Jagannath Rath Yatra: पुरी के जगन्नाथ मंदिर प्रबंधन की ISKCON से अपील, रथ यात्रा और अनुष्ठान शास्त्र सम्मत हों
श्री जगन्नाथ मंदिर प्रबंधन समिति के अध्यक्ष गजपति महाराजा दिव्यसिंह देब ने इस्कॉन को पत्र लिखा है, जिसमें उन्होंने इस्कॉन से अपील की है कि भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा और स्नान यात्रा का आयोजन शास्त्र सम्मत हो। उन्होंने कहा कि इस्कॉन पिछले 50 वर्षों से भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा और स्नान यात्रा अनियमित तिथियों पर आयोजित करता आ रहा है, जिससे असंख्या भक्तों की धार्मिक भावनाएं आहत होती हैं।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
ओडिशा के पुरी स्थित श्री जगन्नाथ मंदिर प्रशासन ने शनिवार को इस्कॉन से अपील की कि 'रथ यात्रा' और 'स्नान यात्रा' का आयोजन शास्त्र सम्मत हो। श्री जगन्नाथ मंदिर प्रबंध समिति के अध्यक्ष गजपति महाराजा दिव्यसिंह देब ने बताया कि इस संबंध में उन्होंने अंतरराष्ट्रीय कृष्ण भावनामृत संघ (इस्कॉन) को पत्र लिखा है।
पत्रकारों से बात करते हुए उन्होंने कहा, 'इस्कॉन पिछले 50 वर्षों से भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा और स्नान यात्रा अनियमित तिथियों पर आयोजित करता आ रहा है, जिससे असंख्या भक्तों की धार्मिक भावनाएं आहत होती हैं। हम इस्कॉन आग्रह करते हैं कि वह जल्द से जल्द उचित कदम उठाए ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि ये पवित्र उत्सव दुनिया भर के सभी इस्कॉन मंदिरों/केंद्रों में पवित्र ग्रंथों और परंपराओं के अनुसार मनाए जाएं।' इस मौके पर उनके साथ श्री जगन्नाथ मंदिर प्रशासन (एसजेटीए) के मुख्य प्रशासक अरबिंद पाधी भी थे।
#WATCH | Bhubaneswar, Odisha | On Lord Jagannath Rath Yatra carried out by ISCKON temples, Erstwhile King of Puri, Gajapati Maharaja Dibyasingha Deb says, "The very well-established tradition regarding the festivals of Lord Jagannatha is that the Lord celebrates his birthday with… pic.twitter.com/eaLmHEAEbV
— ANI (@ANI) September 7, 2025
ये भी पढ़ें: Bhutan PM Visit: अयोध्या पहुंचे भूटान के प्रधानमंत्री, पीएम मोदी बोले- श्रीराम के आदर्श सभी के लिए प्रेरणा
जेष्ठ पूर्णिमा तिथि को होनी चाहिए स्नान यात्रा
देब ने दावा किया कि शास्त्रों में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि भगवान जगन्नाथ की स्नान यात्रा ज्येष्ठ पूर्णिमा तिथि को होनी चाहिए, लेकिन इस्कॉन मंदिर इसे अपनी मनमर्जी से कर रहे हैं। उन्होंने कहा, 'यह पाया गया है कि 2025 से सितंबर तक, भारत और विदेशों में विभिन्न स्थानों पर कम से कम 40 इस्कॉन मंदिरों ने पवित्र शास्त्रों और परंपराओं का उल्लंघन करते हुए स्नान यात्राएं की हैं।'
68 इस्कॉन मंदिरों में शास्त्रों के विपरीत आयोजित की गई हैं रथ यात्राएं
उन्होंने आगे कहा कि इसी तरह, यह भी देखा गया है कि कई देशों में कम से कम 68 इस्कॉन मंदिरों में शास्त्रों के विपरीत रथ यात्राएं आयोजित की गई हैं। देब ने जोर देकर कहा, 'साल के किसी भी दिन रथ यात्रा मनाने का कोई वैध औचित्य नहीं हो सकता।'
ये भी पढ़ें: Politics: ‘श्रेय लेने की होड़ नहीं, सीएम संग टीम में काम कर रहा’; आरक्षण मुद्दे के बीच शिंदे ने क्यों कहा ऐसा?
कानूनी विकल्प उठाने के लिए मजबूर न करें
उन्होंने यह भी कहा कि मार्च में इस्कॉन के विद्वानों के साथ एक बैठक हुई थी, जहां ये मुद्दे उठाए गए थे। देब ने कहा, 'लंबी बहस के बाद, इस्कॉन भारत में निर्धारित दिन पर रथ यात्रा आयोजित कर रहा है, लेकिन दुनिया भर में उल्लंघन जारी हैं।' उन्होंने आगे कहा कि हमें उम्मीद है कि वे जल्द ही अपनी गलतियां सुधार लेंगे। हमारे पास कानूनी विकल्प सहित सभी विकल्प खुले हैं। लेकिन, हम उनसे आग्रह करते हैं कि वे हमें ऐसे कदम उठाने के लिए मजबूर न करें।