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Explainer: सरकार लाई नई सुविधा, क्या अब ऑनलाइन ठगी के बाद घर बैठे मिलेगा पैसा, कैसे काम करेगा ये सिस्टम?

Sun, 14 Jun 2026 06:00 AM IST
रिया दुबे स्पेशल डेस्क, अमर उजाला
स्पेशल डेस्क, अमर उजाला Published by: रिया दुबे Updated Sun, 14 Jun 2026 06:00 AM IST
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सार
साइबर ठगी के बाद फंसी रकम वापस पाने की प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए सरकार ने मोबाइल रेस्टोरेशन मॉड्यूल (MRM) शुरू किया है। इसके जरिए पीड़ित ऑनलाइन रिफंड के लिए आवेदन कर सकेंगे। हालांकि पैसा तभी वापस मिल सकेगा, जब समय पर शिकायत दर्ज हुई हो और रकम अपराधी के खाते में फ्रीज हो गई हो। यह सिस्टम कैसे काम करेगा और किन शर्तों पर मिलेगा रिफंड? आइए जानते हैं।
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Lost Money in an Online Scam? Here's How the New MRM System Works
सरकार का नया सिस्टम - फोटो : Amar Ujala

विस्तार

''मेरे खाते से किसी ने फ्रॉड करके पैसे निकाल लिए, अब क्या वे वापस मिल सकते हैं?" साइबर ठगी के शिकार होने वाले लाखों भारतीयों के लिए यह सबसे बड़ा सवाल होता है। अब तक शिकायत दर्ज कराने के बाद पीड़ितों को पुलिस, बैंक और अदालतों के बीच लंबी प्रक्रिया से गुजरना पड़ता था। कई मामलों में अपराधी का खाता फ्रीज हो जाने के बावजूद पैसा वापस पाने में महीनों लग जाते थे।



इसी चुनौती को देखते हुए गृह मंत्रालय के अधीन भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (I4C) ने मोबाइल रेस्टोरेशन मॉड्यूल (MRM) शुरू किया है। यह राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP) का नया डिजिटल मॉड्यूल है, जिसका उद्देश्य साइबर अपराध पीड़ितों को ऑनलाइन माध्यम से फंसी हुई रकम वापस दिलाने की प्रक्रिया को आसान बनाना है। यह पहल ऐसे समय में आई है जब भारत में साइबर अपराध तेजी से बढ़ रहे हैं और डिजिटल ठगी का स्वरूप पहले से कहीं अधिक जटिल हो चुका है।


आइए जानते हैं कि यह मॉड्यूल क्या है? यह कैसे काम करता है? आप कैसे इसमें अपनी शिकायत दर्ज कर सकता हैं? क्या प्रक्रिया है? साइबर घटनाएं कैसे बढ़ रही है? सरकार ने इस वर्ष साइबर सुरक्षा पर कितना खर्च किया? संचार साथी क्या है और कैसे मदद करता है? 

इस मॉड्यूल की आखिर जरूरत क्यों पड़ी?

भारत दुनिया की सबसे बड़ी डिजिटल अर्थव्यवस्थाओं में से एक बन रहा है। यूपीआई, नेट बैंकिंग, ई-कॉमर्स और सोशल मीडिया ने करोड़ों लोगों को ऑनलाइन दुनिया से जोड़ा है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार देश के 86 प्रतिशत से अधिक घर इंटरनेट से जुड़े हुए हैं। लेकिन जितनी तेजी से डिजिटल सेवाएं बढ़ीं, उतनी ही तेजी से साइबर अपराध भी बढ़े।  

सरकारी आंकड़े बताते हैं कि:
  • 2022 में साइबर सुरक्षा से जुड़ी घटनाओं की संख्या 10.29 लाख थी।
  • 2024 में यह बढ़कर 22.68 लाख पहुंच गई। यानी केवल दो वर्षों में साइबर घटनाओं की संख्या दोगुने से भी ज्यादा हो गई।
आज साइबर अपराध केवल OTP फ्रॉड तक सीमित नहीं हैं। अपराधी अब डिजिटल अरेस्ट, फर्जी निवेश योजनाएं, पार्ट-टाइम जॉब स्कैम, KYC अपडेट धोखाधड़ी, फेक कस्टमर केयर और सोशल मीडिया इम्पर्सोनेशन जैसे तरीकों का इस्तेमाल कर रहे हैं। ऐसे में सबसे बड़ी समस्या यह थी कि अगर पीड़ित समय रहते शिकायत कर भी दे और पैसा बैंकिंग सिस्टम में फ्रीज हो जाए, तब भी उसकी वापसी की प्रक्रिया बेहद जटिल रहती थी। MRM इसी समस्या का समाधान बनने का दावा करता है।

मोबाइल रेस्टोरेशन मॉड्यूल क्या है?

