ट्रेन की आग में उपकरण जलने के बाद भी तीरंदाजों ने नहीं मानी हार, पदक जीतकर बढ़ाया मध्यप्रदेश का मान
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नई दिल्ली-देहरादून शताब्दी एक्सप्रेस के जलते हुए कोच से बच निकलने के बाद मध्य प्रदेश की तीरंदाजी टीम ने रविवार को देहरादून में 41 वीं जूनियर राष्ट्रीय चैंपियनशिप में तीन पदक हासिल किए। दरअसल, दिल्ली से देहरादून जा रही दिल्ली-देहरादून शताब्दी एक्सप्रेस की एक बोगी में रविवार को आग लग गई थी। इस ट्रेन में राष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी भी बैठे थे। ट्रेन की बोगी के जलने के साथ ही उनके दून में राष्ट्रीय प्रतियोगिता में शामिल होने के अरमान भी जल गए थे क्योंकि आग लगने से ट्रेन में रखा उनका तीरंदाजी का सारा सामान भी जल गया था।
हालांकि, इस घटना के बाद भी पदक विजेता अमित कुमार और सोनिया ठाकुर का शानदार प्रदर्शन देख हर कोई हैरान है। इस हादसे के बाद वे निराश हो गए थे, लेकिन उनकी काउंसलिंग की गई और आपातकालीन आधार पर तीरंदाजी का सामान मुहैया कराया गया। तीरंदाजों की इस जीत के बाद मध्यप्रदेश की खेल मंत्री यशोधरा राजे सिंधिया ने कहा, ‘मैंने तीरंदाजों से ट्रेन में लगी आग की घटना को लेकर कहा था कि यह हादसा जीवन में आने वाली कई चुनौतियों में से एक था और आपको इससे उबरने के लिए मजबूत होना चाहिए।’
उन्होंने आगे कहा कि कल की शताब्दी दुर्घटना में अपना सारा तीरंदाजी का सामान खोने के बावजूद हमारे मध्यप्रदेश के तीरंदाजों का जाबांज प्रदर्शन वास्तव में गौरवपूर्ण है। राष्ट्रीय जूनियर तीरंदाजी प्रतियोगिता में सोनिया ठाकुर और अमित कुमार ने अपने हौसलों से मैडल जीतकर हम सबका मांन बढ़ाया है।
कल की शताब्दी दुर्घटना में अपना सारा तीरंदाज़ी का सामान खोने के बावजूद हमारे MP के तीरंदाज़ों का जाबांज प्रदर्शन वास्तव में गौरवपूर्ण है।।
राष्ट्रीय जूनियर तीरंदाजी प्रतियोगिता में सोनिया ठाकुर और अमित कुमार ने अपने होसलो से मैडल जीत कर हम सबका मांन बढ़ाया है।
Well done! pic.twitter.com/QX1Y8VL778 — Yashodhara Raje Scindia (@yashodhararaje) March 14, 2021
गौरतलब है कि टीम के लिए सबसे बड़ी चुनौती इतने कम समय में नए उपकरणों की व्यवस्था करना था। भारतीय तीरंदाजी संघ के कोषाध्यक्ष राजेंद्र सिंह तोमर ने चिंता जताते हुए कहा था कि ट्रेन से आ रहे मध्यप्रदेश के खिलाड़ी सुरक्षित हैं, लेकिन उनका सामान जल गया। अब यह बच्चे प्रतियोगिता में नहीं खेल पाएंगे। एक धनुष की कीमत दो से तीन लाख के बीच होती है। इतने महंगे उपकरण तत्काल खरीदना संभव नहीं है। इसके बाद सिंधिया ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि वह धनुर्धारियों को सभी आवश्यक उपकरण प्रदान करें।
मध्यप्रदेश टीम के कोच रिछपाल सिंह ने कहा, ‘घटना से पहले प्रतियोगिता में केवल एक रात थी। हमें उपकरण मिल गए, लेकिन उन्हें समायोजित किया जाना था क्योंकि यह धनुर्धारियों के लिए नये था। ऐसे में कोचिंग स्टाफ और तीरंदाज पूरी रात बैठकर नए उपकरणों से बच्चों को परिचित कराया।’ वहीं, जीतने वाले तीरंदाजों ने कहा कि वह खुद को साबित करने के लिए दृढ़ थे। 17 वर्षीय जुबिलेंट 10 वीं कक्षा के छात्र अमित ने कहा, ‘हमें बहुत कम नींद आती है। यह साबित करना हमारे कंधों पर एक बड़ी जिम्मेदारी थी कि मध्यप्रदेश के तीरंदाज विषम परिस्थितियों में भी चमत्कार कर सकते हैं। हमने यह कर दिखाया।’
इसके अलावा नौवीं कक्षा की 16 वर्षीय छात्रा सोनिया ने कहा, ‘यह कठिन था क्योंकि हम आग लगने की घटना के कारण बहुत कम सो पाए थे। हालांकि, मैं यह साबित करने के लिए दृढ़ थी कि ऐसी स्थितियों में भी हम पदक जीत सकते हैं।’ लड़कियों की रिकर्व श्रेणी में सोनिया ठाकुर ने 642 अंकों के साथ मध्यप्रदेश को रजत पदक दिलाया। लड़कों के रिकर्व इवेंट में, अमित ने मध्यप्रदेश को कांस्य पदक के लिए 665 अंक दिए। रिकर्व मिश्रित टीम स्पर्धा में सोनिया और अमित की जोड़ी ने राज्य के लिए रजत पदक जीता।
