चंद्रग्रहण: 149 साल बाद बना दुर्लभ संयोग, दुनिया भर में दिखा रोमांच
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मंगलवार की आधी रात से बुधवार की अहले सुबह तक चंद्रग्रहण लगा रहा। 149 वर्षों के बाद ऐसा दुर्लभ संयोग और विशेष योग बन पाया। विशेष योग भी बना है। 12 जुलाई 1870 को भी गुरु पूर्णिमा पर चंद्र ग्रहण लगा था तब उस समय चंद्रमा शनि और केतु के साथ धनु राशि में स्थित था, जबकि सूर्य राहु के साथ मिथुन राशि में था। मंगलवार देर रात करीब 1:31 बजे चंद्रग्रहण लगा, जोकि सुबह 4:29 बजे तक रहा।
इस दौरान पृथ्वी सूर्य और चंद्रमा के बीच रही है और देश के विभिन्न हिस्सों में लोग करीब तीन घंटे तक इस आंशिक चंद्रग्रहण का गवाह बने।
दिल्ली में आंशिक चंद्रग्रहण का नजारा कुछ ऐसा दिखा
Partial #LunarEclipse, as seen in the skies of Delhi. The partial eclipse which began at 1.31 AM, is the last lunar eclipse of 2019. pic.twitter.com/Ff78pThbEG
विज्ञापन विज्ञापन— ANI (@ANI) July 16, 2019
चंद्रग्रहण से पहले कोलकाता के एमपी बिड़ला तारामंडल के शोध एवं अकादमिक निदेशक देबीप्रसाद दुआरी ने पीटीआई को बताया था कि इस आंशिक चंद्रग्रहण का सबसे स्पष्ट रूप सुबह तीन बजे नजर आएगा जब चंद्रमा का ज्यादातर हिस्सा ढक जाएगा और ऐसा हुआ भी।
ओडिशा के भुवनेश्वर में 01:40 बजे ऐसा दिखा नजारा:
Odisha: Partial #LunarEclipse, as seen in the skies of Bhubaneswar. The eclipse can be witnessed in regions of Africa, Asia, Australia, Europe, and South America. This is the last lunar eclipse of 2019. pic.twitter.com/G3aBYlymat
— ANI (@ANI) July 16, 2019
दुआरी के अनुसार, आकाशीय गतिविधियों में दिलचस्पी रखने वालों यह अवसर खास रहा, क्योंकि 2021 तक फिर ऐसा स्पष्ट रूप से दिखने वाला कोई चंद्रग्रहण नहीं लगेगा। उन्होंने बताया कि दक्षिण अमेरिका, यूरोप, अफ्रीका, एशिया और ऑस्ट्रेलिया के सिवाय यह देश के हर हिस्से से नजर आने वाली खगोलीय घटना रही।
महाराष्ट्र में ऐसा दिखा चंद्रग्रहण
Maharashtra: Partial #LunarEclipse, as seen in the skies of Mumbai. pic.twitter.com/N5JZV45HwW
— ANI (@ANI) July 16, 2019
चंद्रमा पर बुधवार सुबह 4:29 बजे तक आंशिक ग्रहण लगा रहा। मंगलवार की रात चंद्रमा का केवल एक हिस्सा धरती की छाया से गुजरा, जबकि बुधवार सुबह 3:01 बजे चंद्रमा का 65 प्रतिशत व्यास धरती की छाया के तहत रहा। देश में अगला चंद्रग्रहण 26 मई, 2021 को लगेगा जब यह पूर्ण चंद्रग्रहण होगा।
सूर्य और चंद्र ग्रहण- वैज्ञानिक नजरिया
विज्ञान के अनुसार पृथ्वी सूर्य की परिक्रमा करती है जबकि चंद्रमा पृथ्वी के चारो ओर घूमती है। पृथ्वी और चंद्रमा घूमते-घूमते एक समय पर ऐसे स्थान पर आ जाते हैं जब सूर्य, पृथ्वी और चंद्रमा तीनो एक सीध में रहते हैं। जब पृथ्वी धूमते-धूमते सूर्य व चंद्रमा के बीच में आ जाती है। चंद्रमा की इस स्थिति में पृथ्वी की ओट में पूरी तरह छिप जाता है और उस पर सूर्य की रोशनी नहीं पड़ पाती है इसे चंद्र ग्रहण कहते है। वहीं जब चंद्रमा सूर्य और पृथ्वी के बीच में आ जाती है और वह सूर्य को ढ़क लेता है तो इसे सूर्य ग्रहण कहते है।
सूतक का समय
चन्द्र ग्रहण होने की स्थिति में ग्रहण प्रारंभ होने से 9 घंटे पहले सूतक होता है। सूतक को अशुभ माना जाता है। 16 जुलाई की शाम को 4:31 शुरू हो जाएगा और ग्रहण के साथ ही खत्म हो जाएगा। शुभ काम सूतक काल से पहले ही कर लेने चाहिए।