मोबाइल रेस्टोरेशन मॉड्यूल (MRM) एक ऑनलाइन रिफंड सिस्टम है, जिसे I4C ने विकसित किया है। इसका मूल उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि यदि साइबर ठगी की रकम अपराधी के खाते में फ्रीज कर दी गई है, तो पीड़ित घर बैठे उसे वापस पाने की प्रक्रिया शुरू कर सके।

पहले पीड़ित को किन-किन परेशानियों का सामना करना पड़ता था?

  • बैंक शाखाओं के चक्कर लगाने पड़ते थे।
  • पुलिस कार्यालय जाना पड़ता था।
  • दस्तावेज जमा करने पड़ते थे।
  •  कई बार अदालत की प्रक्रिया भी पूरी करनी पड़ती थी। 
अब इस पूरी प्रक्रिया का बड़ा हिस्सा ऑनलाइन किया जा रहा है। I4C के अधिकारियों के अनुसार यह मॉड्यूल नागरिकों को "घर बैठे" रिफंड अनुरोध दर्ज करने की सुविधा देता है।

क्या हर किसी को पैसा वापस मिलेगा?

यह समझना जरूरी है कि MRM कोई जादुई समाधान नहीं है। रिफंड तभी संभव होगा जब दो महत्वपूर्ण शर्तें पूरी हों:

पहली शर्त
तुरंत शिकायत: पीड़ित ने ठगी होने के तुरंत बाद, 1930 हेल्पलाइन पर कॉल किया हो, या NCRP पोर्टल पर शिकायत दर्ज की हो।

दूसरी शर्त
पैसा अपराधी के बैंक खाते में ट्रेस होकर फ्रीज कर दिया गया हो। अगर पैसा पहले ही दूसरे खातों में ट्रांसफर हो चुका है या निकाल लिया गया है, तो MRM के जरिए रिफंड संभव नहीं होगा। यही वजह है कि विशेषज्ञ हमेशा कहते हैं कि साइबर ठगी होने पर मिनटों के भीतर शिकायत दर्ज करना बेहद महत्वपूर्ण है।

MRM में रिफंड की तीन श्रेणियां

सरकार ने अलग-अलग मामलों के लिए अलग प्रक्रिया बनाई है।

श्रेणी 1: 50,000 रुपये तक की राशि
अगर किसी खाते में फ्रीज की गई रकम 50 हजार रुपये से कम है तो:
  • एफआईआर जरूरी नहीं और कोर्ट ऑर्डर जरूरी नहीं।
  • पुलिस शिकायत के आधार पर प्रक्रिया आगे बढ़ सकती है। 
  • इससे छोटे पीड़ितों को सबसे ज्यादा राहत मिलने की उम्मीद है।
श्रेणी 2: कुल राशि 50,000 रुपये से ज्यादा, लेकिन कई खातों में बंटी हुई
  • मान लीजिए कुल 80 हजार रुपये फ्रीज हुए हैं, लेकिन किसी एक खाते में 50 हजार रुपये से ज्यादा नहीं हैं।
  • ऐसे मामलों में भी, एफआईआर और कोर्ट के आदेश की आवश्यकता नहीं।
श्रेणी 3: एक ही खाते में 50,000 रुपये से अधिक
यह सबसे संवेदनशील श्रेणी है। अगर किसी एक बैंक खाते में 50 हजार रुपये से ज्यादा राशि फ्रीज हुई है तो:
  • एफआईआर दर्ज कराना अनिवार्य होगा।
  • अदालत का आदेश लेना होगा।
  • इसके बाद ही रिफंड प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।

MRM पोर्टल पर रिफंड के लिए अप्लाई कैसे कर सकते हैं?

