी।

बच्चे के पिता ने सुनाई घटना की आपबीती

अस्पताल में भर्ती एक नवजात के पिता ने घटना का जिक्र करते हुए बताया कि सुबह करीब 3:30 से 4 बजे के बीच अचानक जोरदार धमाके जैसी आवाज सुनाई दी। उस समय उनकी पत्नी ICU में थीं। धमाके के बाद उन्होंने अंदर जाकर आग देखी और नर्सों को इसकी जानकारी दी। पिता के अनुसार, जब वह ऊपर पहुंचे तो आग तेजी से फैल रही थी। उन्होंने दावा किया कि कुछ बच्चे वेंटिलेटर और इनक्यूबेटर में फंसे हुए थे। आग बढ़ने के कारण उन्हें बाहर निकालना बेहद मुश्किल हो गया था। उन्होंने बताया कि दमकल की टीम भी मौके पर पहुंची, लेकिन उनके अनुसार आग बुझाने की कार्रवाई में देरी हुई। इसके बाद हालात और गंभीर हो गए और बच्चों की स्थिति को लेकर परिजनों में अफरातफरी मच गई।

परिजनों ने जांच और सुरक्षा व्यवस्था की मांग की

मृत नवजातों के परिजनों ने प्रशासन से घटना की विस्तृत जांच कराने की मांग की है। एक बच्चे के पिता ने कहा कि जिन बच्चों को निजी अस्पतालों में इलाज के लिए भेजा गया है, उनके इलाज का खर्च सरकार को उठाना चाहिए और उन्हें बेहतर चिकित्सा सुविधा मिलनी चाहिए। उन्होंने अस्पताल की इमारत और बिजली व्यवस्था की दोबारा जांच कराने की भी मांग की। साथ ही यह पता लगाने की मांग की कि दमकल विभाग ने आग पर काबू पाने की कार्रवाई कब शुरू की।

आग की वजह अभी पूरी तरह स्पष्ट नहीं

अधिकारियों के मुताबिक आग लगने के कारणों की अभी अंतिम पुष्टि नहीं हुई है। शुरुआती जानकारी में वेंटिलेटर से जुड़े संभावित इलेक्ट्रिकल फॉल्ट की बात सामने आई है। हालांकि, आग कैसे लगी और घटनाक्रम किस तरह आगे बढ़ा, इसका स्पष्ट पता जांच पूरी होने के बाद ही चलेगा।

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