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नए सेना प्रमुख: ले. जनरल मनोज पांडे होंगे अगले आर्मी चीफ, यह पद संभालने वाले इंजीनियरिंग कोर के पहले अधिकारी
Mon, 18 Apr 2022 10:00 PM IST
Amit Mandal
एएनआई, नई दिल्ली
एएनआई, नई दिल्ली
Published by: Amit Mandal
Updated Mon, 18 Apr 2022 10:00 PM IST
सार
ले. जनरल मनोज पांडे जनरल एम.एम. नरवणे की जगह लेंगे जो इस महीने के अंत तक सेवानिवृत्त होने वाले हैं।
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Army Vice Chief Lieutenant General Manoj Pande
- फोटो : ANI
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विस्तार
लेफ्टिनेंट जनरल मनोज पांडे अगले सेना प्रमुख होंगे। ले. जनरल पांडे सेना के वर्तमान उप-प्रमुख हैं और वह जनरल एम.एम. नरवणे की जगह लेंगे जो इस महीने के अंत तक सेवानिवृत्त होने वाले हैं। ले. जनरल पांडे सेना प्रमुख बनने वाले कोर ऑफ इंजीनियर्स के पहले अधिकारी होंगे।
सरकारी सूत्रों के मुताबिक, अगला चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (सीडीएस) कौन होगा, इस पर अभी कोई फैसला नहीं लिया गया है। पिछले सीडीएस जनरल बिपिन रावत की पिछले साल दिसंबर में एक हेलिकॉप्टर दुर्घटना में मृत्यु हो जाने के बाद से यह पद खाली पड़ा है।
कोर ऑफ इंजीनियर्स के पहले अधिकारी
ले. जनरल पांडे सेना प्रमुख बनने वाले कोर ऑफ इंजीनियर्स के पहले अधिकारी होंगे। इस पद पर अब तक इन्फैंट्री, आर्मर्ड और आर्टिलरी अधिकारियों का कब्जा रहा है। सूत्रों ने कहा कि लेफ्टिनेंट जनरल पांडे, जो पूर्वी सेना कमांडर रहे हैं और वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) के साथ प्रौद्योगिकी के अधिक एकीकरण के प्रमुख समर्थकों में से एक हैं। वह अपने साथ सेना प्रमुख की कुर्सी पर ऑपरेशनल और रसद दोनों अनुभव लाएंगे।
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एनडीए से हुई शुरुआत
शुरुआती स्कूलिंग के बाद ले. जनरल मनोज पांडे ने नेशनल डिफेंस अकेडमी ज्वाइन की। एनडीए के बाद उन्होंने इंडियन मिलिट्री एकेडमी जॉइन की और बतौर अफसर कमीशन लिया। उन्होंने 3 मई 1987 को सरकारी डेंटल कॉलेज की गोल्ड मेडलिस्ट अर्चना सल्पेकर से शादी की।
यूनाइटेड नेशन्स मिशन में बतौर चीफ इंजीनियर काम किया
ले. जनरल मनोज पांडे को दिसंबर 1982 में बॉम्बे सैपर्स में कमीशन मिला, जो कॉर्प्स ऑफ इंजीनियर्स की एक रेजिमेंट है। वह ब्रिटेन के कैमबर्ले के स्टाफ कॉलेज का भी हिस्सा रहे हैं। कोर्स पूरा होने के बाद वह भारत लौट आए और पूर्वोत्तर भारत की माउंटेन ब्रिगेड के ब्रिगेड मेजर नियुक्त किए गए। लेफ्टिनेंट कर्नल के पद पर पहुंचने के बाद उन्होंने इथियोपिया और इरिट्रिया में यूनाइटेड नेशन्स मिशन में बतौर चीफ इंजीनियर काम किया।
एक संयोग यह भी
इस बीच संयोग की बात यह है कि नए सेना प्रमुख की नियुक्ति के बाद भारतीय सशस्त्र बलों के तीनों सेना प्रमुख खडकवासला में राष्ट्रीय रक्षा अकादमी (एनडीए) के 61वें बैच से होंगे। रक्षा अधिकारियों के मुताबिक, नौसेना प्रमुख एडमिरल हरि कुमार और एयर चीफ मार्शल विवेक राम चौधरी भी उसी एनडीए कोर्स से हैं। लेफ्टिनेंट जनरल पांडे जहां लीमा स्क्वाड्रन से हैं, वहीं दो अन्य प्रमुख एनडीए के जूलियट स्क्वाड्रन से हैं। अधिकारियों ने कहा कि तीनों प्रमुखों के साथ होने से तीनों सेवाओं के बीच संयुक्तता को और बेहतर बनाने में मदद मिलेगी और यह बहुत महत्वपूर्ण होगा जब तीनों सेवाएं एकीकृत थिएटर कमांड के निर्माण की दिशा में काम कर रही हों।