अपना पैसा वापस पाने के लिए आपको बस ये आसान स्टेप्स फॉलो करने हैं:
  • पोर्टल पर जाएं: सबसे पहले MRM पोर्टल पर जाएं और सिटिजेन लॉगिन बटन पर टैप करें।
  • लॉगिन करें: अपने उसी मोबाइल नंबर से लॉगिन करें जो NCRP पोर्टल (साइबर क्राइम शिकायत) पर रजिस्टर्ड है।
  • रिक्वेस्ट डालें: रेज रिफंड रिक्वेस्ट सेक्शन में जाएं और अपनी 14-अंकों वाली कंप्लेंट आईडी (जो आपको NCRP पोर्टल से मिली थी) दर्ज करें।
  • डॉक्यूमेंट्स अपलोड करें: मांगे गए जरूरी डॉक्युमेंट्स जैसे- पैन कार्ड, बैंक अकाउंट की डिटेल्स और FIR की कॉपी (अगर आपकी कैटेगरी में लागू हो) अपलोड करें।
  • स्टेटस चेक करें: सबमिट करने के बाद पोर्टल एक ट्रैकिंग कोड जनरेट करेगा जो 'MR2026' से शुरू होगा। इस कोड की मदद से आप भविष्य में अपने रिफंड का लाइव स्टेटस आसानी से चेक कर सकते हैं।

अब आता है संचार साथी का रोल

सरकार का दावा है कि जहां MRM साइबर ठगी के बाद फंसी रकम वापस दिलाने पर केंद्रित है, वहीं दूरसंचार विभाग का संचार साथी अपराध को रोकने और डिजिटल पहचान सुरक्षित रखने का काम करता है। साइबर अपराध का बड़ा हिस्सा मोबाइल फोन, फर्जी सिम और चोरी हुए उपकरणों के जरिए संचालित होता है। इसी कड़ी को तोड़ने के लिए संचार सारथी विकसित किया गया। केंद्र सरकार की दूरसंचार सुरक्षा पहल, संचार साथी को 17 जनवरी 2025 को मोबाइल एप के रूप में लॉन्च किया गया था।

संचार साथी क्या करता है?

इसके जरिए नागरिक:
  • चोरी या खोया हुआ मोबाइल ब्लॉक कर सकते हैं।
  • IMEI ((इंटरनेशनल मोबाइल इक्विपमेंट आइडेंटिटी) ट्रैक कर सकते हैं।
  • संदिग्ध कॉल और संदेशों की शिकायत कर सकते हैं।
  • मोबाइल की वैधता जांच सकते हैं।
  • बैंक और वित्तीय संस्थानों के आधिकारिक संपर्क सत्यापित कर सकते हैं।

क्या ये अब तक कोई रिकवरी कर सका है? 

दूरसंचार विभाग के अनुसार:
  • अक्तूबर 2025 में पहली बार एक महीने में 50,000 से अधिक मोबाइल रिकवर हुए।
  • देशभर में कुल रिकवरी 7 लाख से अधिक पहुंच चुकी है।
  • औसतन हर मिनट एक से अधिक मोबाइल फोन बरामद किया जा रहा है।


इसके अलावा सरकार ने इसकी मदद से:
  • 9.42 लाख से अधिक संदिग्ध SIM कार्ड ब्लॉक किए।
  • 2.63 लाख से अधिक IMEI नंबर ब्लॉक किए।
ये सभी साइबर अपराध और धोखाधड़ी से जुड़े मामलों में चिह्नित किए गए थे।

सरकार ने अब तक साइबर सुरक्षा में कितना किए खर्च?

साइबर अपराधों में तेज वृद्धि के बीच केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय साइबर सुरक्षा एजेंसी CERT-In के लिए पिछले चार वर्षों में 255 से 277 करोड़ रुपये के बीच बजट आवंटित किया है। 2025-26 में यह आवंटन बढ़कर 277 करोड़ रुपये पहुंचा, जबकि 2026-27 में इसके लिए 269 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।



कुल मिलाकर नियामक प्राधिकरण के लिए 2026-27 में 464 करोड़ रुपये का प्रावधान रखा गया है, जिसमें CERT-In सबसे बड़ा हिस्सा है। यह राशि साइबर हमलों की निगरानी, साइबर घटनाओं पर प्रतिक्रिया, सुरक्षा अलर्ट जारी करने, महत्वपूर्ण डिजिटल अवसंरचना की सुरक्षा और राष्ट्रीय साइबर सुरक्षा क्षमता बढ़ाने पर खर्च की जाती है।
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