नए सीडीएस पद पर जनरल नरवणे का दावा मजबूत
सूत्रों ने कहा कि जनरल नरवणे सीडीएस बनने के लिए स्वाभाविक पसंद हैं। जनरल रावत की मिसाल को देखते हुए उन्हें यह पद मिल सकता है जिन्होंने सेना प्रमुख के रूप में कार्यभार संभालने के बाद शीर्ष पद संभाला था। लेकिन उनके नाम को अभी तक अंतिम रूप नहीं दिया गया है क्योंकि सरकार अभी भी कुछ विकल्पों पर विचार कर रही है।
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सरकारी सूत्रों के मुताबिक, अगला चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (सीडीएस) कौन होगा, इस पर अभी कोई फैसला नहीं लिया गया है। पिछले सीडीएस जनरल बिपिन रावत की पिछले साल दिसंबर में एक हेलिकॉप्टर दुर्घटना में मृत्यु हो जाने के बाद से यह पद खाली पड़ा है।
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कोर ऑफ इंजीनियर्स के पहले अधिकारी
ले. जनरल पांडे सेना प्रमुख बनने वाले कोर ऑफ इंजीनियर्स के पहले अधिकारी होंगे। इस पद पर अब तक इन्फैंट्री, आर्मर्ड और आर्टिलरी अधिकारियों का कब्जा रहा है। सूत्रों ने कहा कि लेफ्टिनेंट जनरल पांडे, जो पूर्वी सेना कमांडर रहे हैं और वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) के साथ प्रौद्योगिकी के अधिक एकीकरण के प्रमुख समर्थकों में से एक हैं। वह अपने साथ सेना प्रमुख की कुर्सी पर ऑपरेशनल और रसद दोनों अनुभव लाएंगे।
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एनडीए से हुई शुरुआत
शुरुआती स्कूलिंग के बाद ले. जनरल मनोज पांडे ने नेशनल डिफेंस अकेडमी ज्वाइन की। एनडीए के बाद उन्होंने इंडियन मिलिट्री एकेडमी जॉइन की और बतौर अफसर कमीशन लिया। उन्होंने 3 मई 1987 को सरकारी डेंटल कॉलेज की गोल्ड मेडलिस्ट अर्चना सल्पेकर से शादी की।
यूनाइटेड नेशन्स मिशन में बतौर चीफ इंजीनियर काम किया
ले. जनरल मनोज पांडे को दिसंबर 1982 में बॉम्बे सैपर्स में कमीशन मिला, जो कॉर्प्स ऑफ इंजीनियर्स की एक रेजिमेंट है। वह ब्रिटेन के कैमबर्ले के स्टाफ कॉलेज का भी हिस्सा रहे हैं। कोर्स पूरा होने के बाद वह भारत लौट आए और पूर्वोत्तर भारत की माउंटेन ब्रिगेड के ब्रिगेड मेजर नियुक्त किए गए। लेफ्टिनेंट कर्नल के पद पर पहुंचने के बाद उन्होंने इथियोपिया और इरिट्रिया में यूनाइटेड नेशन्स मिशन में बतौर चीफ इंजीनियर काम किया।
एक संयोग यह भी
इस बीच संयोग की बात यह है कि नए सेना प्रमुख की नियुक्ति के बाद भारतीय सशस्त्र बलों के तीनों सेना प्रमुख खडकवासला में राष्ट्रीय रक्षा अकादमी (एनडीए) के 61वें बैच से होंगे। रक्षा अधिकारियों के मुताबिक, नौसेना प्रमुख एडमिरल हरि कुमार और एयर चीफ मार्शल विवेक राम चौधरी भी उसी एनडीए कोर्स से हैं। लेफ्टिनेंट जनरल पांडे जहां लीमा स्क्वाड्रन से हैं, वहीं दो अन्य प्रमुख एनडीए के जूलियट स्क्वाड्रन से हैं। अधिकारियों ने कहा कि तीनों प्रमुखों के साथ होने से तीनों सेवाओं के बीच संयुक्तता को और बेहतर बनाने में मदद मिलेगी और यह बहुत महत्वपूर्ण होगा जब तीनों सेवाएं एकीकृत थिएटर कमांड के निर्माण की दिशा में काम कर रही हों।
नए सीडीएस पद पर जनरल नरवणे का दावा मजबूत
सूत्रों ने कहा कि जनरल नरवणे सीडीएस बनने के लिए स्वाभाविक पसंद हैं। जनरल रावत की मिसाल को देखते हुए उन्हें यह पद मिल सकता है जिन्होंने सेना प्रमुख के रूप में कार्यभार संभालने के बाद शीर्ष पद संभाला था। लेकिन उनके नाम को अभी तक अंतिम रूप नहीं दिया गया है क्योंकि सरकार अभी भी कुछ विकल्पों पर विचार कर रही है।